वाशिंगटन/नई दिल्ली — अमेरिका से एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। अमेरिका के मशहूर श्री वेंकटेश्वर मंदिर में एक 19 वर्षीय आरोपी ने बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाने की साजिश रची थी। आरोपी मंदिर परिसर में दाखिल हुआ और उसने वहां खून-खराबा करने की पूरी तैयारी कर रखी थी। लेकिन ऐन मौके पर उसकी राइफल में तकनीकी खराबी आ गई और वह जाम हो गई। राइफल के जाम होने की वजह से वह अपनी कुटिल चाल में कामयाब नहीं हो पाया और एक बहुत बड़ा नरसंहार टल गया। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए आरोपी को दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस अब इस 19 वर्षीय आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि उसके साथियों और इस साजिश के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके।
घटना के सामने आने के बाद से ही प्रवासी भारतीयों और अमेरिकी हिंदू समुदाय में भारी गुस्सा और डर का माहौल बना हुआ है। इस गंभीर सुरक्षा चूक के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों ने अमेरिका के सभी मंदिरों के लिए एक विशेष सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ते इस तरह के खतरे चिंता का विषय हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक हथियारबंद युवक मंदिर के अंदर तक कैसे पहुंच गया। मंदिर समिति के सदस्यों ने अमेरिकी प्रशासन से अपील की है कि सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को तुरंत बढ़ाया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना को होने से पहले ही रोका जा सके।
हिंदू संगठनों का कड़ा रुख और भारत सरकार का बयान
इस खतरनाक साजिश के खुलासे के बाद देश और विदेश में रह रहे हिंदुओं में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। अमेरिका के प्रमुख हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की आतंकवाद और हेट क्राइम के एंगल से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस बीच, भारत सरकार की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत ने विदेशों में भारतीय मूल के लोगों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की है। नई दिल्ली में बैठे विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिकी दूतावास के संपर्क में रहकर पूरी रिपोर्ट मांगी है। भारत का साफ कहना है कि विदेशों में हमारे धार्मिक स्थलों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय सरकारों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीति और कूटनीति के गलियारों में भी इस घटना को लेकर हलचल तेज हो गई है। कई अमेरिकी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कायराना हरकत की कड़ी निंदा की है। अमेरिकी सिंगर और जानी-मानी हस्ती मैरी मिलबेन ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसे समय में जब नफरत फैलाने वाली ताकतें सक्रिय हो रही हैं, सभी को मिलकर शांति और सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए। अमेरिकी पुलिस विभाग का कहना है कि आरोपी से पूछताछ में जो भी खुलासे होंगे, उन्हें साझा किया जाएगा। अदालत में आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि उसे कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और विदेश मंत्री के बयानों की गूंज
इस घटना के समानांतर वैश्विक मंच पर भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रुख की भी जोरदार चर्चा हो रही है। जानकारों का मानना है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर मोर्चे पर मजबूती से अपनी बात रख रहा है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान को भी याद किया जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने बिना छाते के बारिश में रहना सीख लिया है। इसका मतलब साफ है कि भारत अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों के हितों के लिए किसी पर भी निर्भर रहने के बजाय खुद सक्षम है। अमेरिका में हुई इस मंदिर की घटना के बाद यह बात और अधिक प्रासंगिक हो जाती है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय दबावों से परे होकर कड़े फैसले ले सकता है।
स्थानीय स्तर पर अमेरिकी पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस 19 वर्षीय आरोपी का संबंध किसी कट्टरपंथी समूह से था। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी ने अकेले ही इस पूरी घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी, लेकिन उसके पास से मिले हथियारों और गोला-बारूद ने बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है। मंदिर प्रशासन ने अपने स्तर पर सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ा दी है और आने जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति पर पैनी नजर रखी जा रही है। अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग इस घटना के बाद से काफी डरे हुए हैं, लेकिन साथ ही वे स्थानीय प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल और आगे के कदम
द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी पुलिस के उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी को जल्द ही स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसके खिलाफ हेट क्राइम के तहत आरोप तय किए जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि विदेशों में रह रहे अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों को किस तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी प्रशासन पर अब इस बात का भारी दबाव है कि वह इस मामले को बेहद गंभीरता से ले और भविष्य के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करे। भारत सरकार भी इस पूरे मामले पर अपनी नजर गड़ाए हुए है और हरसंभव कूटनीतिक कदम उठाने के लिए तैयार है।










