देशभर में अब मानसून का असर धीरे-धीरे कम होने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने संकेत दिए हैं कि राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों से आज से मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके बाद यह धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों से भी विदा लेगा। हालांकि, मानसून की विदाई के इस दौर में भी कई राज्यों में मौसम का अलग-अलग मिजाज देखने को मिल रहा है। कहीं बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बरकरार है, तो कहीं सूखे के बाद हुई बारिश ने आफत ला दी है। इस बीच, उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हजारों लोग अभी भी बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बिजली गिरने की घटनाओं में 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। उत्तराखंड में भी पहाड़ों पर चुनौतियां बनी हुई हैं, जहां भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हैं।
मानसून की वापसी का सफर: किन राज्यों से कब विदा?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी आज से राजस्थान के पश्चिमी इलाकों से शुरू हो सकती है। यह वापसी चरणबद्ध तरीके से होगी, जिसका मतलब है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से मानसून धीरे-धीरे पीछे हटेगा। शुरुआती चरण में राजस्थान के बाद यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों से विदा लेगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बचे हुए इलाकों से भी मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ेंगी और अंततः पूरे देश से मानसून अपनी विदाई लेगा। आमतौर पर सितंबर के अंत तक या अक्टूबर के शुरुआती दिनों तक मानसून देश के अधिकांश हिस्सों से वापस चला जाता है। इस साल भी यही पैटर्न देखने को मिल रहा है, हालांकि कुछ जगहों पर सामान्य से अधिक या कम बारिश ने अलग परिस्थितियां पैदा की हैं।
मानसून भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इसकी वापसी का सीधा असर फसलों की बुवाई और कटाई के अगले चक्र पर पड़ता है। अगर मानसून सामान्य समय पर विदा लेता है, तो किसानों को रबी की फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। लेकिन देर से विदाई या अचानक तेज बारिश से तैयार फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। इस साल मानसून का प्रदर्शन मिश्रित रहा है, जहां कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, वहीं कुछ इलाके सामान्य से कम वर्षा दर्ज कर चुके हैं, जिससे जल संकट की आशंका भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
"मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जहां कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ आती है, वहीं दूसरे हिस्से सूखे का सामना करते हैं। इससे किसानों और आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ता है और खाद्य सुरक्षा पर भी चिंताएं बढ़ जाती हैं।" — डॉ. रवि शर्मा, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी
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उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर: गोंडा में 10 हजार लोग फंसे, खेत डूबे
उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक होने के बावजूद, राज्य के कुछ हिस्सों में अभी भी बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर कम होने से कुछ इलाकों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर है। जिले के लगभग 15 गांवों में करीब 10 हजार लोग अभी भी बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हैं। कई घरों और आसपास के रिहायशी इलाकों में पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा है और वे राहत शिविरों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। मवेशियों के लिए चारे और पीने के पानी की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
बाढ़ के कारण कृषि भूमि को भी भारी नुकसान पहुंचा है। गोंडा में अकेले 20 बीघा खेती की जमीन नदी में समा गई है, जिससे किसानों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। धान और अन्य खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर क्षति हुई है, जिससे आने वाले समय में किसानों के लिए आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन बड़े पैमाने पर प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मदद पहुंचाना एक चुनौती बनी हुई है। हालांकि, राज्य में 22 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति में सुधार की उम्मीद है। लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज समेत कई शहरों में शनिवार सुबह बादल छाए रहे, लेकिन बाद में धूप निकल आई। वहीं, वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटने से घाटों की सीढ़ियां फिर से दिखाई देने लगी हैं, जो एक राहत भरी खबर है।
महाराष्ट्र में कुदरत का कहर: बिजली गिरने से पांच की मौत
एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों से मानसून विदा ले रहा है, वहीं महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) में शुक्रवार को एक दुखद घटना सामने आई। लंबे सूखे के बाद हुई बारिश के दौरान बिजली गिरने की दो अलग-अलग घटनाओं में एक दंपती सहित कुल 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इन हादसों में चार अन्य लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने एक बार फिर बिजली गिरने के खतरों और उससे बचाव के उपायों पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में, जहां खुले में काम करने वाले लोग ज्यादा होते हैं, बिजली गिरने की घटनाएं अक्सर जानलेवा साबित होती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायलों के इलाज की व्यवस्था की है। बिजली गिरने से बचाव के लिए लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेषकर जब आसमान में गरज और चमक दिखाई दे, तो सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लेना बेहद जरूरी है। महाराष्ट्र में यह बारिश सूखे के बाद आई थी, जिससे किसानों और आम जनता को राहत की उम्मीद थी, लेकिन बिजली गिरने की घटनाओं ने इस खुशी को गम में बदल दिया। ऐसी घटनाएं दर्शाती हैं कि मौसम में अप्रत्याशित बदलावों के बीच सतर्कता और सुरक्षा उपाय कितने महत्वपूर्ण हैं।
उत्तराखंड में पहाड़ों पर चुनौतियां, यात्रा पर असर
देवभूमि उत्तराखंड में मौसम का मिजाज अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। हालांकि, आज राज्य के किसी भी जिले के लिए कोई विशेष मौसम अलर्ट जारी नहीं किया गया है। मैदानी और पहाड़ी इलाकों में सुबह धूप खिली रही, लेकिन कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है। पिछले दिनों हुई बारिश और बर्फबारी ने पहाड़ों में कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राज्य में अभी भी कुल 52 सड़कें बंद हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और दूरदराज के गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। इन सड़कों को खोलने का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मलबे के कारण इसमें काफी समय लग रहा है।
केदारनाथ धाम की यात्रा भी मौसम से प्रभावित हुई है। चीरबासा में हुए भूस्खलन के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग की मरम्मत का काम चल रहा है। इसके चलते सोनप्रयाग से सुबह 5 बजे से 9 बजे तक यात्रा को अस्थायी रूप से रोका गया है, ताकि मरम्मत कार्य सुचारु रूप से हो सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, हेलिकॉप्टर सेवाएं नियमित रूप से जारी हैं, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल रही है। पहाड़ी इलाकों में मौसम में अचानक बदलाव आना आम बात है, और यही कारण है कि यात्रियों और स्थानीय निवासियों को हमेशा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने से न केवल पर्यटन पर असर पड़ता है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवनयापन और सामानों की आपूर्ति पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
अलग-अलग राज्यों में मौसम का हाल: कहीं बारिश, कहीं सूखे के आसार
- छत्तीसगढ़: राज्य में कमजोर पड़ा मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। रायपुर समेत कई जिलों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि कुछ इलाकों में यह 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। किसानों को ऐसी स्थिति में अपनी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है।
- मध्य प्रदेश: इस साल मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे का 89.3% है। मानसूनी सीजन में केवल 11 दिन बाकी हैं और आखिरी सप्ताह में कुछ जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। उम्मीद है कि इससे प्रदेश की कुल बारिश का कोटा पूरा हो सकता है। हालांकि, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है, जिससे इन क्षेत्रों में जल संकट की चिंता बनी हुई है।
- राजस्थान: जहां पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो रही है, वहीं पूर्वी राजस्थान के 22 जिलों में आज भी बारिश का यलो अलर्ट जारी है। भरतपुर, जयपुर, कोटा और उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में 8 इंच तक भारी बारिश दर्ज हुई, जबकि बीकानेर के कोलायत में 3 इंच पानी बरसा। दो दिन से जारी बारिश के कारण दिन के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम सुहावना हो गया है।
- हरियाणा: पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी मानसून की वापसी शुरू हो गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 20 सितंबर से राज्य में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। इस सीजन में प्रदेश में अब तक 317 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 22% कम है। राजस्थान से सटे हिसार समेत कुछ इलाकों में हल्की धुंध देखी गई, जबकि फरीदाबाद और नूंह में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। कम बारिश के कारण किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
- बिहार: बिहार में भी मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है, जिससे ज्यादातर जिलों में बारिश नहीं हो रही है। हालांकि, मौसम विज्ञान केंद्र ने आज 13 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। पिछले 24 घंटे में किशनगंज में सबसे ज्यादा 134 मिमी, मधुबनी में 46 मिमी, अररिया में 30 मिमी, रोहतास में 28 मिमी और पूर्णिया में 12 मिमी बारिश दर्ज हुई। राज्य के कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के बदलते मिजाज के अनुरूप फसलों की देखभाल करने की सलाह दी है।
देशभर में मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरह की मौसमी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश में बाढ़ से हजारों लोग बेहाल हैं और महाराष्ट्र में बिजली गिरने से जानें गई हैं, वहीं कुछ राज्यों में बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद है। इन बदलते मौसम पैटर्न के बीच, लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है ताकि जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।






