कंगना रनौत की कार्यशैली पर उठे सवाल
हिंदी सिनेमा की दुनिया में अपनी बेबाक बयानी और शानदार अभिनय के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनका कोई नया फिल्मी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के भीतर से ही उनके खिलाफ उठी एक तीखी आलोचना है। पूर्व फिल्म समीक्षक और अब धर्मा कोलाब आर्टिस्ट्स एजेंसी (DCAA) के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) राजीव मसंद ने कंगना की मौजूदा छवि और उनके काम करने के तौर-तरीकों पर खुलकर अपनी राय रखी है। राजीव का मानना है कि कंगना जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री का इस तरह से अपनी कला से दूर होना और विवादों में घिरे रहना सिनेमा प्रेमियों के लिए निराशाजनक है।
एक लोकप्रिय पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान राजीव मसंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें पर्दे पर अभिनय करने वाली पुरानी कंगना रनौत की बहुत याद आती है। उनके मुताबिक, आज की तारीख में कंगना का वास्तविक अभिनय पक्ष उनकी राजनीतिक और विवादित छवि के पीछे छिप गया है। राजीव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कंगना हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुकी हैं और संसद के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक अपने बयानों के कारण लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं।
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राजनीति में आने के बाद कैसे बदला सिनेमैटिक फोकस
राजीव मसंद ने अपने विश्लेषण में इस बात पर जोर दिया कि जब किसी कलाकार का प्राथमिक ध्यान कला से हटकर दूसरी दिशा में चला जाता है, तो उसकी मौलिक प्रतिभा प्रभावित होती है। कंगना रनौत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। राजनीति में सक्रिय होने के बाद से उनके जीवन का दायरा और प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब वह फिल्मों से ज्यादा अपने राजनीतिक बयानों और वैचारिक लड़ाइयों के कारण पहचानी जाती हैं। इस बदलाव ने उनके अंदर की उस कलाकार को पीछे धकेल दिया है, जो कभी अपनी फिल्मों के दम पर बॉक्स ऑफिस पर छा जाती थी।
फिल्म समीक्षक से इंडस्ट्री के अहम पद पर पहुंचे राजीव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि स्थिति अब यहाँ तक पहुँच चुकी है कि एक गंभीर अभिनेत्री के रूप में उनकी साख धूमिल होने लगी है और वह केवल विवादों के घेरे में सिमटकर रह गई हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार अपनी फिल्मों के बजाय अपने व्यक्तिगत शो या बयानों के कारण जाना जाने लगे, तो दर्शक उस अभिनेता से कटने लगते हैं। कंगना के मामले में भी यही दौर चल रहा है, जहाँ उनका हर कदम एक नई चर्चा या विवाद को जन्म देता है।
बॉलीवुड में भाई-भतीजेवाद के आरोपों पर दो टूक
कंगना रनौत लंबे समय से बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी भाई-भतीजावाद और बाहरी कलाकारों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाती रही हैं। उनका यह आरोप रहा है कि इंडस्ट्री के बड़े बैनर और दिग्गज उन्हें जानबूझकर प्रोजेक्ट्स से दूर रखते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के मौके नहीं दिए जाते। राजीव मसंद ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह एक ऐसी कहानी है जिसे दोहराना बहुत आसान है, लेकिन धरातल की सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
"मुझे नहीं पता। बार-बार दोहराने के लिए यह एक अच्छी कहानी है। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। सच तो यह है कि बॉलीवुड सफलता का सम्मान करता है। शुरुआत में बहुत से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन एक बार जब आप सफल हो जाते हैं, तब ऐसा बिलकुल भी नहीं रहता।" — राजीव मसंद, COO, DCAA
राजीव का तर्क है कि फिल्म जगत हमेशा उगते सूरज को सलाम करता है और प्रतिभा के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता की पूजा करता है। यदि कोई कलाकार बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल कर लेता है, तो कोई भी निर्माता या निर्देशक उसे काम देने से पीछे नहीं हटता। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में संघर्ष हर नए कलाकार के हिस्से आता है, लेकिन उसे हमेशा के लिए साजिश का नाम देना सही नहीं है।
'क्वीन' फिल्म के दिनों को किया याद
कंगना रनौत के अभिनय करियर की जब भी बात होती है, तो साल 2014 में आई विकास बहल निर्देशित फिल्म 'क्वीन' का जिक्र सबसे पहले आता है। राजीव मसंद भी इस फिल्म में कंगना के काम के कायल हैं। उन्होंने पॉडकास्ट में 'क्वीन' की जमकर तारीफ की और उसे एक मील का पत्थर बताया। राजीव ने कहा कि उस फिल्म में कंगना ने जिस सहजता के साथ अभिनय किया था, वह अद्भूत था। उस वक्त वह स्क्रीन पर एक किरदार के रूप में नजर आती थीं, न कि कंगना रनौत के रूप में।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वह विकास बहल और कंगना की जोड़ी को 'क्वीन 2' में एक बार फिर देखने के लिए बेहद उत्सुक हैं। राजीव का मानना है कि यदि कंगना अपने राजनीतिक जीवन को थोड़ा पीछे छोड़कर पूरी तरह से अभिनय पर ध्यान केंद्रित करें, तो वह अपनी खोई हुई साख और शोहरत को वापस पा सकती हैं। हिंदी सिनेमा में आलिया भट्ट और कंगना रनौत जैसी अभिनेत्रियों को बराबरी का दर्जा देते हुए उन्होंने माना कि प्रतिभा के मामले में कंगना के पास असीम क्षमताएं हैं, बशर्ते वह उनका सही दिशा में उपयोग करें।









