बरसात का मौसम खत्म होते ही मौसम सुहाना हो जाता है, चारों तरफ हरियाली छा जाती है और गर्मी से राहत मिलती है। लेकिन, कई लोगों के लिए यह मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई परेशानियां लेकर आता है। मौसम बदलते ही कुछ लोगों को लगातार छींक आने, नाक में खुजली होने, गले में खराश महसूस होने और आंखों से पानी बहने जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। खासकर जिन लोगों को सीजनल एलर्जी की दिक्कत रहती है, उनके लिए यह समय काफी परेशानी भरा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के बाद वातावरण में आने वाला बदलाव हमारी सेहत पर सीधा असर डालता है। हवा में नमी का स्तर बढ़ने से कई ऐसे सूक्ष्म कण सक्रिय हो जाते हैं, जो सामान्य दिनों में शांत रहते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर बारिश के बाद ही एलर्जी की समस्या क्यों बढ़ जाती है और इससे किस तरह से बचा जा सकता है।
बारिश के बाद क्यों बढ़ जाती है नमी और एलर्जी?
मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा के इंटरनल मेडिसिन और मेटाबोलिक डिसऑर्डर विभाग के डॉ. अक्षय चुघ के अनुसार, बारिश के बाद वातावरण में नमी यानी ह्यूमिडिटी काफी बढ़ जाती है। यह नमी धूल के कणों, मोल्ड (फंगस) और अन्य एलर्जेंस के पनपने के लिए एकदम अनुकूल माहौल तैयार करती है। जब हवा में ये कण तैरते रहते हैं, तो सेंसिटिविटी से जूझ रहे लोगों की नाक की अंदरूनी परत इन पर तेजी से प्रतिक्रिया करती है।
नतीजतन, लोगों को बार-बार छींक आने लगती है, नाक बंद हो जाती है या फिर पानी जैसी नाक बहने की शिकायत शुरू हो जाती है। यह समस्या सुबह के वक्त या घर की साफ-सफाई करते समय और ज्यादा गंभीर हो जाती है, क्योंकि इस दौरान धूल और फंगस के कण सीधे सांस के जरिए शरीर के अंदर चले जाते हैं।
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क्या हर छींक का मतलब सिर्फ एलर्जी ही होता है?
अक्सर लोग किसी भी तरह की छींक आने पर उसे तुरंत एलर्जी मान लेते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा हमेशा सच नहीं होता। हर बार छींक आने के पीछे एलर्जी होना जरूरी नहीं है। कई बार अचानक मौसम बदलने, ठंडी हवा लगने, किसी तरह के वायरल इंफेक्शन या नाक की अंदरूनी परत में किसी प्रकार की जलन के कारण भी छींक आ सकती है।
हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को बार-बार छींक आ रही है, नाक में लगातार खुजली हो रही है और धूल या मौसम बदलने पर यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है, तो इसे एलर्जिक राइनाइटिस (नाक की एलर्जी) से जोड़कर देखा जा सकता है। इस स्थिति में आंखों में पानी आना और आंखों में भारीपन जैसे लक्षण भी आम तौर पर दिखाई देते हैं।
"बारिश के बाद बढ़ी हुई नमी और फंगस सेंसिटिव लोगों में एलर्जी के लक्षणों को तेजी से बढ़ाते हैं। यदि छींक और नाक बहने की समस्या लगातार बनी रहे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच जरूर करवानी चाहिए।" — डॉ. अक्षय चुघ, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ
रिसर्च और आंकड़े क्या कहते हैं?
स्वास्थ्य से जुड़े शोधों में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि मौसम के उतार-चढ़ाव और बारिश का श्वसन तंत्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है। साल 2013 में 'ओसोंग पब्लिक हेल्थ एंड रिसर्च पर्स्पेक्टिव्स' जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, भारी बारिश और मौसमी बदलाव के बाद अस्थमा को छोड़कर अन्य प्रकार की एलर्जी, जैसे एलर्जिक राइनाइटिस और एटॉपिक डर्मेटाइटिस (त्वचा की एलर्जी) के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद हवा की गुणवत्ता में बदलाव और पर्यावरण में मौजूद सूक्ष्म एलर्जेंस का स्तर सीधे तौर पर हमारी नाक और श्वसन नली को प्रभावित करता है। इसलिए मौसम में होने वाले इन अदृश्य बदलावों के प्रति सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
किन लक्षणों को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
यदि आपको कभी-कभार छींक आती है तो यह सामान्य हो सकता है, लेकिन कुछ खास लक्षणों को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि छींक और नाक बहने की समस्या लगातार बनी रहती है, जिससे आपकी नींद और रोजमर्रा के जरूरी काम प्रभावित होने लगते हैं, तो यह चेतावनी का संकेत है।
इसके अलावा, यदि एलर्जी के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ होने लगे, सीने में भारीपन या जकड़न महसूस हो या सांस लेते समय घरघराहट की आवाज आए, तो समझ जाइए कि मामला सिर्फ सामान्य एलर्जी से आगे बढ़ चुका है। ऐसे लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर उचित चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।
एलर्जी से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
मौसम बदलने या बारिश के बाद होने वाली एलर्जी से खुद को बचाने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरती जा सकती हैं। सबसे पहले तो अपने घर के अंदर नमी और सीलन को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। घर की सफाई करते समय मास्क का इस्तेमाल करें ताकि धूल के कण सीधे आपकी सांस की नली में न जा सकें।
अपने खान-पान का ध्यान रखें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और इम्युनिटी मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करें। यदि आपको पहले से ही किसी प्रकार की गंभीर एलर्जी की समस्या है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह और दवाओं का नियमित रूप से पालन करें ताकि बदलते मौसम में आपकी सेहत सुरक्षित रह सके।





