नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के कई बड़े विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इन दिनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का तेवर काफी सख्त नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से लेकर ओडिशा और हिमाचल प्रदेश तक छात्र संगठन ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार मिल रही खबरों के मुताबिक छात्र हितों की रक्षा और रुकी हुई प्रशासनिक कार्रवाई को तेज कराने के लिए जमीन पर कार्यकर्ता लगातार उतर रहे हैं। किसी जगह पर अटके हुए छात्रवृत्ति फॉर्म का मामला गरमाया हुआ है, तो कहीं महीनों पुरानी शिकायतों पर कोई सुनवाई न होने के कारण गुस्से का माहौल साफ देखा जा सकता है।
ताजा मामले में वाराणसी के बीएचयू परिसर का माहौल काफी गरमाया हुआ है जहाँ एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर कुलपति कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर दी है। छात्र नेताओं का साफ कहना है कि पिछले अठारह दिनों से लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि छात्रों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है जिससे आम छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस तालाबंदी के बाद से विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों को तैनात करना पड़ गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से वक्त रहते निपटा जा सके।
बीएचयू में अठारह दिन के लंबे आंदोलन के बाद तालाबंदी
वाराणसी के प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उपजे इस ताजा विवाद ने प्रशासनिक हलकों में भी खलबली मचा दी है। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित रूप से कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन इसी तरह से जारी रहेगा। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार और प्रशासनिक भवन के आसपास बड़ी संख्या में छात्र नारेबाजी करते हुए नजर आए। इस प्रदर्शन की वजह से प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गया है और अधिकारी भी बैकफुट पर आते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन की ओर से छात्रों को समझाने-बुझाने के कई दौर के प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक किसी भी तरह का कोई स्थायी समाधान निकलता हुआ नजर नहीं आया है।
दूसरी तरफ ओडिशा में चल रहे छात्रसंघ चुनावों के बीच एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है जहाँ एबीवीपी से जुड़ा एक प्रत्याशी अचानक अपने हॉस्टल से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया है। इस घटना के सामने आते ही पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है और हॉस्टल के कमरों की तलाशी के साथ-साथ आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। छात्र संगठन ने इस मामले में पुलिस प्रशासन पर ढिलाई बरतने का गंभीर आरोप लगाया है और जल्द से जल्द प्रत्याशी को ढूंढकर सुरक्षित सामने लाने की मांग की है। चुनाव के माहौल के बीच इस तरह की घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और कार्यकर्ता लगातार पुलिस थानों के चक्कर काट रहे हैं।
हिमाचल के रामपुर कॉलेज और छात्रवृत्ति फॉर्म पर तनातनी
केवल उत्तर और पूर्व भारत ही नहीं बल्कि पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के रामपुर कॉलेज में भी विद्यार्थी परिषद का गुस्सा फूट पड़ा है। कॉलेज के ओल्ड ब्लॉक की इमारत की मरम्मत में हो रही लगातार देरी को लेकर छात्रों का सब्र अब पूरी तरह से जवाब दे चुका है। कॉलेज प्रशासन द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है, जिससे कक्षाओं के संचालन में बड़ी दिक्कत आ रही है। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू नहीं किया गया, तो वे कॉलेज गेट पर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। पुरानी और जर्जर इमारतों में कक्षाएं लगाने को मजबूर छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर भी काफी डरे और सहमे हुए नजर आ रहे हैं।
इसके अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में छात्रवृत्ति के फॉर्म भरने में आ रही तकनीकी दिक्कतों ने भी छात्रों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। पोर्टल ठीक से न चलने और अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण हजारों छात्र अपना आवेदन तय समय के भीतर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस गंभीर समस्या को उठाते हुए एबीवीपी ने आवेदन करने की आखिरी तारीख को कम से कम एक महीने तक बढ़ाने की जोरदार मांग उठाई है। कई जिलों में छात्र संगठनों ने जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि अगर समय रहते पोर्टल की खामियों को दूर नहीं किया गया और तारीख नहीं बढ़ाई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर नए सिरे से सियासत
इन तमाम शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों के साथ-साथ परिसरों में महिला सुरक्षा का मुद्दा भी एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में गरमाने लगा है। छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षण संस्थानों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए ताकि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से बयानबाजी का नया दौर शुरू हो चुका है और हर कोई अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में जुटा हुआ है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में अगर इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं निकला, तो यह छात्र आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है, जिससे विश्वविद्यालयों की शांति और व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।





