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पेट दर्द कब बन जाता है जानलेवा खतरा? डॉक्टर से जानें किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

पेट दर्द को अक्सर लोग सामान्य गैस या अपच समझकर टाल देते हैं, लेकिन कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। एस्टर आरवी हॉस्पिटल के डॉक्टर अरविंद एसएन ने ऐसे खतरनाक लक्षणों के बारे में बताया है जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड•36
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पेट दर्द कब बन जाता है जानलेवा खतरा? डॉक्टर से जानें किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
📷 पेट दर्द कब बन जाता है जानलेवा खतरा? डॉक्टर से जानें किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • पेट में होने वाले हर दर्द को सामान्य अपच या गैस समझना भारी पड़ सकता है
  • अचानक तेज और एक ही हिस्से में होने वाला दर्द किसी बड़ी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है
  • एसिडिटी की दवाओं का लगातार बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है

रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट दर्द होना एक बेहद आम बात मानी जाती है। खानपान की गड़बड़ी, जरूरत से ज्यादा खा लेना, एसिडिटी, कब्ज या सीने में जलन जैसी दिक्कतें हर दूसरे व्यक्ति को परेशान करती रहती हैं। लोग इनसे राहत पाने के लिए घरेलू नुस्खे अपनाते हैं या फिर मेडिकल स्टोर से बिना सोचे-समझे कोई भी गोली खा लेते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी दिखने वाली लापरवाही कभी-कभी आपके लिए भारी खतरा बन सकती है? पेट दर्द का हर मामला सामान्य नहीं होता। इसके पीछे छिपे गंभीर संकेतों को समय रहते समझना और डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है, ताकि किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से बचा जा सके।

इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए बेंगलुरु स्थित एस्टर आरवी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के लीड कंसलटेंट डॉ. अरविंद एसएन बताते हैं कि पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, दर्द की तीव्रता, उसका पैटर्न और उसके साथ उभरने वाले अन्य लक्षण यह तय करते हैं कि मामला सामान्य है या किसी खतरे की घंटी है। अचानक उठने वाला तेज दर्द या ऐसा दर्द जो लगातार बढ़ता जा रहा हो, उसे कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

पेट दर्द को सामान्य समझने की भूल कब पड़ सकती है भारी?

अधिकतर लोग पेट में मरोड़ या हल्के दर्द को गैस या बदहजमी मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन जब यह दर्द लगातार बना रहे या समय के साथ और ज्यादा तीव्र हो जाए, तो स्थिति बदल सकती है। डॉ. अरविंद के अनुसार, अगर दर्द सामान्य घरेलू उपायों या ओवर-द-काउंटर दवाइयों से ठीक नहीं हो रहा है, तो यह शरीर के भीतर किसी गंभीर संक्रमण, सूजन या अन्य अंदरूनी गड़बड़ी का इशारा हो सकता है। ऐसे में समय पर डॉक्टर के पास न जाना रोग को और अधिक बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पेट के किस हिस्से में दर्द हो रहा है, यह भी बीमारी का अंदाजा लगाने में एक अहम सुराग हो सकता है। हालांकि, केवल दर्द की जगह के आधार पर सटीक बीमारी का पता लगाना मुमकिन नहीं है, इसलिए सही डायग्नोसिस के लिए क्लिनिकल जांच बेहद जरूरी हो जाती है। पेट के ऊपरी हिस्से, निचले हिस्से या साइड में होने वाले दर्द के मायने अलग-अलग हो सकते हैं, जिन्हें केवल एक ट्रेंड डॉक्टर ही समझ सकता है।

पेट दर्द कब बन जाता है जानलेवा खतरा? डॉक्टर से जानें किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
📷 पेट दर्द के कारणों और लक्षणों की जांच करते चिकित्सक

किन लक्षणों के दिखते ही तुरंत भागना चाहिए अस्पताल?

यदि पेट दर्द के साथ शरीर में कुछ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई देने लगें, तो समझ लीजिए कि अब और इंतजार करने का वक्त नहीं है। इनमें अचानक शुरू होने वाला भयंकर दर्द शामिल है जो सहन न हो सके। इसके अलावा, यदि दर्द पेट के किसी एक खास हिस्से में केंद्रित है और लगातार चुभन पैदा कर रहा है, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए।

डॉक्टरों के मुताबिक, अगर पेट दर्द के साथ लगातार उल्टियां होना, चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना, तेज बुखार रहना या मल में खून आना जैसी समस्याएं जुड़ी हों, तो यह बेहद गंभीर स्थिति का संकेत है। ऐसे मामलों में बिना एक पल गंवाए अस्पताल पहुंचना ही समझदारी होती है, क्योंकि यह Appendicitis, अल्सर या किसी अन्य गंभीर पेट के संक्रमण का परिणाम हो सकता है।

"पेट दर्द एक आम लक्षण है जो कई मामूली कारणों से हो सकता है, लेकिन अगर दर्द अचानक तेज हो जाए, लंबे समय तक रहे या इसके साथ बुखार और उल्टियां जैसी समस्याएं आने लगें, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह किसी गंभीर अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है जिसके लिए तत्काल चिकित्सीय जांच की आवश्यकता होती है।" — डॉ. अरविंद एसएन, लीड कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन, एस्टर आरवी हॉस्पिटल

एसिडिटी की दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल भी है खतरनाक

हाल ही में स्वास्थ्य से जुड़े नीतिगत मामलों में भी कड़े कदम उठाए जाने लगे हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और विशेषज्ञ समितियों द्वारा कई दवाओं को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। उदाहरण के लिए, एसिडिटी की लोकप्रिय दवा 'वोनोप्रीजन' की बिक्री अब केवल डॉक्टर की वैध पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के साथ ही किए जाने की सिफारिश की गई है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक एसिडिटी या पेट की समस्याओं की दवाइयां लेते रहने से शरीर को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इससे शरीर में विटामिन बी-12 और मैग्नीशियम की गंभीर कमी हो सकती है। साथ ही, आंतों में संक्रमण का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर किडनी और लीवर की सेहत पर पड़ता है।

स्वस्थ जीवनशैली और सही समय पर जांच ही बचाव की कुंजी

पेट से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि हम अपने खानपान और जीवनशैली पर विशेष ध्यान दें। समय पर भोजन करना, अत्यधिक ऑयली और मसालेदार चीजों से परहेज करना, और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना पेट को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, किसी भी प्रकार के लगातार रहने वाले शारीरिक कष्ट को घरेलू नुस्खों के भरोसे न छोड़कर किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

निष्कर्ष तौर पर यही कहा जा सकता है कि शरीर हमें किसी भी बड़ी बीमारी से पहले छोटे-छोटे संकेत देता है। पेट दर्द भी उन्हीं संकेतों में से एक है। जरूरत इस बात की है कि हम अपने शरीर की भाषा को समझें, समय पर डॉक्टर से मिलें और बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा का सेवन करने से बचें। सतर्क रहकर ही हम एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकते हैं।

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