यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच संघर्ष लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। बुधवार सुबह यमन के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दो मिसाइलों से निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और स्थानीय मीडिया द्वारा धमाकों के कई वीडियो भी जारी किए गए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। अदन की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, गनीमत यह रही कि इस बड़े हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन एयरपोर्ट परिसर को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार हूतियों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान ‘डॉन ऑफ यमन’ चला रही है। सरकारी बल बाब अल-मंदेब के आसपास लगातार आगे बढ़ रहे हैं और लाल सागर के तट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। सऊदी समर्थित गठबंधन इस अभियान में यमनी सेना को लगातार हवाई मदद दे रहा है, जिससे हूती विद्रोही बौखलाए हुए हैं और जवाबी कार्रवाई के रूप में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।
सऊदी अरब के एयरपोर्ट भी बने निशाने पर
अदन एयरपोर्ट पर हुए इस हमले से ठीक एक दिन पहले, यानी 6 अक्टूबर को हूतियों ने पड़ोसी देश सऊदी अरब के जिजान और नजरान एयरपोर्ट को भी अपने हमलों की जद में लिया था। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, इन हमलों में तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए थे और एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा हूतियों ने सऊदी के कई अन्य सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावा किया है, जिसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर दिया है। गठबंधन के करीब 100 फाइटर जेट यमनी सरकारी बलों को एयर सपोर्ट प्रदान कर रहे हैं ताकि हूतियों के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके।
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बाब अल-मंदेब की सामरिक अहमियत और क्षेत्रीय कूटनीति
पिछले कुछ दिनों में यमनी सरकारी बलों ने बाब अल-मंदेब के आसपास के कई रणनीतिक इलाकों पर अपनी बढ़त का दावा किया है। धुबाब इलाके में एक एयरस्ट्रिप पर कब्जे और मोचा शहर पर नियंत्रण की खबरें भी सामने आई हैं। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, क्योंकि यह लाल सागर को गल्फ ऑफ अदन से जोड़ता है। इस क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर जारी यह जंग वैश्विक सप्लाई चेन के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच कूटनीति का दायरा भी बढ़ता दिख रहा है। हूतियों के हमलों के मद्देनजर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में मक्का डिफेंस पैक्ट को सक्रिय किया गया है। रियाद में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में सामूहिक सुरक्षा और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने पर सहमति बनी है। हालांकि, यमन के मैदान पर सीधे तौर पर विदेशी सैनिकों की तैनाती को लेकर अभी भी कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह क्षेत्रीय संघर्ष आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेता है।
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