वडोदरा के सीएनजी पंप पर हुआ दिल दहला देने वाला हादसा
गुजरात के वडोदरा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी घटना सामने आई है। यहाँ के करजण इलाके में नेशनल हाईवे-48 पर स्थित एक ईंधन और सीएनजी स्टेशन पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब गैस भरवाते समय एक चलती-फिरती कार अचानक बम की तरह फट गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि गाड़ी के पिछले हिस्से के परखच्चे उड़ गए और उसके कलपुर्जे तथा कांच के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना दोपहर के वक्त हुई, जब पंप पर सामान्य दिनों की तरह गाड़ियाँ कतार में खड़ी थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, यह हादसा किसी बड़े विध्वंस में बदल सकता था, लेकिन गनीमत यह रही कि समय रहते बरती गई सावधानी ने एक बड़ा जीवन संकट टाल दिया। घटना के बाद से ही स्थानीय वाहन चालकों और सीएनजी किट का इस्तेमाल करने वाले लोगों में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन और पुलिस महकमा इस बात की गहराई से छानबीन कर रहा है कि आखिर गैस भरते समय सिलेंडर में ऐसा क्या हुआ कि वह अचानक फट पड़ा।
संबंधित खबरें
कैसे टला एक बड़ा हादसा? वाहन खाली होने से बची कई जानें
इस दुर्घटना का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि जिस समय कार में सीएनजी भरी जा रही थी, उस वक्त गाड़ी के भीतर कोई भी इंसान मौजूद नहीं था। सुरक्षा मानकों और पंप के नियमों का पालन करते हुए वाहन चालक और उसमें सवार अन्य यात्री पहले ही गाड़ी से बाहर निकल चुके थे। वे सभी पंप परिसर में सुरक्षित दूरी पर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही ऑपरेटर ने नोजल लगाकर गैस भरनी शुरू की, कुछ ही पलों के भीतर टंकी में अत्यधिक दबाव या किसी तकनीकी खामी के चलते जोरदार धमाका हो गया।
यदि उस वक्त परिवार के लोग या ड्राइवर कार के भीतर ही बैठे रहते, तो परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते थे और जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीएनजी या एलपीजी से चलने वाले वाहनों में रिफिलिंग कराते समय गाड़ी से बाहर निकलना कितना जरूरी और जीवनरक्षक साबित होता है। इस मामले में यात्रियों की सतर्कता ने कई जिंदगियों को मौत के मुँह से बाहर खींच लिया।
धमाके की चपेट में आए अन्य वाहन, उड़ गए शीशे और पत्रे
विस्फोट की ताकत इतनी भीषण थी कि उसका असर केवल लक्षित कार तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके आसपास मौजूद अन्य संपत्तियों और वाहनों को भी भारी क्षति उठानी पड़ी। मुख्य कार के ठीक आगे और पीछे खड़ी दो अन्य गाड़ियाँ भी इस चपेट में आ गईं। उन गाड़ियों के शीशे टूट गए और बॉडी पर नुकीले धातु के टुकड़े लगने से निशान पड़ गए। सीएनजी पंप की छत और पिलर्स को भी मामूली नुकसान पहुँचा है। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक लोगों ने उसे महसूस किया और लोग सहम गए।
पंप परिसर में मौजूद कर्मचारियों और अन्य वाहन चालकों के बीच चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही पलों में पूरा पेट्रोल पंप खाली हो गया और हर तरफ धुएँ का गुबार तथा बिखरा हुआ मलबा दिखाई दे रहा था। हालात को नियंत्रित करने में कुछ समय लगा, क्योंकि लोग इस अचानक हुए खौफनाक मंज़र से उबर नहीं पा रहे थे।
फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय करजण थाने की पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियाँ सायरन बजाते हुए तुरंत मौके पर पहुँच गईं। सुरक्षा के मद्देनजर फायर ब्रिगेड की टीम ने सबसे पहले पंप की मुख्य बिजली आपूर्ति बंद करवाई और गैस लाइनों की जाँच की ताकि किसी भी तरह की आगजनी या सेकेंडरी ब्लास्ट के खतरे को टाला जा सके। पुलिस ने तुरंत पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया और घटनास्थल की बैरिकेडिंग कर दी ताकि आम लोगों की भीड़ वहाँ जमा न हो सके।
पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए और पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया। फुटेज की तकनीकी जाँच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ब्लास्ट सिलेंडर के फटने से हुआ था या फिर नोजल और प्रेशर रेगुलेटर में किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह आपदा आई।
"करजण इलाके में नेशनल हाईवे-48 पर स्थित सीएनजी स्टेशन पर एक कार में रिफिलिंग के दौरान सिलेंडर फटने की सूचना मिली थी। गनीमत यह रही कि वाहन के अंदर कोई यात्री मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। प्रारंभिक तौर पर अत्यधिक दबाव या किट की तकनीकी खराबी अंदेशा जताया जा रहा है, और फॉरेंसिक तथा तकनीकी टीम मामले की गहन जाँच कर रही है।" — स्थानीय पुलिस अधिकारी, करजण थाना
सीएनजी किट और सिलेंडरों की सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल
इस प्रकार की दुर्घटनाएँ देश भर में सीएनजी वाहन चालकों के मन में एक गहरा डर पैदा करती हैं। जानकारों का मानना है कि सीएनजी सिलेंडरों की समय-समय पर हाइड्रोस्टैटिक टेस्टिंग और मेंटेनेंस बेहद जरूरी होती है। कई बार वाहन मालिक बिना जाँच करवाए ही पुरानी या लोकल किट का इस्तेमाल करते हैं, जो उच्च दबाव को सहन नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा, अनधिकृत कार्यवाहियों या घटिया पार्ट्स के उपयोग से भी इस तरह के जानलेवा हादसे सामने आते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि वाहन चालकों को हमेशा सरकार द्वारा प्रमाणित और अधिकृत सेंटरों से ही अपनी गाड़ियों की सीएनजी किट की समय पर जाँच करवानी चाहिए। सुरक्षा नियमों का पालन करना और पंप कर्मियों द्वारा दी जाने वाली हिदायतों को गंभीरता से लेना ही इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचाव का एकमात्र रास्ता है। प्रशासन भी इस घटना के बाद क्षेत्र के सभी सीएनजी पंपों और वाहनों की फिटनेस पर पैनी नजर रखने की तैयारी कर रहा है।








