वाराणसी और ओडिशा से इस वक्त छात्र राजनीति से जुड़े बड़े और गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू में छात्रों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। अठारह दिन तक लगातार चले विरोध प्रदर्शन के बाद भी जब प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तब छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सीधे कुलपति कार्यालय पर ही ताला लगा दिया। छात्रों का साफ कहना है कि विश्वविद्यालय के अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिकारी सिर्फ मीठी बातें करके छात्रों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। पिछले अठारह दिनों से छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार धरने पर बैठे थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। मजबूर होकर छात्रों को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा ताकि प्रशासन की नींद खुले और वह छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले।
ओडिशा छात्रसंघ चुनाव के बीच गायब हुआ एबीवीपी प्रत्याशी
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि ओडिशा से भी छात्र राजनीति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। वहां छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं और इसी बीच एक एबीवीपी प्रत्याशी के अचानक हॉस्टल से गायब होने की खबर ने सनसनी फैला दी है। प्रत्याशी के इस तरह रहस्यमय ढंग से गायब होने के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। छात्र संगठन ने इस मामले में तुरंत पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस हॉस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और छात्र के साथियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। चुनाव के ठीक पहले इस तरह एक मुख्य उम्मीदवार का गायब होना कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले की गुत्थी सुलझा ली जाएगी और छात्र का पता लगा लिया जाएगा ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके।
छात्रवृत्ति फॉर्म और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर भी गरमाई सियासत
इन दो बड़ी घटनाओं के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र मुद्दों को लेकर राजनीति लगातार तेज हो रही है। छात्रवृत्ति का फॉर्म भरने में आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर भी एबीवीपी ने कड़ा रुख अपनाया है। छात्र नेताओं ने मांग की है कि आवेदन करने की अंतिम तारीख को कम से कम एक महीने के लिए और बढ़ाया जाए ताकि कोई भी गरीब छात्र इस जरूरी मदद से वंचित न रह जाए। इस मांग को लेकर भी कई जगहों पर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किए हैं।
इसके साथ ही महिला सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। राजनीतिक दल इस पूरे हालात का फायदा उठाने की कोशिश में जुटे हैं और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसरों में बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके और कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।



