वैश्विक स्वास्थ्य पर मंडराता नया खतरा: संक्रमण से पनप रहा कैंसर
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और तमाम स्वास्थ्य अभियानों के बावजूद दुनिया भर में कैंसर जैसी घातक बीमारी पैर पसारती जा रही है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से जुड़ी एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा जारी की गई रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। इस ताजा अध्ययन के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर सामने आने वाले कुल कैंसर मामलों में से एक बड़ा हिस्सा ऐसे संक्रमणों से जुड़ा हुआ है जिन्हें थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर इलाज के जरिए पूरी तरह रोका जा सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन संक्रामक कारकों की पहचान कर ली जाए और उन पर लगाम कस दी जाए, तो लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य प्रणाली की चुनौतियों को दर्शाती है, बल्कि रोकथाम आधारित चिकित्सा के महत्व को भी रेखांकित करती है।
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शोध में चौंकाने वाले आंकड़े: 23 लाख नए मामले संक्रमणों की देन
अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) द्वारा किए गए इस व्यापक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में लगभग 23 लाख नए कैंसर मरीज ऐसे सामने आए जिनके मूल में कोई न कोई वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी संक्रमण मौजूद था। यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर सामने आने वाले कुल कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि संक्रामक एजेंट केवल सामान्य बीमारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे म्यूटेशन के जरिए गंभीर जानलेवा बीमारियों को भी जन्म दे रहे हैं।
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि संक्रमण से जुड़े कैंसर के ये मामले मुख्य रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अधिक केंद्रित हैं। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी और स्वच्छता तथा टीकाकरण के प्रति जागरूकता का अभाव इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
एच. पाइलोरी बैक्टीरिया बना सबसे बड़ा खलनायक
वैज्ञानिकों द्वारा चिन्हित किए गए 12 प्रमुख संक्रामक कारकों में 'हेलिकोबैक्टर पाइलोरी' (H. pylori) बैक्टीरिया सबसे खतरनाक साबित हुआ है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मानव पेट में पनपता है और इसके कारण पेट में पुरानी सूजन या अल्सर की समस्या पैदा हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि अकेले साल 2024 में एच. पाइलोरी संक्रमण लगभग 7.6 लाख नए कैंसर मामलों की वजह बना, जो वैश्विक कैंसर का करीब 4% हिस्सा है।
यह विशेष बैक्टीरिया मुख्य रूप से पेट के विभिन्न प्रकार के कैंसर और नॉन-हॉजकिन लिंफोमा जैसी गंभीर स्थितियों से जुड़ा हुआ है। चूंकि यह संक्रमण दूषित खानपान और स्वच्छता की कमी से फैलता है, इसलिए इसके नियंत्रण के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय: टीकाकरण और स्क्रीनिंग ही बचाव का एकमात्र रास्ता
IARC की कैंसर निगरानी शाखा की वैज्ञानिक हैरियट रमगे ने इस अध्ययन के निष्कर्षों पर बात करते हुए जोर दिया है कि वैश्विक स्तर पर टीकाकरण और कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में काफी प्रगति हुई है, इसके बावजूद संक्रामक रोगों से होने वाला कैंसर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हम बुनियादी स्तर पर संक्रमण नियंत्रण को मजबूत नहीं करेंगे, तब तक कैंसर के इस बोझ को कम करना मुश्किल होगा।
"ये निष्कर्ष स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि कैंसर के वैश्विक बोझ को कम करने में संक्रमण नियंत्रण कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि हम समय रहते इन पैथोजेन को रोक सकें, तो लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।"— हैरियट रमगे, वैज्ञानिक, IARC
भविष्य की रणनीति: रोकथाम और जागरूकता पर देना होगा जोर
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को अब अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना होगा। केवल उपचार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, संक्रमण से बचाव के उपायों जैसे कि सुरक्षित पेयजल, बेहतर स्वच्छता, समय पर टीकाकरण और नियमित मेडिकल स्क्रीनिंग पर फोकस करना होगा। विशेष तौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में इन सुविधाओं का विस्तार करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों में भारी कमी लाई जा सके।








