स्मार्टफोन डिस्प्ले की सुरक्षा को लेकर सरकार का बड़ा कदम
आज के दौर में स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक बेहद जरूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। फोन की कीमत चाहे जितनी भी हो, उसकी स्क्रीन को सुरक्षित रखना हर यूजर की पहली प्राथमिकता होती है। इसके लिए लोग तरह-तरह के स्क्रीन प्रोटेक्टर और टेम्पर्ड ग्लास का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बाजार में मिलने वाले ये स्क्रीन गार्ड्स कितने सुरक्षित और भरोसेमंद हैं? अब इस सवाल का जवाब और सुरक्षा मानक तय करने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की तरफ से हाल ही में एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और अधिसूचना जारी की गई है। इस नए नियम के तहत अब मोबाइल फोन के डिस्प्ले पर इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को उन उत्पादों की सूची में शामिल कर दिया गया है जिनके लिए भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS (Bureau of Indian Standards) का सर्टिफिकेशन्स अनिवार्य होगा। सरकार का यह कदम आम मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होने वाला है।
संबंधित खबरें
कब से लागू होगा नया नियम और क्या है डेडलाइन
आम जनता और व्यापारिक जगत के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यह नया नियम कब से प्रभावी होगा। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि स्मार्टफोन के डिस्प्ले के लिए बनाए गए स्क्रीन प्रोटेक्टर का यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। यानी कंपनियों और निर्माताओं के पास अपनी निर्माण प्रक्रियाओं और उत्पादों को नए मानकों के अनुरूप ढालने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।
अध अधिसूचना के अनुसार, सभी स्क्रीन प्रोटेक्टर निर्माताओं को निर्धारित भारतीय मानक IS 19348:2025 का कड़ाई से पालन करना होगा। अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत अब BIS की मंजूरी या हॉलमार्क के बिना इस प्रकार के स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारत के घरेलू बाजार में कानूनी रूप से बेचना या आयात करना संभव नहीं होगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तय तारीख के बाद बिना सर्टिफिकेशन वाले किसी भी उत्पाद को बाजार में टिकने नहीं दिया जाएगा।
किन मानकों पर कसेगा शिकंजा और कैसे होगी जांच
BIS की तरफ से स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए बिल्कुल नए और कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड तैयार किए जा रहे हैं, जिनका पालन देश के सभी निर्माताओं और सेलर्स को करना होगा। इसके तहत उत्पादों की मजबूती, थिकनेस, डाइमेंशन और अन्य तकनीकी पैमानों की कड़ी टेस्टिंग पूरी करनी होगी। बाजार में बिकने वाले टेम्पर्ड ग्लास और प्रोटेक्टर्स की गुणवत्ता अब भगवान भरोसे नहीं बल्कि तय मानकों के अधीन होगी।
इस प्रक्रिया के तहत स्क्रीन प्रोटेक्टर में इस्तेमाल होने वाली एंटी-शैटर फिल्म, ओलेओफोबिक कोटिंग (जो उंगलियों के निशान से बचाती है), एंटी-ग्लेयर फिल्म और ब्लू-लाइट फिल्टर जैसी तमाम खूबियों के लिए स्पष्ट नियम और पैमाने तय किए जाएंगे। बाजार में कई बार घटिया क्वालिटी के ग्लास बेचे जाते हैं जो जरा सी चोट पर चटक जाते हैं और फोन की असली स्क्रीन को भी नुकसान पहुंचाते हैं। नए नियमों के आने के बाद इन सब पर प्रभावी लगाम लगेगी।
आयातकों और विदेशी कंपनियों पर पड़ेगा सीधा असर
इस नए नियम का सबसे बड़ा असर उन कंपनियों, ब्रांड्स और व्यापारियों पर पड़ेगा जो विदेशों से, विशेषकर चीन और अन्य देशों से सस्ते स्क्रीन प्रोटेक्टर भारत में आयात (Import) करते हैं। अभी तक भारतीय बाजार में बिना किसी मानक के ढेरों अनब्रांडेड और बेहद सस्ते स्क्रीन गार्ड्स धड़ल्ले से बिकते रहे हैं। लेकिन अब आयातकों को भी भारत में माल भेजने से पहले BIS के सभी कड़े नियमों को पूरा करना होगा।
"सरकार का यह नियम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है। जब बाजार में एक तय मानक के उत्पाद बिकेंगे, तो ग्राहकों को कम से कम यह भरोसा रहेगा कि वे अपने फोन पर जो सुरक्षा कवच लगा रहे हैं, वह वाकई गुणवत्ता के पैमाने पर खरा उतरता है।" — तकनीकी बाजार विश्लेषक
जानकारों का मानना है कि इस नियम से लोकल मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। जो कंपनियां भारत में ही उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करती हैं, उन्हें एक निष्पक्ष और मजबूत बाजार मिलेगा। साथ ही, विदेशी सप्लायरों की मनमानी पर भी रोक लगेगी जो अक्सर भारतीय बाजार में घटिया माल खपा देते थे।
आम स्मार्टफोन यूजर्स की जेब पर कितना पड़ेगा प्रभाव
हर नीतिगत बदलाव की तरह इस नियम के बाद भी आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इससे उनके फोन का खर्च बढ़ जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि अब निर्माताओं को तय मानकों और टेस्टिंग प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, इसलिए प्रोडक्शन कॉस्ट में हल्का इजाफा हो सकता है। इसके चलते भारतीय बाजार में मिलने वाले प्रीमियम और सर्टिफाइड स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि थोड़ी सी बढ़ी हुई कीमत के बदले यूजर्स को बेहतर ड्यूरेबिलिटी और आंखों की सुरक्षा (ब्लू-लाइट प्रोटेक्शन जैसी खूबियों के साथ) मिलेगी। बार-बार टूटने वाले सस्ते लोकल ग्लास बदलने के झंझट से मुक्ति मिलेगी, जिससे लंबी अवधि में यूजर्स का ही फायदा होगा। आने वाले दिनों में मोबाइल एक्सेसरीज मार्केट में इस नियम को लेकर और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।






