मानसून की विदाई और देश भर में बदलता मौसम का मिजाज
देश भर में मानसून के लौटने का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विज्ञान विभाग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर भारत के कई प्रमुख राज्यों से मानसून ने विदा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, मौसम का यह बदलाव हर जगह एक जैसा नहीं है। जहां एक तरफ मैदानी इलाकों में आसमान साफ होने लगा है और हल्की ठंडक की आहट महसूस होने लगी है, वहीं दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में बादलों का डेरा अब भी बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की विदाई कोई अचानक होने वाली प्रक्रिया नहीं है। यह धीरे-धीरे और क्रमिक चरणों में पूरी होती है। इस बार भी सितंबर के अंतिम दिनों और अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही मौसम में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। कहीं लोग चिलचिलाती धूप और साफ मौसम का आनंद ले रहे हैं, तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने आम जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है।
मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में देश के एक बड़े हिस्से से मानसून पूरी तरह से विदा हो जाएगा। इसके साथ ही त्योहारी सीजन के आते-आते उत्तर भारत के तापमान में गिरावट दर्ज होने की संभावना है, जिससे सुबह और शाम के वक्त हल्की सिहरन महसूस होने लगेगी।
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उत्तर भारत से मानसून की विदाई और साफ होता आसमान
राजधानी दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम हिस्सों से मानसून अब लगभग रुखसत हो चुका है। समय से पहले हुई इन बदलावों के चलते इन इलाकों में अब मौसम पूरी तरह शुष्क नजर आने लगा है। सुबह और शाम के वक्त चलने वाली हल्की हवाओं ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि अब सर्दियों के आने का वक्त करीब आ रहा है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट बताती है कि इन क्षेत्रों में अगले दो से तीन दिनों के भीतर बारिश की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी और धूप खिली रहेगी। किसानों के लिए यह समय खरीफ की पकी हुई फसलों को समेटने और अगली यानी रबी की फसल की तैयारी करने का होता है। हालांकि, अचानक से धूप तेज होने के कारण तापमान में मामूली बढ़ोतरी भी दर्ज की जा रही है, लेकिन कुल मिलाकर मौसम सुहाना बना हुआ है।
पर्वतीय राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में भी अब ठंड ने दस्तक दे दी है। उत्तराखंड के कुछ चुनिंदा ऊंचाई वाले स्थानों पर हल्की बर्फबारी की भी शुरुआत हो चुकी है, जिससे पहाड़ों पर सैलानियों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर और नदियों का उफान
एक तरफ जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य हिस्सों से मानसून लौट चुका है, वहीं प्रदेश की नदियां अभी भी उफान पर हैं। गंगा, शारदा, घाघरा और गोमती जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं। कई जिलों में बाढ़ के पानी ने भारी तबाही मचा रखी है। निचले इलाकों में पानी भर जाने से बस्तियों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है।
गोंडा और मऊ जैसे जिलों में स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है, जहां दर्जनों गांव टाوب में तब्दील हो चुके हैं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रशासनिक अमला मुस्तैदी से जुटा हुआ है ताकि प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाई जा सके।
"इस बार मानसून सीजन के दौरान औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते नदियां अपने पूरे उफान पर हैं और विदाई के वक्त भी निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।" — मौसम विशेषज्ञ, बीएचयू
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में अभी भी बरस रहे हैं बादल
उत्तर भारत भले ही सूखे मौसम की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में मानसून पूरी तरह मेहरबान है। तटीय कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कई जिलों में भारी बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग ने इन इलाकों में एहतियात के तौर पर येलो अलर्ट भी जारी किया है ताकि लोग सतर्क रहें।
इसी तरह, पूर्वोत्तर राज्यों में भी कम दबाव के क्षेत्र के सक्रिय रहने से गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल रही हैं और झमाझम बारिश हो रही है। इन क्षेत्रों में अभी मानसून के पूरी तरह लौटने की कोई तत्काल संभावना नहीं दिखाई दे रही है। कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से यह बारिश फायदेमंद है, लेकिन लगातार हो रही वर्षा से यातायात और दैनिक गतिविधियों में जरूर बाधा आ रही है।
कुल मिलाकर, देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय मौसम के दो बिल्कुल अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। जहां एक तरफ सूखा और साफ आसमान है, वहीं दूसरी तरफ जलप्रलय और बारिश का दौर जारी है। आने वाले हफ्तों में यह संतुलन किस तरह बदलेगा, इस पर मौसम वैज्ञानिकों की पैनी नजर बनी हुई है।








