उत्तर प्रदेश में मौसम की मार से हाहाकार, मात्र 60 घंटों में गई 56 जानें
उत्तर प्रदेश इन दिनों कुदरत के बेहद आक्रामक रूप का सामना कर रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले साठ घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश और तेज रफ्तार आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। रविवार को राज्य के राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मौसम से जुड़ी अलग-अलग दुर्घटनाओं में अब तक कुल 56 लोगों की जान जा चुकी है। इस भयावह स्थिति ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और प्रशासन को युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।
आपदा का दायरा केवल इंसानी जिंदगियों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुधन को भी भारी क्षति पहुंचाई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पूरे प्रदेश में 100 से अधिक बेजुबान पशुओं की भी मौत हुई है। इसके साथ ही एक हजार से ज्यादा कच्चे-पक्के मकान या तो पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश और तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली के खंभे उखड़ गए हैं और बड़े पैमाने पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे यातायात और संचार व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।
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किन जिलों में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 75 में से 56 जिलों में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन कुछ खास जिलों में इस आपदा का प्रभाव सबसे ज्यादा भयानक रहा है। जनहानि के मामलों पर नजर डालें तो सीतापुर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा है, जहां 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में 5-5 लोगों की जान गई है। वहीं अयोध्या और गोरखपुर में भी 4-4 लोगों के मारे जाने की दुखद खबर सामने आई है। घायलों की बात करें तो हरदोई, मैनपुरी, श्रावस्ती और बाराबंकी जैसे जिलों में दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
मकानों को हुए नुकसान का पैमाना भी कम डरावना नहीं है। हरदोई जिले में अकेले 272 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकानों को भारी क्षति पहुंची है। जिन परिवारों के आशियाने उजड़ गए हैं, उनके सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय प्रशासन इन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने और उनके खाने-पीने की वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटा हुआ है।
प्रशासनिक अमला सक्रिय, राहत आयुक्त ने की उच्चस्तरीय समीक्षा
हालात की गंभीरता को देखते हुए राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को तमाम जिलाधिकारियों और अपर जिला अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान राहत और बचाव कार्यों की गहन समीक्षा की गई। राहत आयुक्त ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के फील्ड में रहें, आपदा पीड़ितों से सीधा संपर्क बनाएं और बिना किसी देरी के राहत सामग्री उन तक पहुंचाएं। जलभराव वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी लगाया गया है।
"प्रदेश में अतिवृष्टि एवं आंधी-तूफान के कारण हुई जनहानि बेहद दुखद है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुस्तैद रहें और राहत कार्यों में किसी भी तरह की कोताही न बरतें। राहत राशि और सहायता का वितरण तुरंत सुनिश्चित किया जाए।" — डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद, राहत आयुक्त, उत्तर प्रदेश सरकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश, फसल नुकसान का होगा सर्वे
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्राकृतिक आपदा का कड़ा संज्ञान लिया है और सभी संबंधित विभागों को युद्ध स्तर पर राहत अभियान चलाने को कहा है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कृषि विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे खेतों में बर्बाद हुई फसलों का तत्काल आकलन करें। भारी बारिश और जलभराव के कारण धान और अन्य खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि तय मानकों के अनुसार प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा जल्द से जल्द प्रदान किया जाएगा।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जिन गरीब परिवारों के मकान पूरी तरह ढह गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर नया मकान दिया जाए। घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था करने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।
आम जनता के लिए विशेष चेतावनी और हेल्पलाइन नंबर जारी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचें और उफान पर चल रही नदियों, नालों तथा जलधाराओं के पास बिल्कुल न जाएं। बच्चों को विशेष रूप से सुरक्षित घरों के अंदर ही रखने की हिदायत दी गई है। किसी भी आपातकालीन स्थिति या सहायता के लिए सरकार ने विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
प्रभावित नागरिक राहत आयुक्त कार्यालय के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं ताकि उन्हें तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह से जनता के साथ खड़ी है और हरसंभव मदद पहुंचाई जा रही है।








