देश के भीतर लंबी दूरी की रेल यात्रा के दौरान बरती जाने वाली जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसकी एक बानगी हालिया दुर्घटना में देखने को मिली है। सफर के दौरान थोड़ा सा आराम या जल्दबाजी कई बार जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। रेलवे लगातार यात्रियों को यह चेतावनी देता रहता है कि चलती ट्रेन के गेट पर बैठना या खड़े होना जानलेवा हो सकता है, इसके बावजूद लोग इस गंभीर चेतावनी को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक प्रवासी मजदूर की ट्रेन के गेट पर बैठने के कारण चलती गाड़ी से नीचे गिरने से मौत हो गई। इस हादसे ने एक बार फिर से रेल यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों और यात्रियों की व्यक्तिगत सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूरत से बिहार के सफर के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले दो सगे भाई—कृष्ण कुमार और भूषण पासवान—गुजरात के सूरत शहर में रहकर मजदूरी करते थे। त्योहार या घर की जरूरतों के चलते दोनों भाइयों ने अपने पैतृक गांव लौटने का फैसला किया था। इसके लिए उन्होंने अवध एक्सप्रेस के जनरल कोच में रिजर्वेशन या जनरल टिकट के जरिए यात्रा शुरू की थी। सूरत से ट्रेन रवाना हुई और दोनों भाई उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार की तरफ बढ़ रहे थे। सफर लंबा था और जनरल कोच में भारी भीड़ होने के कारण अंदर पैर रखने की भी जगह नहीं थी। ऐसे में दोनों भाई किसी तरह कोच के अंदर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भीड़भाड़ और घुटन से बचने के लिए छोटा भाई भूषण कोच के दरवाजे के पास जा बैठा।
रात के वक्त ट्रेन जब तय रूट से गुजर रही थी, तब यात्रियों की थकान अपने चरम पर थी। कृष्ण कुमार कोच के अंदर बैठे हुए थे, जबकि भूषण हवा खाने और थोड़ी राहत पाने के लिए गेट के पास ही बैठ गया। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह छोटा सा निर्णय उनके पूरे परिवार को जिंदगी भर का गम दे जाएगा। रात के करीब सवा ग्यारह बजे ट्रेन एक रेलवे स्टेशन पर रुकी और कुछ ही देर बाद वहां से आगे बढ़ी। जैसे ही ट्रेन ने रफ्तार पकड़ी, वैसे ही यह अनहोनी घटित हो गई।
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गेट पर बैठे युवक को आई झपकी और हो गया भयानक हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक के भाई के अनुसार, ट्रेन के स्टेशन से रवाना होते ही अचानक एक झटका लगा या फिर रात के वक्त गहरी थकान के कारण भूषण को झपकी आ गई। झपकी आते ही उसका संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह संभल नहीं पाया। देखते ही देखते वह चलती ट्रेन के खुले दरवाजे से नीचे ट्रैक पर जा गिरा। जैसे ही आसपास के यात्रियों ने उसे गिरते हुए देखा, डिब्बे में चीख-पुकार मच गई। यात्रियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए चेन पुलिंग (आपातकालीन जंजीर खींचना) कर दी, ताकि ट्रेन को तुरंत रोका जा सके।
यात्रियों के प्रयास से ट्रेन कुछ ही दूरी पर रुक तो गई, लेकिन उस समय तक रात का अंधेरा था और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई थी कि असल में मामला क्या है। ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर को भी इस बात की तुरंत सटीक सूचना नहीं मिल पाई कि चेन क्यों खींची गई है। असमंजस की स्थिति और स्पष्ट जानकारी के अभाव में ट्रेन कुछ देर रुकने के बाद दोबारा अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गई।
भाई ने ऐसे लगाया हादसे का पता, मचा कोहराम
ट्रेन के दोबारा चलने के बाद कोच के अंदर अफरा-तफरी का माहौल था। कृष्ण कुमार ने जब अपने भाई को अपनी सीट या आसपास नहीं देखा, तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। उन्होंने पूरे जनरल कोच में अपने भाई को ढूंढा, लेकिन भूषण कहीं नजर नहीं आया। इसके बाद उन्होंने यात्रियों से पूछताछ की, तब उन्हें पता चला कि गेट पर बैठा एक युवक नीचे गिर गया है। यह सुनते ही कृष्ण कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें समझ आ गया कि वह युवक कोई और नहीं बल्कि उनका अपना छोटा भाई भूषण ही था।
"हम दोनों भाई सूरत में साथ रहकर मेहनत-मजदूरी करते थे और अपने गांव लौट रहे थे। सफर के दौरान अचानक हलचल हुई तो मैंने भाई को तलाशा, लेकिन वह नहीं मिला। बाद में पता चला कि वह ट्रेन से नीचे गिर गया है। झपकी आने की वजह से उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रैक पर जा गिरा।" — कृष्ण कुमार, मृतक का भाई
दुख और घबराहट से भरे कृष्ण कुमार ने अगले स्टेशन यानी फफूंद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही नीचे छलांग लगा दी। उन्होंने तुरंत रेलवे स्टेशन के अधिकारियों और संबंधित जीआरपी व आरपीएफ कर्मियों को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल हरकत में आया और तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। पुलिस टीम ने रेलवे ट्रैक के किनारे तलाशी अभियान चलाया, जहां युवक का शव बरामद हुआ। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसकी शिनाख्त कराई, जिसके बाद मृतक के भाई ने उसकी पहचान की।
रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जिम्मेदारी पर फिर उठे सवाल
इस दुखद घटना के बाद रेलवे पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव का पंचनामा भरा और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना की खबर जैसे ही बिहार के सीतामढ़ी स्थित उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कमाने के लिए घर से बाहर गए जवान बेटे की इस तरह अचानक मौत हो जाने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को सामने लाता है कि ट्रेन यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। रेलवे प्रशासन बार-बार अपील करता है कि यात्रा के दौरान कभी भी ट्रेन के गेट पायदान पर न बैठें, न ही दरवाजे पर खड़े होकर सफर करें। जनरल कोचों में भारी भीड़ के कारण लोगों को बैठने की जगह नहीं मिलती, जिसके चलते वे मजबूरी या अनजाने में गेट पर बैठ जाते हैं, जो मौत को दावत देने जैसा है। प्रशासनिक स्तर पर ट्रेनों में भीड़ नियंत्रण के उपाय तो किए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों को भी अपनी जान की कीमत समझनी होगी और सफर के दौरान पूरी सावधानी बरतनी होगी ताकि ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।





