लखनऊ और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक नया नाम चर्चा का केंद्र बना हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है जहाँ पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी खुद की नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। उनकी इस नई पार्टी का नाम 'जन नीति भारत' रखा गया है। इस घोषणा के बाद से ही राज्य की राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है और तमाम सियासी दलों के रणनीतिकार इस कदम के नफे-नुकसान का हिसाब लगाने में जुट गए हैं। दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से बाहर आकर सीधे तौर पर जनता के बीच चुनावी मैदान में उतरने का यह बड़ा फैसला लिया है जो कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है।
अपनी पार्टी के गठन के साथ ही दिव्या मित्तल ने मीडिया के सामने आकर अपने इरादे बिल्कुल साफ कर दिए हैं। उन्होंने तीन मुख्य वचनों के आधार पर अपनी पार्टी की रूपरेखा देश और प्रदेश की जनता के सामने रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी पारदर्शी तरीके से काम करेगी और उनके पास चुनाव लड़ने के लिए जरूरी फंड्स और मजबूत नीतियां दोनों मौजूद हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी होने के नाते प्रशासनिक कामकाज का उनका लंबा अनुभव उनके इस नए राजनीतिक सफर में कितना मददगार साबित होगा, इस पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों के विकास के मुद्दों को लेकर वे लगातार जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की तैयारी कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 पर टिकी नजरें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी पूर्व नौकरशाह का इस तरह सीधे राजनीति में उतरना आसान नहीं होता है लेकिन दिव्या मित्तल का यह कदम राज्य की पारंपरिक राजनीति को एक नई चुनौती दे सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी की मुख्य नजर साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर है। पार्टी का ढांचा तैयार करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां पहले से ही कई दिग्गज राजनीतिक दल मजबूत पकड़ रखते हैं, वहां 'जन नीति भारत' जैसी नई पार्टी के लिए अपनी जगह बनाना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके बावजूद दिव्या मित्तल और उनकी टीम पूरी तैयारी के साथ चुनावी वैतरणी पार करने के दावे कर रही है।
पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि क्या दिव्या मित्तल कोई नया राजनीतिक दल बनाएंगी या किसी पुरानी पार्टी का दामन थामेंगी। अब 15 अक्टूबर के आसपास सामने आए इन तमाम बयानों और पार्टी के आधिकारिक ऐलान ने सभी अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर राज्य के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को अपनी पार्टी के एजेंडे में सबसे ऊपर रखा है। उनका कहना है कि आज की जनता सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं करती बल्कि उसे जमीनी काम और ईमानदार नेतृत्व की जरूरत है, जिसे उनकी पार्टी पूरा करने का प्रयास करेगी।
पारदर्शिता और मजबूत फंड्स के साथ चुनावी मैदान में उतरने का दावा
दिव्या मित्तल ने प्रेस को संबोधित करते हुए यह भी बताया कि उनकी पार्टी के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है और वे पूरी ईमानदारी के साथ जनता की सेवा के लिए आगे आई हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिन समस्याओं को करीब से देखा और परखा था, अब वे उन्हीं प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर नीतियों का निर्माण करेंगी। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लोग अब इस नई पार्टी के साथ जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं। चुनावी राजनीति में उतरने के बाद उनकी यह पार्टी राज्य के युवाओं और महिलाओं को कितना आकर्षित कर पाती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल इस नए राजनीतिक दल ने सूबे की राजनीति में गर्माहट जरूर ला दी है।
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में पार्टी का विस्तार राज्य के अन्य जिलों में भी तेजी से किया जाएगा। जिला स्तर पर कमेटियां गठित की जा रही हैं ताकि grassroots level यानी जमीनी स्तर तक कार्यकर्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा सके। उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की बात करना हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी का इन मुद्दों को लेकर मैदान में उतरना आम जनता के बीच कितनी उत्सुकता पैदा करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।









