वाशिंगटन/नई दिल्ली: द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन डेस्क द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर भू-राजनीतिक उथल-पुथल अपने चरम पर है। अमेरिकी दबाव के बाद G7 देशों ने अपने रणनीतिक इमरजेंसी रिजर्व से 10 करोड़ बैरल तेल और डीजल खुले बाजार में जारी करने पर एक बड़ी सहमति जताई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनिया भर में ईंधन के दाम और बदलती सप्लाई चेन वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रही हैं।
सप्लाई चेन पर दबाव और पश्चिमी देशों में महंगाई की मार
हमारी पड़ताल बताती है कि अमेरिका और यूरोप के बाजारों में महंगाई अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। वैश्विक सप्लाई चेन में लगातार आ रहे व्यवधानों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। आम आदमी की जेब पर पड़ रही इस भारी मार को थामने के लिए ही अमेरिकी प्रशासन ने कड़े कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल किया, जिसके बाद G7 के सातों देश इस आपातकालीन रिलीज के लिए राजी हुए हैं।
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ईरान संकट और वर्ल्ड वॉर-2 जैसी चेतावनियों की पृष्ठभूमि
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पश्चिम एशिया के सुलगते हालात और ईरान के साथ बढ़ता तनाव एक बड़ी वजह रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ल्ड वॉर-2 जैसी सैन्य तैयारी की गंभीर चेतावनी देते हुए ईरान पर हमले का अपना पूर्व निर्धारित प्लान फिलहाल रद्द कर दिया था। ट्रंप का यह दावा था कि यह कदम 'दुनिया की भलाई के लिए' उठाया गया है। हालांकि, कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान को लेकर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जिसका सीधा असर ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
कड़े होते अमेरिकी आप्रवासन नियम और वैश्विक उथल-पुथल
एक तरफ जहां ऊर्जा संकट से निपटने के लिए आपातकालीन भंडार का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं अमेरिका की घरेलू नीतियां भी वैश्विक पटल पर हलचल मचा रही हैं। वाशिंगटन प्रशासन ने विदेशियों को शरण देने की प्रक्रिया लगभग बंद कर दी है और अवैध प्रवासियों को उनके स्वदेश वापस भेजने के अभियान को अभूतपूर्व रूप से तेज कर दिया है। इन बहुआयामी नीतियों का असर पश्चिमी देशों के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने पर साफ दिखाई दे रहा है।
भविष्य का असर और स्वतंत्र विश्लेषकों की राय
द फ्रीलान्स के वरिष्ठ विश्लेषकों का मानना है कि 10 करोड़ बैरल तेल और डीजल के बाजार में आने से शुरुआती राहत तो मिल सकती है, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है। जब तक मध्य पूर्व में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक सप्लाई चेन सामान्य नहीं होतीं, तब तक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता का यह दौर जारी रहेगा। आगामी हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिस पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी।








