मनीव्यू आईपीओ की धमाकेदार लिस्टिंग ने चौंकाया
भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हाल ही में आए इनिशियल पब्लिक आफरिंग यानी आईपीओ ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। डिजिटल लेंडिंग सेगमेंट की प्रमुख कंपनी मनीव्यू लिमिटेड के शेयरों ने शेयर बाजार में कदम रखते ही इतिहास रच दिया। कंपनी के शेयरों ने पहले ही सत्र में अपने निवेशकों को उम्मीद से कहीं अधिक बंपर रिटर्न देकर हैरान कर दिया। जिन निवेशकों को इस आईपीओ का आवंटन मिला था, उनकी चांदी हो गई क्योंकि बाजार में खुलते ही इस शेयर ने रॉकेट जैसी रफ्तार पकड़ ली और देखते ही देखते तगड़ा मुनाफा दर्ज कराया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में जब बाजार के कई दिग्गज सूचकांक दबाव का सामना कर रहे हैं, ऐसे में किसी फिनटेक और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म के आईपीओ का इस तरह से शानदार प्रदर्शन करना अपने आप में एक बड़ा संकेत है। मनीव्यू के शेयरों की यह मजबूत शुरुआत कंपनी के मजबूत फंडामेंटल और निवेशकों के बीच उसके कारोबार मॉडल को लेकर बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
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बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर मजबूत शुरुआत और आगे की तेजी
मनीव्यू लिमिटेड के शेयर गुरुवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर तय अनुमानों से कहीं बेहतर कीमत पर लिस्ट हुए। कंपनी के शेयर 55.61 रुपये के भाव पर लिस्ट हुए, जबकि इसका इश्यू प्राइस मात्र 34 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। इस हिसाब से देखें तो निवेशकों को लिस्टिंग के शुरुआती पलों में ही लगभग 64 प्रतिशत का बंपर फायदा मिल गया।
लिस्टिंग की यह शुरुआती चमक यहीं नहीं रुकी। बाजार में कारोबार आगे बढ़ने के साथ ही निवेशकों और ट्रेडर्स की ओर से इस शेयर में लगातार लिवाली देखने को मिली। लिवाली का यह दौर इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि शेयर अपने शुरुआती लिस्टिंग भाव से करीब 11.5 प्रतिशत और उछल गया। सत्र के दौरान यह शेयर अपने ऊपरी सर्किट यानी 62 रुपये के उच्च स्तर को छू गया। यदि निर्गम मूल्य से तुलना की जाए, तो शुरुआती दिन ही निवेशकों को करीब 82 प्रतिशत तक का बंपर रिटर्न हासिल हुआ।
आईपीओ सब्सक्रिप्शन और फंड के इस्तेमाल की योजना
यह सफलता रातोंरात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे निवेशकों का भारी समर्थन था। मनीव्यू लिमिटेड के कुल 1,092 करोड़ रुपये के इस आईपीओ को बोली के अंतिम दिन निवेशकों की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस आईपीओ को कुल 98.46 गुना सब्सक्राइब किया गया था, जो इसकी जबरदस्त मांग को बयां करता है। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 32 से 34 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था।
कंपनी इस आईपीओ के जरिए जुटाई गई भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल अपने कारोबारी विस्तार में करने जा रही है। योजना के अनुसार, जुटाई गई पूंजी में से 325 करोड़ रुपये सीधे तौर पर कंपनी के मुख्य लेंडिंग यानी कर्ज देने के कारोबार को और मजबूत बनाने में लगाए जाएंगे। इसके अलावा, 250 करोड़ रुपये कंपनी की एनबीएफसी सब्सिडियरी के पूंजी आधार को बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाएंगे, ताकि भविष्य में और अधिक ग्राहकों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा सके। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों और कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में होगा।
वैल्यूएशन और बाजार के जानकारों की चेतावनी
शानदार लिस्टिंग के बाद मनीव्यू का वैल्यूएशन भी काफी ऊपर चला गया है। 55 रुपये के भाव पर कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स यानी पीई रेशियो बढ़कर 40.05 गुना हो गया है, जो आईपीओ के समय 24.76 गुना था। इसके अलावा प्राइस-टू-बुक रेशियो भी बढ़कर 3.50 गुना पर पहुंच गया है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि चूंकि कंपनी सीधे तौर पर लोन देने यानी लेंडिंग के कारोबार से जुड़ी है, इसलिए निवेशकों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है।
"डिजिटल लेंडिंग कंपनियों के शेयरों में निवेश करते समय निवेशकों को सिर्फ शुरुआती लिस्टिंग गेन से खुश नहीं होना चाहिए। कंपनी की लोन क्वालिटी, डिफॉल्ट रेट और तिमाही नतीजों पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है ताकि दीर्घकालिक जोखिमों से बचा जा सके।" — वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक, शेयर बाजार
सितंबर में आईपीओ बाजार की रिकॉर्डतोड़ तेजी
मनीव्यू की यह सफलता अकेली नहीं है। सितंबर महीने में भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांकों में भले ही कमजोरी और सुस्ती का माहौल रहा हो, लेकिन प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। सितंबर के दौरान कुल 34 मेनबोर्ड कंपनियों ने अपने आईपीओ बाजार में उतारे और इसके जरिए निवेशकों से रिकॉर्ड 39,380 करोड़ रुपये जुटाए। यह साल 2026 में किसी भी एक महीने के दौरान जुटाए गए फंड का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान आने वाले आईपीओ का औसत वैल्यूएशन भी काफी ऊंचा रहा। सितंबर में लिस्ट हुए आईपीओ का मीडियन पीई रेशियो 42.5 गुना दर्ज किया गया, जबकि अगस्त में यह 33.7 गुना था। इसमें सबसे बड़ा योगदान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के उस बड़े इश्यू का भी रहा, जिसने अकेले ही इस कुल राशि का बड़ा हिस्सा जुटाया। इन तमाम आंकड़ों से साफ है कि बाजार के तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय निवेशकों का रुझान अच्छी कंपनियों के आईपीओ में निवेश करने को लेकर अब भी पूरी तरह बना हुआ है।








