उत्तर प्रदेश में आसमान से बरस रही आफत, मौसम विभाग की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
उत्तर प्रदेश के तमाम हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। राज्य के विभिन्न इलाकों में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई जिलों में जिला प्रशासन को स्कूल और कॉलेज बंद करने के कड़े निर्देश देने पड़े हैं। मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा अपडेट के मुताबिक, बादलों का यह डेरा अभी कुछ और दिन तक राज्य के ऊपर बना रहेगा, जिससे राहत मिलने के आसार फिलहाल दूर नजर आ रहे हैं। सड़कों पर पानी भरने और यातायात बाधित होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। खासकर निचले इलाकों और नदियों के आसपास बसे गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पिछले दो दिनों से जारी इस झमाझम बारिश के कारण न केवल शहरी क्षेत्रों में जलभराव की विकट समस्या पैदा हो गई है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी खेत पानी से लबालब भर चुके हैं, जिससे खरीफ की फसलों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
संबंधित खबरें
चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर, बंगाल की खाड़ी से उठा है मौसमी सिस्टम
आखिर उत्तर प्रदेश में एक साथ इतने बड़े पैमाने पर हो रही इस मूसलाधार बारिश की मुख्य वजह क्या है? मौसम विज्ञानियों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने एक बेहद मजबूत मौसमी दबाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस वेदर सिस्टम का प्रभाव अगले कुछ घंटों तक काफी तीव्र रहने की संभावना है, जिसके बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी चक्रवाती प्रभाव के कारण उत्तर प्रदेश और आसपास के पड़ोसी राज्यों में मौसमी गतिविधियों में अचानक बहुत तेजी आ गई है।
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मौसमी उथल-पुथल का असर आगामी 27 सितंबर तक साफ तौर पर देखने को मिलेगा। विशेष तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका व्यक्त की गई है। समुद्री सतह के गर्म होने और वहां से लगातार मिल रही नमी की वजह से यह चक्रवात तेजी से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के मौसम पर पड़ रहा है।
राज्य के 52 जिलों में रेड अलर्ट, अचानक बाढ़ का मंडरा रहा है बड़ा खतरा
प्रशासनिक और मौसम विभाग की सूचियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जिनमें से 52 जिले सीधे तौर पर रेड अलर्ट के दायरे में रखे गए हैं। इन संवेदनशील जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इसके अलावा कई प्रमुख नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के कारण अचानक बाढ़ आने का तगड़ा खतरा पैदा हो गया है, जिससे प्रशासन की नींद उड़ गई है।
बाढ़ की आशंका वाले प्रमुख जिलों में आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, फतेहपुर, कानपुर नगर, बांदा, कौशांबी और चित्रकूट शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों के जिलाधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
जानलेवा साबित हो रही बारिश, अब तक कई लोगों की गंवानी पड़ी जान
आसमान से बरस रही यह आफत आम जनता के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बारिश से जुड़ी दुर्घटनाओं में अब तक करीब 12 लोगों की मौत होने की दुखद सूचना सामने आई है। कहीं मकान की कच्ची दीवार गिरने से तो कहीं जलभराव या बिजली करंट की चपेट में आने से लोगों की जानें गई हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस खराब मौसम के दौरान पूरी सावधानी बरतें और बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें।
"मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट के मद्देनजर राज्य के सभी संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आपदा टीमों को जमीन पर उतारने के स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं।" — आपदा प्रबंधन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार
क्या होता है चक्रवात का गणित? जानिए कैसे बनते हैं ऐसे खतरनाक तूफानी सिस्टम
आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े चक्रवाती तूफान कैसे पैदा होते हैं और इन्हें कौन नाम देता है। विज्ञान के जानकारों के मुताबिक, पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की वजह से उत्पन्न होने वाली ताकतों और ठंडी हवाओं के कम दबाव वाले केंद्र की तरफ तेजी से खिंचने के कारण चक्रवात का निर्माण होता है। जब समुद्र के पानी का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होता है, तो वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है और गर्म हवा ऊपर उठने लगती है।
गर्म हवा के ऊपर उठने से समुद्र की सतह पर एक निम्न वायुदाब का केंद्र बन जाता है। इसके बाद समुद्र से लगातार नमी और ऊर्जा मिलती रहती है, जिससे यह सिस्टम एक बड़े चक्रवाती तूफान का रूप ले लेता है। जब इस घूमती हुई हवा की रफ्तार 63 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक हो जाती है, तब इसे आधिकारिक रूप से चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जाता है। मौजूदा चक्रवात को 'अर्नब' नाम दिया गया है, जिसे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के तूफानों पर नजर रखने वाले 13 देशों के पैनल के तहत बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया था। बंगाली भाषा में इस शब्द का अर्थ महासागर होता है, जो इसके विशाल दायरे को दर्शाता है।