पश्चिम बंगाल में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले खड़ा हुआ ईवीएम संकट
पश्चिम बंगाल में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के आयोजन को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती सामने खड़ी हो गई है। राज्य चुनाव आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी ईवीएम की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते चुनाव प्रक्रिया के समय पर संपन्न होने पर सवालिया निशान लग गए हैं। इस समस्या से पार पाने के लिए राज्य चुनाव आयोग ने एक बार फिर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है और अदालत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
आयोग का कहना है कि यदि समय रहते अदालती मुकदमों में सीलबंद की गईं ईवीएम को मुक्त नहीं कराया गया, तो तय समय सीमा के भीतर नगरपालिकाओं के चुनाव कराना लगभग असंभव हो जाएगा। इस पूरी स्थिति ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए संसाधनों की उपलब्धता सबसे पहली शर्त होती है।
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कानूनी मामलों और सीलबंद मशीनों के कारण पैदा हुई यह स्थिति
राज्य चुनाव आयोग की ओर से अदालत को दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछली चुनावी प्रक्रियाओं और विधानसभा चुनावों से जुड़े तमाम कानूनी मामले अभी अदालतों में लंबित हैं। इन कानूनी याचिकाओं के चलते नियम के अनुसार बड़ी संख्या में ईवीएम को सील करके सुरक्षित गोदामों या स्ट्रांग रूम में रखा गया है। जब तक इन मामलों का कानूनी रूप से निपटारा नहीं हो जाता, तब तक इन मशीनों का इस्तेमाल किसी अन्य चुनाव में नहीं किया जा सकता है।
यही वजह है कि आयोग के पास वर्तमान में आगामी निकाय चुनावों के लिए पर्याप्त मात्रा में वोटिंग मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। नवंबर और दिसंबर के महीनों में राज्यभर की दर्जनों नगरपालिकाओं में चुनाव कराए जाने की योजना है। ऐसे में समय पर मशीनें न मिल पाना आयोग के लिए एक बहुत बड़ी बाधा बन गया है, जिससे निपटने के लिए न्यायिक मार्ग ही एकमात्र विकल्प बचा है।
नवंबर-दिसंबर के चुनावों पर मंडराया अनिश्चितता का साया
चुनावी कैलेंडर के अनुसार, साल के आखिरी महीनों यानी नवंबर और दिसंबर में पश्चिम बंगाल की कई स्थानीय निकायों का कार्यकाल पूरा हो रहा है और वहां नए प्रतिनिधियों के चुनाव होने हैं। आयोग इन चुनावों को समय पर कराने के लिए पूरी तैयारी में जुटा था, लेकिन लॉजिस्टिक्स और उपकरणों की इस कमी ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया है। यदि मशीनों की यह कमी जल्द दूर नहीं की जाती है, तो चुनाव के पूरे शेड्यूल में फेरबदल करना पड़ सकता है।
स्थानीय निकायों के चुनाव आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों और प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जनता अपने प्रतिनिधियों के जरिए स्थानीय विकास कार्यों को गति देती है, लेकिन इस तकनीकी और कानूनी अड़चन के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी की आशंका से स्थानीय नागरिकों में भी चिंता का माहौल है।
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा गया मामला
इस गंभीर संकट को सुलझाने के लिए राज्य चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष इस विशेष मामले को उठाया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की खंडपीठ कर रही है। आयोग के वकीलों ने अदालत से गुहार लगाई है कि लंबित मुकदमों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, ताकि मशीनों को रिलीज करने का रास्ता साफ हो सके।
सूत्रों के अनुसार, अदालत ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए संकेत दिया है कि इस याचिका पर आगामी मंगलवार को सुनवाई की जा सकती है। अदालत के रुख पर ही यह निर्भर करेगा कि चुनाव आयोग को कितनी जल्दी राहत मिलती है और क्या तय वक्त पर चुनाव हो पाएंगे या नहीं।
"राज्य में आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए हमें पर्याप्त संख्या में ईवीएम की आवश्यकता है। पिछले मुकदमों और कानूनी आदेशों के कारण मशीनें सीलबंद हैं, जिसके चलते हमने हाईकोर्ट से त्वरित समाधान का अनुरोध किया है ताकि समय पर चुनाव संपन्न कराए जा सकें।" — राज्य चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल
आगे की राह और प्रशासनिक चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ तय समय पर चुनाव कराने की संवैधानिक बाध्यता है, तो दूसरी तरफ अदालती आदेशों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने की अनिवार्यता है। यदि मंगलवार को होने वाली सुनवाई में आयोग के पक्ष में सकारात्मक निर्णय आता है, तो मशीनों को तुरंत अनसील करके विभिन्न जिलों में भेजा जा सकेगा।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में स्थानीय निकाय चुनावों का भविष्य अब कलकत्ता हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिक गया है। राजनीतिक दलों की नजरें भी इस कानूनी और प्रशासनिक खींचतान पर टिकी हुई हैं, क्योंकि राज्य में आने वाले समय में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से ये चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं।



