विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/देश/शिवसेना के नाम और तीर-कमान निशान पर हमारा स्वाभाविक हक, सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट की दो टूक दलील
देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

शिवसेना के नाम और तीर-कमान निशान पर हमारा स्वाभाविक हक, सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट की दो टूक दलील

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट ने निर्वाचन आयोग के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। शिंदे खेमे का कहना है कि पार्टी के असली नाम और निशान पर उनका हक पूरी तरह स्वाभाविक है। अदालत में इस मामले पर लगातार तीखी बहस जारी है और सभी पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•8 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•50
🌐Read in English →
शेयर करें:
शिवसेना के नाम और तीर-कमान निशान पर हमारा स्वाभाविक हक, सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट की दो टूक दलील
📷 शिवसेना के नाम और तीर-कमान निशान पर हमारा स्वाभाविक हक, सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट की दो टूक दलील — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट ने निर्वाचन आयोग के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। शिंदे खेमे का कहना है कि पार्टी के असली नाम और निशान पर उनका हक पूरी तरह स्वाभाविक है। अदालत में इस मामले पर लगातार तीखी बहस जारी है और सभी पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल लाने वाले शिवसेना के असली वारिस कौन हैं, इस सवाल पर अब सुप्रीम कोर्ट में रोज नई और बड़ी दलीलें सामने आ रही हैं। सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले का खुलकर बचाव किया है जिसमें पार्टी का नाम शिवसेना और उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न तीर-कमान शिंदे गुट को सौंप दिया गया था। अदालत कक्ष में शिंदे गुट के वकीलों ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के नाम और निशान पर उनका दावा पूरी तरह कानूनी, तार्किक और स्वाभाविक है। इस लंबी और अहम कानूनी जंग पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर महाराष्ट्र के राजनीतिक भविष्य पर सीधा पड़ने वाला है।

बीते मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान शिंदे गुट की ओर से पेश हुए वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि निर्वाचन आयोग ने तमाम दस्तावेजों, बहुमत के आंकड़ों और पार्टी के संविधान की गहराई से जांच करने के बाद ही यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। शिंदे खेमे का तर्क है कि पार्टी के अधिकांश विधायक और सांसद उनके साथ हैं, इसलिए संगठन का असली ढांचा उन्हीं के पास है। वकीलों ने अदालत में यह भी दलील दी कि बहुमत के आधार पर लिया गया यह फैसला पूरी तरह निष्पक्ष है और इसमें कानून के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।

निर्वाचन आयोग के फैसले पर कानूनी बहस तेज

इस पूरे विवाद की जड़ में वह पुराना राजनीतिक संकट है जब शिवसेना में दो फाड़ हो गई थी और एकनाथ शिंदे ने पार्टी के भीतर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था। उस वक्त शिंदे के साथ शिवसेना के अधिकांश विधायकों ने समर्थन जताया था, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में नई सरकार का गठन किया था। इसके बाद दोनों ही गुटों ने असली शिवसेना होने का दावा ठोक दिया था और मामला चुनाव आयोग तक जा पहुंचा था। आयोग ने लंबी सुनवाई के बाद शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना था और उन्हें पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की आधिकारिक अनुमति दे दी थी, जिसे अब उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे गुट के वकीलों का यह कहना है कि निर्वाचन आयोग का यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया था और इसमें पूरी प्रक्रिया का सही पालन नहीं हुआ था। ठाकरे गुट का यह भी तर्क है कि पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न किसी चुनिंदा नेताओं का नहीं बल्कि उन लाखों कार्यकर्ताओं का है जिन्होंने सालों-साल मेहनत करके इस संगठन को सींचा है। अदालत में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि विधानसभा स्पीकर द्वारा विधायकों की अयोग्यता पर लिया गया फैसला भविष्य में गलत साबित होता है, तो क्या चुनाव आयोग द्वारा दिए गए इस चिह्न आवंटन पर फिर से विचार किया जाना चाहिए या नहीं। इस बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच जोरदार कानूनी बहस चल रही है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

स्पीकर के फैसले और चुनाव चिह्न के बीच का पेंच

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह बेंच इस मामले में कोई बहुत बड़ा और दूरगामी फैसला सुना सकती है। अदालत यह तय करेगी कि राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और बहुमत साबित करने के पैमाने क्या होने चाहिए। यदि स्पीकर के अयोग्यता मामलों में कोई बदलाव आता है, तो उसका सीधा असर इस केस की पूरी दिशा पर पड़ेगा। फिलहाल देश की सबसे बड़ी अदालत हर एक पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और दोनों पक्षों के वकीलों को अपनी दलीलें रखने के लिए पूरा समय दिया जा रहा है।

महाराष्ट्र के आम लोगों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच भी इस बात की भारी चर्चा है कि अदालत का अंतिम फैसला क्या होगा। एक तरफ जहां शिंदे गुट को पूरा भरोसा है कि उनका पलड़ा भारी रहेगा, वहीं ठाकरे खेमे को भी न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ रही है, राजनीतिक हलचलें और तेज होती जा रही हैं। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल में यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला भारतीय राजनीति और संविधान की कई नई परिभाषाएं तय करेगा, जिस पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी।

भविष्य की राजनीतिक चालें और अदालत का रुख

अदालत में चल रही इन बहसों के बीच महाराष्ट्र की सियासत शांत बैठने वाली नहीं है। दोनों ही गुट आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और अन्य राजनीतिक मोर्चों की तैयारियों में जुट गए हैं। पार्टी का नाम और निशान किसके पास पक्के तौर पर रहेगा, इसका अंतिम कानूनी ठप्पा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही लगेगा। तब तक राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी दांव-पेंच का यह दौर ऐसे ही जारी रहने की पूरी उम्मीद है।

प्रायोजित • SPONSORED
❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

संबंधित खबरें

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां

फिल्म की तरह पैसा भी अता-पता लापता है, चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

फिल्म की तरह पैसा भी अता-पता लापता है, चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की विदेशों में चर्चा, राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की विदेशों में चर्चा, राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला

रिहा होने के बाद बोले राहुल गांधी- मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार को कटघरे में लाएंगे

रिहा होने के बाद बोले राहुल गांधी- मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार को कटघरे में लाएंगे

दिल्ली से वडोदरा तक गूंजा नाम: लगातार 25 साल से सत्ता के केंद्र में नरेंद्र मोदी, आज क्या हैं खास कार्यक्रम

दिल्ली से वडोदरा तक गूंजा नाम: लगातार 25 साल से सत्ता के केंद्र में नरेंद्र मोदी, आज क्या हैं खास कार्यक्रम

विरोध के पीछे छिपे थे असली मंसूबे, CEC के इस्तीफे और सियासी तस्वीरों ने खोली पोल

विरोध के पीछे छिपे थे असली मंसूबे, CEC के इस्तीफे और सियासी तस्वीरों ने खोली पोल

ज्ञानेश जी नहीं गणेश जी कर रहे हैं बीजेपी की मदद, संबित पात्रा के 10 तीखे सवाल

ज्ञानेश जी नहीं गणेश जी कर रहे हैं बीजेपी की मदद, संबित पात्रा के 10 तीखे सवाल

आपके प्लेट में रखी फल-सब्जियां कितनी शुद्ध? सर्वे में सामने आई बाजार की डरावनी सच्चाई

आपके प्लेट में रखी फल-सब्जियां कितनी शुद्ध? सर्वे में सामने आई बाजार की डरावनी सच्चाई

✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘एकनाथ शिंदे’ व देश से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौतियांNATIONAL

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां

7 अक्टू॰42
फिल्म की तरह पैसा भी अता-पता लापता है, चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणीNATIONAL

फिल्म की तरह पैसा भी अता-पता लापता है, चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

7 अक्टू॰48
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की विदेशों में चर्चा, राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलाNATIONAL

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की विदेशों में चर्चा, राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला

8 अक्टू॰38
रिहा होने के बाद बोले राहुल गांधी- मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार को कटघरे में लाएंगेNATIONAL

रिहा होने के बाद बोले राहुल गांधी- मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार को कटघरे में लाएंगे

8 अक्टू॰26
दिल्ली से वडोदरा तक गूंजा नाम: लगातार 25 साल से सत्ता के केंद्र में नरेंद्र मोदी, आज क्या हैं खास कार्यक्रमNATIONAL

दिल्ली से वडोदरा तक गूंजा नाम: लगातार 25 साल से सत्ता के केंद्र में नरेंद्र मोदी, आज क्या हैं खास कार्यक्रम

7 अक्टू॰37
विरोध के पीछे छिपे थे असली मंसूबे, CEC के इस्तीफे और सियासी तस्वीरों ने खोली पोलNATIONAL

विरोध के पीछे छिपे थे असली मंसूबे, CEC के इस्तीफे और सियासी तस्वीरों ने खोली पोल

7 अक्टू॰31
ज्ञानेश जी नहीं गणेश जी कर रहे हैं बीजेपी की मदद, संबित पात्रा के 10 तीखे सवालNATIONAL

ज्ञानेश जी नहीं गणेश जी कर रहे हैं बीजेपी की मदद, संबित पात्रा के 10 तीखे सवाल

7 अक्टू॰27
आपके प्लेट में रखी फल-सब्जियां कितनी शुद्ध? सर्वे में सामने आई बाजार की डरावनी सच्चाईNATIONAL

आपके प्लेट में रखी फल-सब्जियां कितनी शुद्ध? सर्वे में सामने आई बाजार की डरावनी सच्चाई

8 अक्टू॰27
विज्ञापन • ADVERTISEMENT
शिवसेना के नाम और तीर-कमान निशान पर हमारा स्वाभाविक हक, सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट की दो टूक दलील | The Freelance | द फ्रीलांस