नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में भारत ने एक बार फिर अपनी स्थिति बेहद स्पष्ट और बेबाक अंदाज में रख दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सुधरते संबंधों और आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन को आईना दिखाया है। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट और विभिन्न वैश्विक कूटनीतिक सूत्रों से मिले इनपुट बताते हैं कि भारत अब अपनी सुरक्षा चिंताओं पर किसी भी प्रकार के कूटनीतिक समझौते के मूड में नहीं है।
आतंकवाद और अमेरिका की विसंगतियां
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में दो टूक कहा कि अमेरिका आतंकवाद के मोर्चे पर भारत की गंभीर चिंताओं को पूरी तरह समझने में नाकाम रहा है। वाशिंगटन अक्सर ऐसी नीतियों पर काम करता है जो अंततः आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों को मजबूत करती हैं। जयशंकर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत को लोकतंत्र और मानवाधिकारों की नसीहत देने वाला अमेरिका खुद कई मामलों में वैसी ही कार्यप्रणाली की नकल कर रहा है, जो व्यावहारिक धरातल पर विरोधाभासी है।
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द्विपक्षीय संबंधों में क्यों आ रहा है 'बंप'?
हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में कई मोर्चों पर तनातनी देखी गई है, जिसे कूटनीतिक भाषा में 'बंप' या गतिरोध कहा जा रहा है। एक तरफ जहां दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदार हैं, वहीं आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति अमेरिका का पाकिस्तान प्रेम दिल्ली को रास नहीं आ रहा है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका सीमा पार आतंकवाद की जमीनी हकीकत को नहीं समझेगा, तब तक रणनीतिक विश्वास की बहाली में अड़चनें बनी रहेंगी।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान की हताशा
इस बीच, कूटनीतिक पटल पर पाकिस्तान की तरफ से भी बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण और सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर वहां के मंत्रियों के बयानों ने नई बहस छेड़ दी है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत एकसाथ नहीं चल सकते। पाकिस्तानी राजनेताओं की घरेलू राजनीति से प्रेरित बयानबाजी पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अब पानी फेरा जा रहा है, और भारत सिंधु जल संधि सहित तमाम द्विपक्षीय समझौतों पर अपनी शर्तों के तहत ही आगे बढ़ने के लिए दृढ़संकल्प है।
भविष्य का कूटनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि जयशंकर के इन कड़े बयानों का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में आगामी चुनावों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत ने वाशिंगटन को यह संदेश दे दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। आने वाले समय में पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वे आतंकवाद के खात्मे को लेकर कितनी ईमानदारी दिखाते हैं।








