मौसम बदलते ही क्यों महसूस होती है चाय-कॉफी की तीव्र इच्छा
जैसे ही गर्मियों का मौसम विदा लेता है और सुबह-शाम हल्की ठंडक या बारिश का दौर शुरू होता है, हमारे खानपान की आदतें भी तेजी से बदलने लगती हैं। इस दौरान अचानक से बार-बार चाय या कॉफी पीने की इच्छा होना बेहद आम बात है। कई लोग इस बदलाव को केवल अपने शौक से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी का संकेत मान बैठते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह के कारण छिपे होते हैं।
कैलाश हॉस्पिटल, देहरादून की सीनियर डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट पायल दत्त का कहना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव आते ही शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली में भी बदलाव आने लगता है। ठंडे माहौल में शरीर को प्राकृतिक रूप से अतिरिक्त गर्माहट की आवश्यकता होती है। ऐसे में जब कोई व्यक्ति गर्म पेय पदार्थ का सेवन करता है, तो उसे तुरंत एक आंतरिक राहत और सुकून का अनुभव होता है। यही वजह है कि ठंडे दिनों में या बारिश के मौसम में इन ड्रिंक्स की तरफ झुकाव अपने आप बढ़ जाता है।
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कैफीन का प्रभाव और मानसिक आराम का अनोखा मेल
चाय और कॉफी की लत या क्रेविंग के पीछे कैफीन की अहम भूमिका होती है। कैफीन एक ऐसा घटक है जो हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम को तेजी से उत्तेजित करता है। जब मौसम बदलता है तो हमारी दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता में भी थोड़ा बदलाव आता है, जिससे सुस्ती या थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में कैफीन का सेवन मस्तिष्क को तरोताजा कर देता है और नींद के अहसास को कम करके हमें तुरंत चुस्त-दुरुस्त बना देता है।
इसके अलावा, यह पूरी प्रक्रिया केवल कैफीन तक सीमित नहीं होती बल्कि इसका मनोवैज्ञानिक पहलू भी बहुत गहरा है। भाप निकलते हुए गर्म कप को हाथों में थामना, उसकी सौंधी खुशबू का अहसास और धीरे-धीरे चुस्की लेना हमारे दिमाग को शांत करने का काम करता है। यह एक ऐसा पारंपरिक रूटीन बन चुका है जो तनाव को कम करने में मददगार साबित होता है। यही कारण है कि बार-बार चाय या कॉफी पीने की तलब महसूस होती है।
"मौसम बदलने पर शरीर को गर्माहट और मानसिक सुकून की चाहत होती है, जो चाय-कॉफी की क्रेविंग को बढ़ाती है। लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दिनभर में कैफीन का अत्यधिक सेवन हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।" — पायल दत्त, सीनियर डाइटीशियन, देहरादून
शोध और अध्ययन क्या कहते हैं गर्म पेय पदार्थों के बारे में
दुनियाभर में खानपान की आदतों को लेकर कई तरह के शोध समय-समय पर सामने आते रहते हैं। यूरोपियन जर्नल ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाय और कॉफी का सेवन पुरुषों और महिलाओं के शरीर पर अलग-अलग ढंग से असर डालता है। हालांकि इन परिणामों के पीछे के सटीक जैविक कारणों को समझने के लिए अभी और अधिक वैज्ञानिक अनुसंधानों की आवश्यकता बनी हुई है।
दूसरी ओर, 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर' में पब्लिश हुई एक बड़ी स्टडी ने गर्म पेय पदार्थों को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है। इस शोध में लगभग 10 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह बात सामने आई कि जो लोग बहुत अधिक तापमान वाली यानी 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म चाय या कॉफी पीने के शौकीन होते हैं, उनमें फूड पाइप से जुड़े इसोफेगल कैंसर का जोखिम काफी हद तक बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों से कैसे बचें
चाय या कॉफी की अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप अपनी जीवनशैली और खानपान पर पूरा ध्यान दें। अक्सर लंबे समय तक खाली पेट रहने या शरीर में पानी की कमी होने पर भी सुस्ती महसूस होने लगती है, जिसे लोग चाय की प्याली से दूर करने की कोशिश करते हैं। इसलिए दिन की शुरुआत केवल कैफीनयुक्त ड्रिंक्स से करने के बजाय एक संतुलित और पौष्टिक नाश्ते के साथ करनी चाहिए।
शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में सादा पानी पिएं। यदि आपको केवल गर्माहट की तलाश है, तो आप चाय या कॉफी की बजाय हेल्दी वेजिटेबल सूप या हर्बल टी का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके अलावा अपनी नींद पूरी करें ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से ऊर्जावान बना रहे और आपको बार-बार कैफीन का सहारा न लेना पड़े।








