होम/देश/शर्ट की बाईं तरफ ही क्यों होती है जेब? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प और हैरान करने वाला इतिहास
देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

शर्ट की बाईं तरफ ही क्यों होती है जेब? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प और हैरान करने वाला इतिहास

हम सभी रोजमर्रा की जिंदगी में शर्ट पहनते हैं और उसकी छाती पर बनी जेब का इस्तेमाल पेन, चश्मा या अन्य छोटी चीजें रखने के लिए करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया भर में लगभग सभी शर्ट्स में यह जेब हमेशा बाईं तरफ ही क्यों दी जाती है?
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
24 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
शर्ट की बाईं तरफ ही क्यों होती है जेब? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प और हैरान करने वाला इतिहास
📷 शर्ट की बाईं तरफ ही क्यों होती है जेब? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प और हैरान करने वाला इतिहास — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • दुनिया भर की ज्यादातर शर्ट्स में छाती की जेब हमेशा बाईं तरफ ही डिजाइन की जाती है।
  • इसके पीछे कोई सख्त वैज्ञानिक नियम नहीं है, बल्कि इंसानी शरीर की बनावट और सुविधा मुख्य वजह है।
  • दुनिया की अधिकांश आबादी दाएं हाथ से काम करती है, जिससे बाएं हिस्से तक पहुंचना आसान होता है।

आम कपड़ों की दुनिया का एक अनसुना रहस्य

दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले कपड़ों और उनके डिजाइनों को लेकर हमारे मन में कई तरह के सवाल आते हैं। जींस की छोटी जेब से लेकर जूतों के फीतों तक, हर छोटी चीज के पीछे कोई न कोई कहानी या उपयोगिता छिपी होती है। ऐसा ही एक बेहद आम लेकिन दिलचस्प सवाल कपड़ों की दुनिया से जुड़ा हुआ है। हम सब रोजाना शर्ट पहनते हैं, जिनमें छाती के हिस्से पर एक छोटी सी जेब बनी होती है। क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि दुनिया भर में बनने वाली अधिकांश शर्ट्स में यह जेब हमेशा बाईं तरफ ही क्यों होती है?

देखने में यह एक बेहद साधारण सी बात लगती है, जिस पर शायद ही किसी का ध्यान कभी गहराई से जाता होगा। लेकिन इसके पीछे कपड़ों के इतिहास, इंसानी मनोविज्ञान और रोजमर्रा की कामकाजी जरूरतों का एक लंबा सफर जुड़ा हुआ है। जब हम इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और कपड़ों के डिजाइन में आए बदलावों को देखते हैं, तो कई रोचक तथ्य सामने आते हैं जो इस डिजाइन के पीछे की असली वजहों से पर्दा उठाते हैं।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकार

बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकार

बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़की

बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़की

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग

महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग

सैलरी और रुतबे की अंधी दौड़: सिलिकॉन वैली के दिग्गज इंजीनियर ने खुद क्यों मांगा डिमोशन? जानें हैरान करने वाली वजह

सैलरी और रुतबे की अंधी दौड़: सिलिकॉन वैली के दिग्गज इंजीनियर ने खुद क्यों मांगा डिमोशन? जानें हैरान करने वाली वजह

एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दम

एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दम

छत्तीसगढ़ के चर्चों में नया विवाद: प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर पाबंदी, क्या है इसके पीछे की असली वजह?

छत्तीसगढ़ के चर्चों में नया विवाद: प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर पाबंदी, क्या है इसके पीछे की असली वजह?

शुरुआती दौर में कपड़ों का हिस्सा नहीं थी जेब

आज के समय में शर्ट की जेब हमारे लिए इतनी सामान्य हो चुकी है कि इसके बिना कपड़ों की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि शुरुआती दौर में शर्ट या कमीज में जेब का चलन बिल्कुल नहीं था। पुराने समय में शर्ट का उपयोग मुख्य रूप से एक अंडरगारमेंट यानी दूसरे भारी कपड़ों के नीचे पहने जाने वाले आंतरिक वस्त्र के रूप में किया जाता था। उस समय ऊपरी कपड़ों या कोट में ही सामान रखने के लिए अंदरूनी या बाहरी जेबें हुआ करती थीं।

जैसे-जैसे समय बीता और फैशन में बदलाव आया, शर्ट को केवल अंदर पहनने वाले वस्त्र के बजाय एक स्वतंत्र और प्रमुख बाहरी पहनावे के रूप में स्वीकार किया जाने लगा। जब लोग शर्ट को अकेले पहनने लगे, तब उन्हें छोटे-मोटे सामान जैसे पेन, कागज के टुकड़े या रुमाल को तुरंत रखने के लिए एक आसान जगह की जरूरत महसूस हुई। इसी जरूरत ने शर्ट पर छाती के हिस्से में जेब जोड़ने के आइडिया को जन्म दिया और धीरे-धीरे यह दुनिया भर के कपड़ा निर्माताओं के बीच मानक डिजाइन बन गया।

दाएं हाथ की सुविधा और इंसानी शरीर की बनावट

इस सवाल का सबसे बड़ा और तार्किक जवाब इंसानी शरीर की कार्यप्रणाली और आदतों से जुड़ा हुआ है। दुनिया की कुल आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा दाएं हाथ से काम करने वाला यानी राइट-हैंडेड है। जब कोई व्यक्ति अपने दाएं हाथ का इस्तेमाल प्रमुखता से करता है, तो उसके लिए अपने शरीर के बाएं हिस्से तक पहुंचना और वहां से किसी वस्तु को निकालना या रखना सबसे ज्यादा सहज और प्राकृतिक होता है।

कल्पना कीजिए कि यदि जेब दाईं तरफ होती, तो दाएं हाथ वाले व्यक्ति को अपनी ही दाईं छाती पर किसी सामान को रखने के लिए हाथ को थोड़ा असहज तरीके से मोड़ना पड़ता। इसके विपरीत, बाएं हिस्से पर जेब होने के कारण दायां हाथ तेजी से और बिना किसी रुकावट के पेन, चश्मा या डायरी जैसी चीजों तक पहुंच सकता है। सुविधा का यह पहलू इतना प्रभावी साबित हुआ कि कपड़ा डिजाइनरों ने बिना किसी लिखित नियम के इसे सार्वभौमिक मानक बना दिया।

"कपड़ों का डिजाइन केवल फैशन या दिखावे तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे सीधे तौर पर मानव शरीर की कार्यकुशलता और रोजमर्रा की कामकाजी सहूलियत का बड़ा हाथ होता है। यही कारण है कि सदियों पहले तय हुआ एक व्यावहारिक डिजाइन आज भी वैश्विक स्तर पर जस का तस बना हुआ है।" — फैशन हिस्टोरियन

कामकाजी जरूरतें और विभिन्न वस्तुओं को रखने का चलन

शर्ट की जेब का उपयोग केवल आधुनिक समय में पेन रखने तक ही सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग दौर में और अलग-अलग संस्कृतियों में इस छोटी सी जेब का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुओं को सहेजने के लिए किया जाता रहा है। पुराने जमाने में जब घड़ियां पॉकेट वॉच के रूप में हुआ करती थीं, तब लोग उन्हें भी सुरक्षित रखने के लिए ऐसी ही जेबों का सहारा लेते थे। इसके अलावा, सैनिकों और कामकाजी वर्ग के लोगों के लिए यह छाती की जेब बहुत काम की साबित हुई।

युद्ध के मैदान में या कारखानों में काम करने वाले मजदूरों को कई बार ऐसी छोटी वस्तुओं की तुरंत जरूरत होती थी जिन्हें वे एक हाथ से आसानी से निकाल सकें। छाती पर बनी बाईं जेब ने इस जरूरत को पूरी तरह से पूरा किया। धीरे-धीरे जब महिलाओं के वस्त्रों में भी पॉकेट का चलन बढ़ा, तो शुरुआती दौर में यही पारंपरिक डिजाइन वहां भी अपनाया गया, हालांकि महिलाओं के फैशन में समय के साथ इसमें काफी बदलाव और विविधता देखने को मिली।

आधुनिक फैशन और बिना जेब वाली शर्ट का बढ़ता ट्रेंड

समय के पहिए के साथ फैशन की दुनिया में अनगिनत बदलाव आ चुके हैं। आज के दौर में कैजुअल और फॉर्मल दोनों तरह की शर्ट्स बाजार में उपलब्ध हैं। जहां एक तरफ कैजुअल शर्ट्स में आज भी बाईं तरफ पारंपरिक जेब देखने को मिल जाती है, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक फॉर्मल और कॉरपोरेट वियर में बिना जेब वाली शर्ट्स का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। फैशन डिजाइनरों का मानना है कि बिना जेब की शर्ट पहनने पर व्यक्ति को एक बेहद साफ-सुथरा, एलिगेंट और स्लीक लुक मिलता है।

बावजूद इसके, शर्ट की बाईं तरफ जेब होने का इतिहास आज भी हमारे कपड़ों की संस्कृति का एक अहम हिस्सा बना हुआ है। जो डिजाइन कभी सिर्फ एक छोटी सी जरूरत को पूरा करने के लिए अस्तित्व में आया था, वह आज परिधान उद्योग की एक पहचान बन चुका है। अगली बार जब आप अपनी शर्ट की जेब में पेन या चश्मा रखें, तो आप जरूर समझ जाएंगे कि इसके पीछे सदियों पुरानी मानव सुविधा और व्यावहारिक सोच का एक दिलचस्प सफर छिपा हुआ है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानीNATIONAL

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

25 सित॰
बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकारNATIONAL

बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकार

25 सित॰
बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़कीNATIONAL

बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़की

25 सित॰
बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारीNATIONAL

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

25 सित॰
महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांगNATIONAL

महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग

25 सित॰
सैलरी और रुतबे की अंधी दौड़: सिलिकॉन वैली के दिग्गज इंजीनियर ने खुद क्यों मांगा डिमोशन? जानें हैरान करने वाली वजहNATIONAL

सैलरी और रुतबे की अंधी दौड़: सिलिकॉन वैली के दिग्गज इंजीनियर ने खुद क्यों मांगा डिमोशन? जानें हैरान करने वाली वजह

24 सित॰
एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दमNATIONAL

एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन: कुल पदकों की संख्या 17 तक पहुंची, ट्रैक और फील्ड में दिखाया दम

24 सित॰
छत्तीसगढ़ के चर्चों में नया विवाद: प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर पाबंदी, क्या है इसके पीछे की असली वजह?NATIONAL

छत्तीसगढ़ के चर्चों में नया विवाद: प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर पाबंदी, क्या है इसके पीछे की असली वजह?

24 सित॰