तेलंगाना की राजनीति में बड़ा उलटफेर, कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने छोड़ी पार्टी
दक्षिण भारत के अहम राज्य तेलंगाना में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है, जब उसके कई पुराने और कद्दावर नेताओं ने पार्टी से अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। रविवार को आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान इन सभी नेताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर भारत राष्ट्र समिति (BRS) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम से स्थानीय स्तर पर कांग्रेस संगठन को तगड़ा नुकसान पहुंचना तय माना जा रहा है, क्योंकि ये सभी नेता अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के बाद के इन घटनाक्रमों से राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी छोड़ने वाले इन नेताओं में से कई ऐसे हैं जो पिछले लगभग तीन दशकों से पार्टी की रीढ़ बने हुए थे और संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे थे। अचानक हुआ यह बदलाव विपक्षी दल BRS के लिए एक बड़ी संजीवनी की तरह देखा जा रहा है, जो राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम रंगारेड्डी जिले के मुख्य BRS कार्यालय में संपन्न हुआ। इस दौरान पार्टी के भीतर उत्साह का माहौल देखा गया, क्योंकि विपक्षी खेमा इसे मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता और नेताओं की बढ़ती नाराजगी के रूप में पेश कर रहा है। नए नेताओं के पार्टी में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर BRS का संगठन और अधिक मजबूत होता नजर आ रहा है.
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केटीआर की मौजूदगी में हुआ भव्य मिलन समारोह
रंगारेड्डी जिले के पार्टी कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष और जाने-माने नेता केटी रामाराव (KTR) मुख्य रूप से मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में ही कांग्रेस छोड़कर आए इन सभी प्रमुख चेहरों को पार्टी में शामिल किया गया। राजेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी पटलोला कार्तिक रेड्डी के नेतृत्व में यह पूरा सियासी दांव खेला गया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
कार्यक्रम के दौरान केटीआर ने पारंपरिक रूप से पार्टी का प्रतीक माना जाने वाला गुलाबी गमछा नए नेताओं को पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर BRS के कई अन्य दिग्गज नेता भी मंच पर मौजूद रहे, जिनमें पूर्व मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी, जगदीश रेड्डी, श्रीनिवास गौड़, विधायक पाडी कौशिक रेड्डी और एमएलसी नवीन रेड्डी जैसे बड़े नाम शामिल थे। इन वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम के राजनीतिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया।
पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत करते हुए BRS नेतृत्व ने भरोसा दिलाया कि संगठन में उन्हें पूरा मान-सम्मान मिलेगा। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में मौजूदा राजनीतिक हालात से लोग और नेता दोनों ही त्रस्त आ चुके हैं, जिसके कारण विपक्षी दल की ओर लगातार रुख किया जा रहा है।
कांग्रेस छोड़कर BRS का दामन थामने वाले प्रमुख चेहरे
कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ने वाले इन नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है, जिसमें स्थानीय निकाय से लेकर जिला स्तर के कई प्रतिष्ठित पदाधिकारी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिला कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष बी. साई रेड्डी ने पार्टी छोड़कर BRS का दामन थाम लिया है। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख स्थानीय नेता भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं।
पार्टी बदलने वालों में पूर्व एमपीटीसी सदस्य और मार्केट कमेटी के निदेशक रह चुके बी. राजू, पूर्व मणिकोंडा सरपंच यालाला नरेश, पूर्व पुप्पलगुडा एमपीटीसी सदस्य पापालाल सिंह, पूर्व मणिकोंडा सरपंच जय हिंद राव और मणिकोंडा की पार्षद यालाला लावण्या ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है। इन सभी नेताओं का अपने-अपने इलाकों में अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है और इनके जाने से जमीनी स्तर पर कांग्रेस के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।
इनमें से कई नेता ऐसे हैं जो पिछले 25 से 30 वर्षों से कांग्रेस के साथ वफादारी से जुड़े हुए थे। इतने लंबे समय तक एक पार्टी की सेवा करने के बाद अचानक उनका दूसरे दल में चले जाना इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के भीतर असंतोष सुलग रहा है, जिसे समय रहते संभालने में स्थानीय नेतृत्व नाकामयाब साबित हो रहा है।
सरकार पर बरसे केटीआर, लगाए गंभीर आरोप
पार्टी में नए नेताओं के स्वागत के दौरान BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए तीखे हमले किए। केटीआर ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल के लगभग तीन साल पूरे करने वाली है, लेकिन इस दौरान जनता के साथ दमनकारी रवैया अपनाया गया है।
उन्होंने हैदराबाद शहर में संगीत और डीजे पर लगाई गई पाबंदियों का विशेष रूप से जिक्र किया और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। केटीआर ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब जुल्म बढ़ता है तो जनता और कार्यकर्ता चुप नहीं बैठते, जरूरत पड़ने पर सामान्य चीजें भी संघर्ष का हथियार बन जाती हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य के फिल्म जगत और सांस्कृतिक पहलुओं का हवाला देते हुए सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार दिया।
"राज्य में मौजूदा कांग्रेस सरकार ने हर मोर्चे पर जनता को निराश किया है। भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर है, जिससे आम जनता से लेकर व्यापारी वर्ग तक त्रस्त आ चुका है। यही वजह है कि आज अनुभवी नेता स्वेच्छा से BRS परिवार का हिस्सा बन रहे हैं।" — केटी रामाराव, कार्यकारी अध्यक्ष, BRS
मेट्रो प्रोजेक्ट और मूसी नदी विकास को लेकर सरकार को घेरा
राजनीतिक हमलों के अलावा केटीआर ने राज्य के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों को लेकर भी सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को भारी नुकसान पहुंचाया है और विकास कार्यों में कमीशनखोरी का बोलबाला है। उन्होंने विशेष रूप से मेट्रो प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में होती तो अब तक मेट्रो का विस्तार शमशाबाद तक पूरा हो चुका होता।
केटीआर के अनुसार, पिछली BRS सरकार के कार्यकाल में ही इस प्रोजेक्ट से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से अंतिम रूप दे दिया गया था, लेकिन नई सरकार ने सत्ता में आते ही राजनीतिक द्वेष के चलते इन महत्वपूर्ण योजनाओं को रद्द कर दिया या अटका दिया। उन्होंने मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि इस प्रोजेक्ट के नाम पर नदी के आसपास रहने वाले गरीब परिवारों में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा किया जा रहा है।
अंत में, BRS नेताओं ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में राज्य की जनता इन नीतियों का करारा जवाब देगी और विपक्षी दल एक बार फिर मजबूत विकल्प के रूप में उभरकर सामने आएगा। पार्टी में शामिल हुए नए नेताओं ने भी संकल्प लिया कि वे संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत से काम करेंगे।




