पलक्कड़ (केरल) — जमीन पर राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ रहा है और उपचुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर बगावत के सुर खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस के असंतुष्ट नेता पी. सरिन ने पार्टी आलाकमान को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि पार्टी को अपनी उम्मीदवार सूची तुरंत बदलनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो पलक्कड़ में कांग्रेस को हरियाणा चुनाव जैसी करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और विरोधी दलों को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पी. सरिन टिकट वितरण से बेहद नाराज चल रहे थे। उनका मानना है कि पार्टी के भीतर जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है और कुछ खास लोगों को ही आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के भीतर चल रही यह कलह अब मीडिया की सुर्खियों में है और हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या पार्टी इस संकट को समय रहते संभाल पाएगी या नहीं।
पलक्कड़ में टिकट बंटवारे पर क्यों भड़के पी. सरिन?
टिकट बंटवारे को लेकर उपजा यह विवाद अब व्यक्तिगत टकराव का रूप लेता जा रहा है। पी. सरिन ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि पार्टी के फैसले गलत दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे हरियाणा में समय रहते गलतियों को न सुधारने का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा था। उनका कहना है कि पलक्कड़ की जनता बदलाव चाहती है और यदि पार्टी सही उम्मीदवार नहीं उतारती है, तो इसका सीधा नुकसान चुनावी नतीजों में देखने को मिलेगा।
इस बगावती तेवर के बाद पार्टी के स्थानीय नेताओं की सांसें अटक गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। हालांकि, अभी तक पार्टी की तरफ से कोई बड़ा अनुशासनात्मक एक्शन नहीं लिया गया है, लेकिन अंदरखाने बैठकों का दौर जारी है। पार्टी नहीं चाहती कि चुनाव के ठीक मुहाने पर इस तरह की बगावत से मतदाताओं के बीच कोई गलत संदेश जाए। इसके बावजूद असंतोष की यह चिंगारी अब आग का रूप लेती नजर आ रही है।
एलडीएफ उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे पी. सरिन
राजनीतिक घटनाक्रम ने पल पल नया मोड़ लिया और कांग्रेस से निकाले जाने के बाद पी. सरिन को वाम लोकतांत्रिक मोर्चे यानी एलडीएफ ने पलक्कड़ उपचुनाव में अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले ने मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय और बेहद रोमांचक बना दिया है। जो नेता कुछ दिन पहले तक कांग्रेस के भीतर सुधार की मांग कर रहा था, अब वह सीधे वामदल के टिकट पर चुनावी दंगल में कूद चुका है। इससे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरिन के इस कदम से चुनाव समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। पलक्कड़ में कांग्रेस और वामदल दोनों के लिए यह सीट नाक का सवाल बन चुकी है। दूसरी तरफ, क्या यह बगावत बीजेपी के वोटों में भी सेंध लगाएगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है कि पी. सरिन के इस कदम ने केरल की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है और हर किसी की नजरें अब मतदान के दिन पर टिकी हैं।
चुनावी समीकरण और जनता के बीच बढ़ती चर्चाएं
पलक्कड़ की गलियों और चाय की दुकानों पर इन दिनों सिर्फ इसी सियासी ड्रामे की चर्चा हो रही है। आम मतदाता भी हैरान है कि कैसे एक ही झटके में वफादार नेता पाला बदलकर विरोधी खेमे में चला गया। लोग यह भी कयास लगा रहे हैं कि क्या सरिन का यह दांव उनके राजनीतिक भविष्य को चमकाएगा या फिर इससे चुनावी रण में केवल उलझन बढ़ेगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे केरल की राजनीति का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं।
प्रशासन और चुनाव आयोग भी इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। प्रचार का शोरगुल अब अपने चरम पर पहुंच रहा है और हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। पी. सरिन के एलडीएफ उम्मीदवार बनने के बाद से पलक्कड़ का चुनावी रण और अधिक दिलचस्प हो गया है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है और पल-पल की जमीनी सच्चाई आप तक पहुंचाती रहेगी।












