मानसून के बाद राजधानी में डेंगू का बढ़ता प्रकोप
बारिश का मौसम खत्म होने के बाद अब बीमारियों ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर राजधानी में डेंगू का संक्रमण तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के महीने में मरीजों की संख्या में अचानक से भारी उछाल देखने को मिला है। अगस्त के मुकाबले सितंबर में नए मामलों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे प्रशासनिक और चिकित्सा तंत्र सतर्क हो गया है।
सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, महीने के आखिरी दिनों में भी लगातार नए मामले सामने आते रहे हैं। इस साल की शुरुआत यानी जनवरी से लेकर सितंबर तक कुल मिलाकर 300 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा अकेले सितंबर महीने का है, जिसने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों में जिस रफ्तार से अस्पतालों की ओपीडी में मरीज पहुंच रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में स्थिति पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के बाद जगह-जगह इकट्ठा हुआ साफ पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। यही वजह है कि मानसून की विदाई के बाद अमूमन डेंगू के मामलों में तेजी देखी जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां घर के आसपास जरा सी लापरवाही लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
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अगस्त के मुकाबले सितंबर में मामलों में भारी उछाल
अगर पिछले महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इस साल की शुरुआत यानी जनवरी से जून तक के छह महीनों में डेंगू के बहुत कम यानी महज 44 मामले सामने आए थे। इसके बाद जुलाई के महीने में 26 नए मरीज जुड़े। लेकिन असली खतरा अगस्त के महीने से शुरू हुआ, जब मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 97 पर पहुंच गया।
इसके बाद सितंबर के महीने ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और इस दौरान 170 नए मरीजों की पुष्टि हुई। आंकड़ों की तुलना करें तो अगस्त की तुलना में सितंबर में डेंगू के मरीजों की संख्या में भारी प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले साल यानी 2025 की इसी अवधि की तुलना में इस साल कुल मामलों का आंकड़ा काफी कम है। पिछले साल सितंबर तक जहां 800 से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके थे, वहीं इस बार यह संख्या आधी से भी कम है।
इसके बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कम मामलों का मतलब यह नहीं है कि लापरवाही बरती जाए। डेंगू का वायरस काफी खतरनाक होता है और यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह महामारी का रूप भी ले सकता है। इसलिए प्रशासन अपने स्तर पर फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव जैसे कदम उठा रहा है।
शहर के इन प्रमुख इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
राजधानी के विभिन्न इलाकों से सामने आ रहे आंकड़ों से पता चलता है कि यह संक्रमण चुनिंदा जगहों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले चुका है। कंकड़बाग, हनुमान नगर, भागवत नगर, पोस्टल पार्क, योगीपुर और जक्कनपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लगातार मरीज मिल रहे हैं।
इसके अलावा भूतनाथ रोड, बाजार समिति, मुसल्लहपुर घाट, सुलतानगंज, संदलपुर, कदमकुआं, महेंद्रू और भिखनापहाड़ी जैसे क्षेत्रों से भी लगातार डराने वाली खबरें आ रही हैं। पश्चिमी और उत्तरी इलाकों की बात करें तो पाटलिपुत्र, बोरिंग रोड, राजाबाजार, इंद्रपुरी, आशियाना और दीघा में भी कई लोग संक्रमित पाए गए हैं। एजी कॉलोनी, एसकेपुरी, तारामंडल, सिपारा, मीठापुर और अनीसाबाद जैसे पॉश और व्यस्त इलाकों में भी डेंगू के मच्छरों ने अपने पैर पसार लिए हैं।
नगर निकाय और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें इन चिन्हित इलाकों में विशेष सफाई अभियान चला रही हैं। प्रभावित घरों के आसपास एंटी-लार्वा केमिकल का छिड़काव किया जा रहा है ताकि मच्छरों की अगली पीढ़ी को पनपने से रोका जा सके। स्थानीय लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे अपने वार्डों में जलजमाव की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
डॉक्टरों की चेतावनी: खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी
अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू के लक्षणों को लोग अक्सर सामान्य वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में जानलेवा साबित हो सकता है। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज खिंचाव या लगातार उल्टी आने जैसी समस्याओं को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए।
"बुखार के साथ अगर पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, शरीर पर चकत्ते या मसूड़ों से हल्का खून आने जैसे चेतावनी संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डेंगू के अलग-अलग सीरोटाइप होने के कारण दोबारा संक्रमण होने पर खतरा और भी बढ़ जाता है।" — डॉ. राजीव कुमार सिंह, अधीक्षक, पीएमसीएच
आईजीआईएमएस के मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने भी मरीजों को आगाह किया है कि वे मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की पर्ची के कोई भी पेनकिलर यानी दर्द निवारक दवा न खरीदें। कुछ खास तरह की दवाएं शरीर में खून का बहाव बिगाड़ सकती हैं और ब्लीडिंग का खतरा कई गुना बढ़ा सकती हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में खून की जांच (एलिसा टेस्ट) जरूर करवाएं।
बचाव के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान
डेंगू से बचने का सबसे असरदार तरीका मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर घर में लोगों को सतर्क रहना चाहिए। सप्ताह में कम से कम एक बार अपने कूलर, गमलों, फ्रिज की ट्रे और घर के आसपास रखे टूटे-फूटेर्तनों की अच्छी तरह से जांच करें और उनमें जमा पानी को पूरी तरह खाली कर दें।
घरों में पानी की टंकियों को हमेशा ढंक कर रखें ताकि मच्छर अंडे न दे सकें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और दिन के वक्त भी पूरी बांह के कपड़े पहनकर रहें। बच्चों को खुले में खेलने भेजते वक्त उनके शरीर पर मॉस्quito रेपेलेंट क्रीम या लोशन का उपयोग जरूर करें। यदि आपके आस-पास किसी को भी तेज बुखार की शिकायत है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं और प्लेटलेट्स काउंट की नियमित निगरानी रखें। सतर्कता और साफ-सफाई ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा कवच है।





