सोशल मीडिया पर वायरल हुआ गरीब वेंडर के अपमान का वीडियो
आज के दौर में सोशल मीडिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है, लेकिन इसी के साथ यह फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों का अड्डा भी बनता जा रहा है। इन दिनों इंटरनेट के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर एक ऐसा ही वीडियो आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में एक शख्स को सड़क किनारे भेलपुरी बेच रहे एक गरीब वेंडर के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो देखने वाले किसी भी सामान्य नागरिक का खून खौल उठेगा, क्योंकि उसमें हमलावर शख्स न केवल वेंडर की टोकरी से जबरन सामान खाता है, बल्कि उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी करता नजर आता है।
इस वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स ने दावा किया है कि यह घटना देश के एक बड़े शहर की है और वहां के प्रशासनिक तंत्र को तुरंत ऐसे गुंडे किस्म के व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। वीडियो के साथ लिखे गए कैप्शन में यह भी कहा गया है कि मेहनत करने वाले इस गरीब शख्स के साथ हुई इस बदतमीजी को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। देखते ही देखते यह क्लिप फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गई और लोग इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं देने लगे।
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पड़ताल में खुला सच: क्या वाकई सच थी यह घटना?
जब इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा और लोगों का गुस्सा फूटने लगा, तो हमारी फैक्ट चेक टीम ने इसकी गहराई से जांच करने का फैसला किया। इस तरह के वायरल मामलों में सबसे पहले यह देखना जरूरी होता है कि क्या वाकई यह कोई वास्तविक घटना है या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है। पड़ताल की शुरुआत करते ही हमने इस वायरल वीडियो के विभिन्न की-फ्रेम्स को निकाला और उनका रिवर्स इमेज सर्च किया। इस प्रक्रिया से हमें जो परिणाम मिले, उन्होंने इस पूरी घटना को लेकर एक बिल्कुल नया और चौंकाने वाला पहलू सामने लाकर रख दिया।
तथ्यों की खोजबीन करते हुए हम सोशल मीडिया पर सक्रिय एक जाने-माने कंटेंट क्रिएटर सोनू पासवान के ऑफिशियल पेज तक पहुंचे। इसी पेज पर हमें वह मूल वीडियो मिल गया जिसके कुछ हिस्सों को काटकर और एडिट करके लोगों के बीच सनसनी फैलाने के लिए शेयर किया जा रहा था। जब हमने उस क्रिएटर और वीडियो में नजर आ रहे किरदारों के बोगस दावों की परतें खोलीं, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
कंटेंट क्रिएटर और वेंडर खुद सामने आए
वायरल हो रही इस क्लिप के तूल पकड़ने के बाद, वीडियो में वेंडर पर हाथ उठाते हुए दिखने वाले शख्स ने खुद सामने आकर पूरी सच्चाई बयां की। उसने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा यह पूरा एपिसोड पूरी तरह से स्क्रिप्टेड था। उसने बताया कि इस तरह के वीडियो केवल लोगों के मनोरंजन और सामाजिक संदेश देने के उद्देश्य से शूट किए जाते हैं, हालांकि कई बार लोग इसे बिना समझे असली घटना मान लेते हैं। उसने दर्शकों से हाथ जोड़कर यह अपील भी की कि वे इस क्लिप को और अधिक शेयर न करें और इसे सच न मानें।
इसके साथ ही, हमें उसी चैनल पर उस भेलपुरी बेचने वाले बुजुर्ग विक्रेता का भी एक वीडियो मिला। उस वेंडर ने कैमरे के सामने आकर स्वीकार किया कि वह अक्सर ऐसी भावनात्मक और गरीबी पर आधारित कहानियों वाले वीडियो शूट करता है। उसने साफ शब्दों में बताया कि वीडियो में उसे पीटता हुआ या परेशान करता हुआ दिखाई देने वाला युवक कोई बाहरी उपद्रवी नहीं, बल्कि उनकी अपनी प्रोडक्शन टीम का ही एक अहम सदस्य है।
"हम लोग समाज में जागरूकता फैलाने के लिए गरीबी और संघर्ष पर आधारित वीडियो बनाते हैं। इस वीडियो में जो कुछ भी दिखाया गया है, वह पूरी तरह से स्क्रिप्टेड था और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।" — कंटेंट क्रिएटर एवं टीम
डिजिटल दौर में फेक वीडियो और स्क्रिप्टेड ड्रामे का बढ़ता ट्रेंड
यह कोई पहला मौका नहीं है जब लाइक्स, व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने की अंधी दौड़ में इस तरह के स्क्रिप्टेड वीडियो को असली घटना बताकर सोशल मीडिया पर परोसा गया हो। आज के समय में इंटरनेट पर वायरल होने की चाहत लोगों में इस कदर हावी हो चुकी है कि वे नैतिकता और सच की सीमाएं लांघने से भी नहीं हिचकिचाते। ऐसे लोग समाज की संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं ताकि उनकी रील्स या वीडियो पर ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक आ सके।
जब इस तरह के फर्जी वीडियो वायरल होते हैं, तो आम जनता की भावनाएं आहत होती हैं और वे बिना सोचे-समझे सिस्टम और पुलिस प्रशासन को कोसने लगते हैं। इस प्रकार की घटनाएं न केवल फेक न्यूज को बढ़ावा देती हैं, बल्कि उन असली मामलों से भी लोगों का ध्यान भटका देती हैं जहां वास्तव में किसी गरीब या पीड़ित को मदद की दरकार होती है। इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाली हर वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी हो गया है।
निष्कर्ष: वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत
हमारी विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पूरी तरह साबित हो जाता है कि पटना जंक्शन या किसी अन्य स्थान पर भेलपुरी बेचने वाले के साथ हुई मारपीट का वायरल वीडियो 100% स्क्रिप्टेड और झूठा है। इसे केवल सोशल मीडिया पर एंगेजमेंट हासिल करने के लिए एक नाटक के रूप में फिल्माया गया था। पाठकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से यह अपील की जाती है कि ऐसे किसी भी वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि जरूर करें, ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।







