सिनेमाघरों में बॉक्स ऑफिस क्लैश और अलग जॉनर की जंग
मनोरंजन जगत में इन दिनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस की भिड़ंत आम बात हो चुकी है, लेकिन जब दो बिल्कुल अलग मिजाज की फिल्में एक ही समय पर दर्शकों के सामने आती हैं, तो तुलना होना लाजमी है। हाल ही में रिलीज हुई बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मिर्जापुर द मूवी' के सामने बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसा प्रतिद्वंदी खड़ा हुआ जिसकी शायद किसी ने शुरुआती दौर में इतनी बड़ी उम्मीद नहीं की थी। हम बात कर रहे हैं स्पिरिचुअल ड्रामा फिल्म 'हनुमान अंश' की, जिसने सिनेमाघरों में आते ही जबरदस्त पकड़ बना ली और देखते ही देखते स्क्रीन्स की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की।
इस अप्रत्याशित सफलता के बाद फिल्म गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या 'हनुमान अंश' की इस तेज आंधी की वजह से 'मिर्जापुर द मूवी' के कलेक्शन या परफॉर्मेंस पर कोई नकारात्मक असर पड़ा है? हालांकि, इन तमाम अटकलों और चर्चाओं के बीच 'मिर्जापुर द मूवी' के निर्देशक गुरमीत सिंह ने चुप्पी तोड़ी है और इस पूरे मामले पर अपना स्पष्ट रुख रखा है। उनका मानना है कि सिनेमाई बाजार बहुत बड़ा है और हर शैली की फिल्म के लिए वहां अपनी जगह और दर्शक हमेशा मौजूद रहते हैं।
गुरमीत सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान स्पष्ट किया कि बॉक्स ऑफिस पर उतार-चढ़ाव और अलग-अलग फिल्मों की सफलता एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय कई बड़े बजट की फिल्में भी सिनेमाघरों में आईं जो बॉक्स ऑफिस पर उस तरह का कमाल नहीं दिखा पाईं जिसकी उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में यदि कोई दूसरी फिल्म शानदार प्रदर्शन कर रही है, तो इसे सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए क्योंकि इससे पूरे फिल्म उद्योग को गति मिलती है और काम करने का माहौल और बेहतर होता है।
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निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के साथ पुरानी दोस्ती और सफलता का जश्न
'मिर्जापुर द मूवी' के निर्देशक के लिए 'हनुमान अंश' की सफलता केवल एक बिजनेस कंपीटिशन नहीं, बल्कि एक निजी खुशी का मौका भी है। गुरमीत सिंह और 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के बीच का रिश्ता काफी पुराना है। दोनों ने उस दौर में साथ काम किया था जब वे बड़े बजट की कमर्शियल फिल्मों या थिएटर की चर्चाओं से कोसों दूर थे। गुरमीत ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि साल 2013 में उन्होंने और विशाल ने मिलकर दो वीडियो डायरेक्ट किए थे।
इसी पुरानी बॉन्डिंग के चलते गुरमीत सिंह ने विशाल चतुर्वेदी और उनकी पूरी टीम को दिल से बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कृति तैयार की है वह बेहद सराहनीय है और इसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एक साथी फिल्ममेकर के तौर पर वे इस बात से बेहद खुश हैं कि उनके पुराने सहकर्मी ने बॉक्स ऑफिस पर एक यादगार मुकाम हासिल किया है। यह आपसी सौहार्द यह भी सिखाता है कि किस तरह फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार एक-दूसरे की कामयाबी का जश्न मनाते हैं, चाहे वे बॉक्स ऑफिस पर अलग-अलग बैनर के साथ ही क्यों न खड़े हों।
यह भी गौर करने वाली बात है कि दोनों फिल्मों का विषय और मिजाज जमीन-आसमान का फर्क रखता है। जहाँ एक तरफ 'हनुमान अंश' विशुद्ध रूप से आध्यात्मिकता, आस्था और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देती है, वहीं दूसरी तरफ 'मिर्जापुर' की दुनिया अपराध, हिंसा, और सत्ता की लालसा से भरी एक बेहद डार्क और जटिल दुनिया है। निर्देशक गुरमीत सिंह ने इस अंतर को बड़े ही दिलचस्प अंदाज में समझाया और दर्शकों से अपील की कि वे सिर्फ मनोरंजन के लिए ही फिल्मों को देखें।
'मिर्जापुर' की डार्क दुनिया और 'हनुमान अंश' के आध्यात्मिक संदेश का अंतर
सिनेमा प्रेमियों के लिए यह दौर काफी दिलचस्प रहा है क्योंकि एक तरफ वे स्क्रीन पर खून-खराबे और राजनीतिक दांवपेंच से भरी 'मिर्जापुर द मूवी' के रोमांच का लुत्फ उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ वे 'हनुमान अंश' के जरिए आस्था और मानसिक शांति के सफर से भी जुड़ रहे हैं। गुरमीत सिंह ने दोनों फिल्मों की तुलना करते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि दर्शकों को इन दोनों दुनिया के बीच का फर्क समझना चाहिए।
"एक तरफ वह दर्शकों को सिखा रहे हैं कि कैसे आध्यात्मिक बनें और अच्छी जिंदगी में भरोसा रखें और दूसरी तरफ हम उन्हें दुनिया का एक बहुत डार्क पहलू दिखा रहे हैं। लेकिन प्लीज हमारे किरदारों को फॉलो न करें; 'हनुमान अंश' के लोग जो कर रहे हैं, उसे फॉलो करें।" — गुरमीत सिंह, निर्देशक ('मिर्जापुर द मूवी')
इस तरह के बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि निर्देशक अपनी कहानी के काल्पनिक और खूंखार स्वरूप को लेकर पूरी तरह सजग हैं। 'मिर्जापुर' फ्रैंचाइजी की शुरुआत साल 2018 में अमेज़न प्राइम वीडियो पर एक वेब सीरीज के रूप में हुई थी। किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि इसके किरदार, गालियां, और तड़क-भड़क भरे डायलॉग्स भारतीय ओटीटी इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होंगे। देखते ही देखते यह सीरीज एक कल्चरल फिनोमेनन बन गई और इसके हर एक किरदार ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।
ओटीटी प्लेटफॉर्म से निकलकर बड़े पर्दे तक का यह सफर निर्देशक और उनकी पूरी टीम के लिए किसी रोमांचक रोमांच से कम नहीं रहा है। गुरमीत सिंह का यह भी कहना है कि वे 2018 के बाद से लगातार इस सफलता का जश्न मनाते आ रहे हैं और उनके लिए यह सफर एक कभी न खत्म होने वाली पिकनिक की तरह रहा है जो समय के साथ और अधिक रोचक होता जा रहा है।
'मिर्जापुर' फ्रैंचाइजी का भविष्य और दर्शकों के लिए आगे के बड़े प्लान
जब भी 'मिर्जापुर' जैसे किसी बड़े ब्रांड या फ्रैंचाइजी की बात होती है, तो फैंस के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इसके आगे के सीजन या फिल्में कब आएंगी। एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ भविष्य की योजनाओं को लेकर जब निर्देशक से सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही संतुलित और उत्साहजनक जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स में कई सारे मूविंग पार्ट्स और तमाम स्टेकहोल्डर्स शामिल होते हैं, जिनकी सहमति और प्लानिंग से ही अगला कदम उठाया जाता है।
गुरमीत ने यह भी बताया कि टीम के पास भविष्य के लिए कई बड़े और बेहतरीन प्लान तैयार हैं, लेकिन सही समय और सही प्रोजेक्ट का चुनाव करना बेहद जरूरी होता है ताकि किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति न बने। उन्होंने दर्शकों से वादा किया कि 'मिर्जापुर' की दुनिया अभी खत्म नहीं हुई है और यह किसी न किसी रूप में वापसी जरूर करेगी। फैंस का यह इंतजार जल्द ही खत्म होगा क्योंकि मेकर्स की प्लानिंग के मुताबिक यह खूंखार और रोमांचक दुनिया एक बार फिर नए कलेवर में दर्शकों के सामने पेश होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
संक्षेप में कहें तो, बॉक्स ऑफिस पर 'हनुमान अंश' और 'मिर्जापुर द मूवी' का एक साथ टिके रहना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय दर्शक अब विविधतापूर्ण सिनेमा को खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं। जहाँ एक तरफ लोग भक्ति और आध्यात्म से जुड़ी कहानियों को पसंद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ क्राइम थ्रिलर का रोमांच भी कम नहीं हुआ है। दोनों फिल्मों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि कंटेंट में दम हो, तो सिनेमाघरों में हर जॉनर की फिल्म के लिए पर्याप्त दर्शक और बिजनेस की असीम संभावनाएं हमेशा मौजूद रहती हैं।








