शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन के दौरान पसरा मातम
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में उस समय एक बड़ी त्रासदी घटित हुई, जब राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के बीच एक बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांधी जयंती के अवसर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए दूर-दूर से लोग और युवा कार्यकर्ता पहुंचे थे, लेकिन किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि यह आयोजन एक दुखद हादसे का गवाह बन जाएगा।
प्रशासन और पुलिस के भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में अचानक हुई इस घटना ने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। पुलिस अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान ठाणे के रहने वाले 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई के रूप में हुई है, जो सीजेपी के इस कार्यक्रम में बतौर समर्थक शामिल होने आए थे।
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अचानक सीने में उठा तेज दर्द, दोस्तों और पुलिस ने की मदद
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई तय समय पर शाम साढ़े चार बजे के आसपास शिवाजी पार्क के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। मैदान में पहुंचने के महज आधे घंटे के भीतर ही यानी करीब पांच बजे उन्हें अचानक सीने में तेज और असहनीय दर्द महसूस हुआ। उन्होंने अपने साथियों को इस बात की जानकारी दी, जिसके बाद वहां मौजूद उनके परिचितों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत तत्परता दिखाई।
बुजुर्ग की बिगड़ती हालत को देखते हुए बिना एक पल गंवाए उन्हें तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र या अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टरों और आपातकालीन चिकित्सा कर्मियों ने उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दिल का दौरा इतना भीषण था कि बुजुर्ग ने उपचार के दौरान ही दम तोड़ दिया। इस आकस्मिक निधन से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके साथियों और परिजनों में गहरा शोक छा गया।
क्या था कॉकरोच जनता पार्टी का यह विरोध प्रदर्शन?
यह पूरा घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप देश भर की मतदाता सूचियों में किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), कथित वोटों की चोरी और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी से जुड़ा हुआ था।
आयोजकों और समर्थकों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से इस्तीफा देना चाहिए। इस प्रदर्शन को लेकर युवाओं में काफी उत्साह देखा गया और वे हाथों में व्यंग्यात्मक तख्तियां तथा फिल्मों के संवाद लिखे बैनर लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शन स्थल पर जमकर नारेबाजी भी की जा रही थी और राजनीतिक माहौल काफी गर्म था, जिसमें भारी भीड़ भी इकट्ठा हुई थी।
पुलिस के कड़े पहरे और भारी भीड़ के बीच बिगड़ी तबीयत
मुंबई पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शिवाजी पार्क के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मैदान के चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और बैरिकेड्स लगाए गए थे ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में जुटी भीड़, नारेबाजी और प्रदर्शन के दौरान मची गहमागहमी के बीच बुजुर्ग की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
चिकित्सकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों में उमड़ने वाली भारी भीड़, तेज धूप, शोर-शराबे और मानसिक तनाव के कारण कई बार बुजुर्गों या कमजोर दिल वाले लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का जोखिम काफी अधिक हो जाता है। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और मृतक के परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है।
"गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई शाम करीब साढ़े चार बजे सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के आधे घंटे बाद उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।" — शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकारी
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
एक तरफ जहां कॉकरोच जनता पार्टी अपने राजनीतिक मुद्दों को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए थी, वहीं दूसरी तरफ इस दुखद हादसे ने इस पूरे आंदोलन की दिशा और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित किए जाने वाले ऐसे विशाल प्रदर्शनों में बुजुर्ग नागरिकों और स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील लोगों की सुरक्षा को लेकर अब नए सिरे से मंथन किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।




