नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ और उम्मीदें
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय इवेंट्स में से एक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई (NSE) का आईपीओ आखिरकार बाजार में आ चुका है। शुरुआत में इस आईपीओ को लेकर बाजार में गजब का उत्साह देखा जा रहा था। वित्तीय विश्लेषकों और बाजार के जानकारों का अनुमान था कि इसका इश्यू साइज लगभग 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता तो यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर बन जाता। हालांकि, अंततः इसका साइज 22,562 करोड़ रुपये पर सिमट गया, जिसके चलते यह हुंडई मोटर इंडिया और एलआईसी के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ बनकर रह गया।
इस मेगा आईपीओ को लेकर लंबे समय से अटकलें थीं कि आखिर किस वजह से एक्सचेंज ने शेयर बाजार में उतरने में इतना वक्त लिया और जब यह आया, तो इसके अनुमानित आकार में कटौती क्यों करनी पड़ी। निवेशकों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ था कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी नियामक अड़चन थी या बाजार का मिजाज इसके अनुकूल नहीं था। इन तमाम सवालों के जवाब खुद एनएसई के शीर्ष नेतृत्व ने दिए हैं, जिससे पूरी तस्वीर साफ हो गई है।
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एमडी और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने बताई असल वजह
एनएसई के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आशीष कुमार चौहान ने एक मीडिया इंटरव्यू में इस बात से पर्दा उठाया कि आखिर क्यों इस आईपीओ का आकार उस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया जिसकी शुरुआती उम्मीद जताई जा रही थी। उनके मुताबिक, आईपीओ का साइज कम होने की सबसे बड़ी वजह कीमत यानी प्राइस में किया गया बदलाव था। मर्चेंट बैंकर्स की सलाह और बाजार की मौजूदा स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने आईपीओ की कीमत में कुछ आंशिक संशोधन किए।
कीमतों में बदलाव का सीधा असर यह हुआ कि कई मौजूदा शेयरहोल्डर्स ने अपनी ऑफरिंग को घटा दिया। चौहान ने स्पष्ट किया कि शुरुआती योजना आईपीओ के जरिए कंपनी में 6.2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की थी, लेकिन कीमत कम किए जाने के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 5.11 प्रतिशत रह गई। कई पुराने निवेशक और शेयरधारक कम कीमत पर अपने शेयर बेचने के बिल्कुल इच्छुक नहीं थे, जिसके कारण कुल इश्यू साइज में गिरावट दर्ज की गई।
"एनएसई को अपने शेयरहोल्डर्स एक बेहद महत्वपूर्ण संस्थान के तौर पर देखते हैं, यही वजह है कि कई पुराने निवेशकों ने अपने शेयर बेचने में हिचकिचाहट दिखाई। हालांकि, अंत में कई शेयरहोल्डर्स ने सहमति जताई ताकि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।" — आशीष कुमार चौहान, एमडी और सीईओ, एनएसई
पुराने निवेशकों की हिचकिचाहट और पूंजी की स्थिति
एनएसई के साथ एक खास बात यह जुड़ी है कि इसके कई शेयरहोल्डर्स ऐसे हैं जिन्होंने वर्षों या दशकों से इस संस्थान में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी है। वे इसे सिर्फ एक बिजनेस एंटिटी नहीं बल्कि भारत के फाइनेंशियल मार्केट का एक मजबूत स्तंभ मानते हैं। यही कारण है कि वे अपने कीमती शेयरों को आसानी से छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। इसके अलावा, एनएसई को अपने दैनिक कामकाज या विस्तार के लिए आईपीओ से मिलने वाली नई पूंजी की कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी।
कंपनी की वित्तीय सेहत पर रोशनी डालते हुए शीर्ष प्रबंधन ने बताया कि एनएसई पहले से ही बेहद मजबूत और अत्यधिक मुनाफे (Profitable) वाली कंपनी है। यह संस्थान अपने निवेशकों को भारी मात्रा में डिविडेंड बांटने के लिए जाना जाता है। उदाहरण के लिए, कंपनी इस साल भी लगभग 8,000 करोड़ रुपये का बंपर डिविडेंड अपने शेयरधारकों को बांट रही है, जबकि ठीक पिछले साल भी इतनी ही यानी करीब 8,000 करोड़ रुपये की राशि डिविडेंड के रूप में दी गई थी। जब कोई कंपनी खुद इतनी वित्तीय रूप से संपन्न हो, तो उसे पूंजी जुटाने के लिए पब्लिक इश्यू लाने की वैसी मजबूरी नहीं होती जैसी अन्य घाटे में चल रही या विस्तार चाहने वाली कंपनियों को होती है।
निवेशकों से मिला बंपर रिस्पॉन्स और शानदार सब्सक्रिप्शन
भले ही आईपीओ का कुल आकार उम्मीद से थोड़ा कम रहा हो, लेकिन निवेशकों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। ओपनिंग से लेकर क्लोजिंग तक इस आईपीओ को लेकर बाजार में जबरदस्त दीवानगी छाई रही। अंतिम दिन जब आंकड़े सामने आए तो यह कुल मिलाकर 5.71 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। निवेशकों ने 22,562 करोड़ रुपये के इस इश्यू के मुकाबले 90,200 करोड़ रुपये से भी अधिक की भारी-भरकम बोलियां लगाईं।
आंकड़ों के मुताबिक, इस आईपीओ के तहत कुल लगभग 38.5 लाख से ज्यादा आवेदन (Applications) प्राप्त हुए। एक्सचेंज के डेटा से यह भी पता चला कि ऑफर पर रखे गए 8,86,42,911 इक्विटी शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने कुल 50,58,11,384 इक्विटी शेयरों के लिए अपनी डिमांड दर्ज कराई। इसमें संस्थागत निवेशकों यानी क्यूआईबी (QIB) कैटेगरी को सबसे शानदार प्रतिक्रिया मिली और यह 12.68 गुना तक सब्सक्राइब हुई। इसके अलावा, एनआईआई (NII) कैटेगरी में 6.55 गुना, रिटेल कैटेगरी में 1.39 गुना और कंपनी के कर्मचारियों (Employee Category) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.40 गुना सब्सक्राइब हुआ।
ग्रे मार्केट और शेयरों की लिस्टिंग को लेकर उम्मीदें
बाजार के जानकारों और निवेशकों की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि एनएसई के शेयर कब और किस भाव पर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, एनएसई के शेयरों की आधिकारिक ट्रेडिंग जल्द ही शुरू होने की पूरी उम्मीद है। इस आईपीओ के लिए कंपनी ने प्राइस बैंड 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर के बीच तय किया था, जो निवेशकों की पहुंच और कंपनी के कद को देखते हुए संतुलित माना गया।
ग्रे मार्केट (GMP) की बात करें तो वहां भी इस शेयर को लेकर सुगबुगाहट तेज बनी हुई है। ग्रे मार्केट के रुझान के अनुसार, एनएसई के शेयरों पर लगभग 2.41 प्रतिशत तक के संभावित प्रीमियम का संकेत मिल रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का हमेशा यह मानना रहा है कि ग्रे मार्केट के आंकड़े केवल एक अनुमान होते हैं और असली तस्वीर शेयर बाजार में लिस्टिंग के दिन ही साफ होती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह के शॉर्ट-कट या अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपने वित्तीय सलाहकारों से विचार-विमर्श करके ही लॉन्ग-टरम निवेश का निर्णय लें।







