कच्चे तेल में उबाल और मिडिल ईस्ट का तनाव बना संकट की वजह
देशभर में ईंधन की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आग लगी हुई है, जिसका सीधा असर अब देश के पेट्रोल पंपों पर दिखने लगा है। स्थिति यह हो गई है कि निजी ईंधन कंपनियों को अपने खुदरा आउटलेट्स पर ईंधन की बिक्री सीमित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की वजह से क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है, जबकि कुछ खास ग्रेड्स जैसे मर्बन क्रूड की कीमतें तो 120 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर निकल चुकी हैं। इसके बावजूद घरेलू बाजार में लंबे समय से पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे तेल कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन पर गहरा असर पड़ा है।
इस बीच, देश की दो प्रमुख निजी फ्यूल रिटेलर्स—जियो-बीपी (Jio-bp) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy)—ने अपने चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की बिक्री के लिए कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। कंपनियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी वैध उपभोक्ताओं को ईंधन की निरंतर आपूर्ति मिलती रहे और कोई भी व्यक्ति या संस्था इसका भारी मात्रा में स्टॉक न कर सके।
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थोक और खुदरा कीमतों के भारी अंतर ने बढ़ाई मुश्किलें
आखिर अचानक से निजी कंपनियों को यह कदम क्यों उठाना पड़ा? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण खुदरा (Retail) और थोक (Bulk) डीजल की कीमतों में आया भारी अंतर है। वर्तमान बाजार हालातों में थोक उपभोक्ताओं के लिए ईंधन खरीदना काफी महंगा साबित हो रहा है, जबकि आम पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले डीजल की कीमतें काफी कम हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, खुदरा और थोक डीजल की दरों में लगभग 40 रुपये प्रति लीटर तक का भारी अंतर देखने को मिल रहा है। इस भारी-भरकम प्राइस गैप के कारण बड़े औद्योगिक उपभोक्ता, बस ऑपरेटर, फ्लीट मालिक और अन्य कमर्शियल खरीदार सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। वे सस्ते दामों पर डीजल खरीदने के लिए ड्रमों और टैंकों में भरकर भारी मात्रा में ईंधन खरीद रहे हैं।
इस अनियंत्रित मांग के कारण सामान्य खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल का स्टॉक तेजी से घटने लगा है। यदि इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण न पाया जाए, तो आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में गंभीर ईंधन संकट पैदा हो सकता है और आम वाहन चालकों को भी अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
पेट्रोल पंपों पर तय की गई ईंधन खरीदने की नई सीमाएं
परिस्थितियों की गंभीरता को भांपते हुए निजी ईंधन कंपनियों ने उपभोक्ताओं के लिए कड़े कोटा नियम लागू कर दिए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस की रोसनेफ्ट समर्थित कंपनी नायरा एनर्जी ने अपने फ्यूल स्टेशनों पर डीजल और पेट्रोल दोनों की खरीद पर सख्त कैपिंग कर दी है।
नायरा एनर्जी के आउटलेट्स पर अब एक सामान्य ग्राहक को एक बार में अधिकतम 30 लीटर तक ही पेट्रोल मिल सकेगा। वहीं, डीजल के मामले में भी सख्त पाबंदियां लगाते हुए एक वाहन या ग्राहक के लिए इसकी सीमा 70 लीटर से लेकर अधिकतम 200 लीटर तक तय कर दी गई है। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि उपभोक्ता की वास्तविक व्यावसायिक जरूरत क्या है।
दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी के संयुक्त उद्यम 'रिलायंस-बीपी मोबिलिटी' ने भी अपने कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को प्रतिबंधित या सीमित करना शुरू कर दिया है। इससे पहले अप्रैल के महीने में भी जब होर्मुज स्ट्रेट से तेल का प्रवाह बाधित हुआ था, तब इसी तरह के कदम उठाए गए थे। कंपनियों का साफ कहना है कि ये उपाय केवल बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए किए जा रहे हैं।
कंपनियों को हो रहा भारी वित्तीय नुकसान, जमाखोरी पर लगाम की कोशिश
लंबे समय से पेट्रोल पंपों पर कीमतें न बढ़ाए जाने के कारण निजी खुदरा विक्रेताओं को भारी आर्थिक घाटे का सामना करना पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी आईसी्रए (ICRA) के हालिया आकलन के अनुसार, खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल बेचने पर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल बेचने पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है।
"कच्चे तेल की बढ़ती लागत और स्थिर खुदरा मूल्यों के बीच संतुलन बिठाना मुश्किल हो गया है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन की आपूर्ति हर नागरिक तक समान रूप से पहुंचे और जमाखोर इसका गलत फायदा न उठा सकें।" — ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ विश्लेषक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस और अमेरिका जैसे बड़े देशों द्वारा ईंधन के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाने या इस पर विचार करने से हालात और अधिक जटिल हो गए हैं। ऐसे में यदि आपने भी अपनी गाड़ी में डीजल या पेट्रोल डलवाने का मन बनाया है, तो यह जरूरी है कि आप अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें, क्योंकि देश के कई हिस्सों में निजी पंपों पर मिलने वाली मात्रा अब सीमित कर दी गई है।








