अभिनंदन के हकदार प्रेम चोपड़ा का सिनेमाई सफर
हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे खूंखार और यादगार खलनायकों की बात होती है, तो प्रेम चोपड़ा का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। अपनी संवाद अदायगी और खास अंदाज से उन्होंने फिल्मों में विलेन की परिभाषा ही बदल दी थी। आज के दौर में जब दर्शक मुख्य कलाकारों के साथ-साथ मजबूत नकारात्मक किरदारों की तलाश करते हैं, तो प्रेम चोपड़ा का काम एक मिसाल की तरह सामने आता है। उन्होंने अपने लंबे करियर में 380 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और हर बार पर्दे पर एक अलग खौफ या नया अंदाज पैदा किया।
लेकिन यह मुकाम हासिल करना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। एक छोटे शहर से निकलकर मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में अपनी जगह बनाना, बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपने दम पर पहचान बनाना और दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करना, यह सब उनके अटूट संघर्ष और कभी हार ना मानने वाले जज्बे की कहानी कहता है। आज हम उनके जीवन के उन पन्नों को पलट रहे हैं, जो शायद बहुत कम लोग जानते हैं।
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अखबार की नौकरी और मायानगरी आने का फैसला
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि फिल्मों में कदम रखने से पहले प्रेम चोपड़ा एक साधारण नौकरी किया करते थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' अखबार के सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में नौकरी ज्वॉइन की थी। उनका काम अखबारों के डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य व्यवस्थाओं को संभालना था। उस दौर में एक सुरक्षित नौकरी मिलना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी, खासकर तब जब परिवार में स्थिरता को सबसे ऊपर रखा जाता था।
लेकिन प्रेम चोपड़ा के भीतर अभिनय का एक ऐसा कीड़ा था जो उन्हें चैन से बैठने नहीं देता था। वे दिनभर अखबार दफ्तर में मेहनत करते और शाम को थिएटर या नाटकों की रिहर्सल में जुट जाते थे। आखिरकार उन्होंने वह फैसला लिया जो उनके जीवन का सबसे बड़ा यू-टर्न साबित हुआ। उन्होंने अपनी नौकरी को अलविदा कहा और पूरी तरह से अभिनय की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुंबई का रुख किया। उनके इस फैसले ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया था, लेकिन उनका आत्मविश्वास अडिग था।
लोकल ट्रेन में मिला था जिंदगी का पहला बड़ा ऑफर
संघर्ष के उन शुरुआती दिनों में हर नया कलाकार किसी चमत्कार का इंतजार करता है। प्रेम चोपड़ा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वे अक्सर मुंबई की लोकल ट्रेनों से सफर किया करते थे। एक दिन जब वे ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, तो उनकी पर्सनालिटी और आत्मविश्वास को देखकर एक फिल्ममेकर की नजर उन पर पड़ी। वह शख्स फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ था और किसी नए चेहरे की तलाश में था।
उस व्यक्ति ने प्रेम चोपड़ा के पास आकर बातचीत शुरू की और उन्हें अपनी फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट देने का ऑफर दिया। यह उनके लिए किसी सपने जैसा था। हालांकि वह पहली फिल्म तुरंत ब्लॉकबस्टर नहीं बन पाई, लेकिन उस ट्रेन के सफर ने उन्हें वह रास्ता दिखा दिया जिसके लिए वे मायानगरी आए थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे एक के बाद एक फिल्मों में छोटे-बड़े रोल हासिल करने शुरू कर दिए।
जब प्रेम चोपड़ा का नाम बना डर और सम्मान का पर्याय
प्रेम चोपड़ा को शुरुआत में मुख्य अभिनेता के रूप में भी कुछ फिल्में मिलीं, लेकिन जो सफलता उन्हें खलनायक बनकर मिली, वह बेजोड़ थी। उनकी फिल्म 'बॉबी' का वह मशहूर डायलॉग—"प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा"—आज भी बच्चे-बच्चे की जुबान पर है। इस एक डायलॉग ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार विलेन बना दिया था। इसके बाद उन्होंने मनोज कुमार, राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों की फिल्मों में ऐसी भूमिकाएं निभाईं जो हमेशा के लिए अमर हो गईं।
उनकी ख्याति का आलम यह था कि उस दौर में माता-पिता अपने बच्चों का नाम 'प्रेम' रखने से डरने लगे थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि कहीं उनका बेटा भी फिल्मों के प्रेम चोपड़ा जैसा ना बन जाए। इस बारे में खुद प्रेम चोपड़ा कई बार हंसते हुए किस्से सुना चुके हैं कि कैसे लोग असल जिंदगी में भी उनसे थोड़ा दूर रहने लगे थे, जबकि असलियत इसके बिल्कुल उलट थी।
"पर्दे पर भले ही मैंने बुरे इंसानों का किरदार निभाया, लेकिन असल जिंदगी में हमेशा एक ईमानदार और साधारण इंसान बनकर जीने की कोशिश की। दर्शकों का प्यार ही मेरी असली पूंजी है।"— प्रेम चोपड़ा, दिग्गज अभिनेता
खलनायक जो असल जिंदगी में है सबसे सौम्य इंसान
फिल्मी पर्दे पर महिलाओं पर अत्याचार करने वाले और समाज विरोधी ताकत का चेहरा बनने वाले प्रेम चोपड़ा वास्तविक जीवन में इसके बिल्कुल विपरीत हैं। उनके साथी कलाकार हमेशा इस बात की गवाही देते हैं कि वे सेट पर सबसे विनम्र, अनुशासित और समय के पाबंद इंसान हुआ करते थे। उन्होंने कभी भी अपने स्टारडम को अपने सिर पर हावी नहीं होने दिया।
वे अपने सह-कलाकारों का पूरा सम्मान करते थे और निर्देशक की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए घंटों मेहनत करते थे। उनका यह पेशेवर रवैया ही था कि वे कई पीढ़ियों के अभिनेताओं के साथ स्क्रीन साझा करते नजर आए। राज कपूर से लेकर आज के दौर के सितारों तक, हर कोई प्रेम चोपड़ा की सादगी और उनके काम के प्रति समर्पण का कायल रहा है।
भारतीय सिनेमा में उनका अमिट योगदान और विरासत
आज जब प्रेम चोपड़ा अपने जीवन के 91वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तो उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पाठशाला की तरह है। उन्होंने सिखाया कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए लगातार मेहनत, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति वफादार रहना जरूरी होता है। भले ही आज वे सक्रिय रूप से फिल्मों में कम नजर आते हैं, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनका योगदान हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा रहेगा।
उनके जीवन की यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा है, तो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, आप अपनी मंजिल तलाश ही लेते हैं। प्रेम चोपड़ा का नाम आज भी बॉलीवुड के उन चुनिंदा चेहरों में चमकता है, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर एक साधारण कर्मचारी से लेकर भारतीय सिनेमा के लेजेंड तक का सफर तय किया।






