नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक बड़ी खबर तेजी से तैर रही है। चर्चा है कि केंद्र सरकार इस महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस संभावित सत्र के पीछे बड़ा मकसद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना और परिसीमन से जुड़ा नया बिल लाना बताया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक दलों के बीच इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि सरकार इस सत्र के जरिए देश के चुनावी नक्शे में बड़ा बदलाव कर सकती है। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तैयारी पूरी की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार के पास इस तरह के बड़े बिल पास कराने के लिए जरूरी बहुमत है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संविधान संशोधन और परिसीमन जैसे गंभीर मामलों के लिए संसद में मजबूत समर्थन की जरूरत होती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि सरकार ने अब जरूरी समर्थन जुटा लिया है। वहीं विपक्षी दल इस पूरी कवायद पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि जल्दबाजी में उठाए जाने वाले ऐसे कदमों से राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को लेकर नए विवाद पैदा हो सकते हैं।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार की अगली रणनीति
नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून पास होने के बाद से ही देश में परिसीमन की चर्चा शुरू हो गई थी। जानकारों का कहना है कि अगर लोकसभा सीटों के परिसीमन में देरी होती है, तो इसे साल 2029 के आम चुनावों तक लागू करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। यही वजह है कि सरकार इस प्रक्रिया को तय समय से पहले पूरा करना चाहती है। दक्षिण भारत के कई राज्य पहले ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने पर अपनी चिंता जता चुके हैं। उनका तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर अच्छा काम किया है, उन्हें सीटों के घटने के रूप में सजा नहीं मिलनी चाहिए।
इन तमाम राजनीतिक और क्षेत्रीय चिंताओं के बीच सरकार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। संसद का विशेष सत्र बुलाने की अटकलों के साथ ही तमाम मंत्रालयों में गुप्त बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर उन तमाम आंकड़ों को खंगाला जा रहा है जो नई लोकसभा सीटों के निर्धारण के समय काम आएंगे। महिला आरक्षण को सही तरीके से जमीन पर उतारने के लिए भी परिसीमन का होना बेहद जरूरी माना जा रहा है। ऐसे में यह विशेष सत्र देश के भविष्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख सकता है।
बहुमत के जादुई आंकड़े पर सियासी दलों की खींचतान
संसद में किसी भी बड़े और ऐतिहासिक बदलाव वाले बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। शुरुआती दौर में यह चर्चा थी कि सत्ताधारी गठबंधन के पास लोकसभा और राज्यसभा में यह जादुई आंकड़ा पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। लेकिन हालिया राजनीतिक जोड़तोड़ और क्षेत्रीय दलों के रुख को देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संख्या बल का जुगाड़ लगभग पूरा हो चुका है। यही कारण है कि अचानक से संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की खबरों ने जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं ताकि सत्र शुरू होने से पहले ही अपनी स्थिति साफ कर सकें।
आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है कि क्या उनके इलाके में भी लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़ने वाली है। दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों तक इस संभावित सत्र के असर पर लंबी चर्चाएं हो रही हैं। देश का हर राजनीतिक दल इस बात का आकलन कर रहा है कि परिसीमन का उनके वोट बैंक पर क्या असर पड़ेगा। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि सरकार इन अटकलों पर कब आधिकारिक मुहर लगाती है और सत्र की तारीखों का ऐलान कब होता है।
संसद के इस सत्र से देश की राजनीति में क्या बदलेगा
अगर इस महीने वाकई संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो यह मौजूदा कार्यकाल के सबसे अहम सत्रों में गिना जाएगा। देश का चुनावी ढांचा आने वाले दशकों में कैसा होगा, इसकी रूपरेखा इसी सत्र में तय होने की उम्मीद है। महिला मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि आरक्षण को जमीन पर उतारने के लिए सरकार कौन सा नया दांव चलती है। विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने के लिए अपने तर्क तैयार कर रही हैं ताकि क्षेत्रीय असंतुलन के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया जा सके।
द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही सरकार या संसद सचिवालय की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने आएगी, हम सबसे पहले सटीक जानकारी आप तक पहुंचाएंगे। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में बैठकों का दौर जारी है और हर कोई बस यही कयास लगा रहा है कि पर्दे के पीछे क्या पक रहा है। आने वाला हफ्ता देश की राजनीति के लिहाज से बहुत उथल-पुथल भरा हो सकता है, क्योंकि एक बड़ा फैसला देश के राजनीतिक नक्शे को हमेशा के लिए बदल सकता है।












