केरल की राजनीति में एक बार फिर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस पार्टी की जानी-पहचानी नेता और विधायक रम्या हरिदास तथा स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हुई तीखी झड़प ने सनसनी फैला दी है। यह पूरा मामला तब बिगड़ा जब किसी बात को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी कहासुनी हाथापाई में बदल गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत दखल दिया और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस पूरी घटना के बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए सात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद मामले दर्ज किए हैं। इन कार्यकर्ताओं पर विधायक के साथ बदसलूकी करने और सार्वजनिक रूप से पार्टी की अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने का आरोप है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
कांग्रेस पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और आंतरिक कलह
यह कोई पहला मौका नहीं है जब केरल में कांग्रेस के भीतर इस तरह का विवाद सामने आया हो। पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे, स्थानीय चुनावों और सांगठनिक फैसलों को लेकर लगातार नाराजगी देखने को मिल रही है। हाल ही में हुए उपचुनावों के परिणामों के बाद पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ नेता वी डी सतीशन और अन्य नेताओं के सामने पार्टी को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
पार्टी के भीतरूनी सूत्रों का कहना है कि कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच संवाद की कमी इस तरह के विवादों की मुख्य वजह बन रही है। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता कई बार खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, जिसके चलते उनका गुस्सा इस तरह के हिंसक प्रदर्शनों के रूप में बाहर आता है। विधायक रम्या हरिदास के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पार्टी आलाकमान को तुरंत अनुशासन और संवादहीनता के मुद्दे पर कड़े फैसले लेने होंगे।
विवादों से पुराना नाता रहा है महिला नेत्री का
रम्या हरिदास का नाम इससे पहले भी कुछ विवादों में घिर चुका है। सांसद और विधायक के रूप में अपने राजनीतिक सफर के दौरान वह कई बार विपक्षी दलों के निशाने पर रही हैं। कोविड-लॉकडाउन के दौरान एक होटल में पाबंदियों का उल्लंघन कर खाना खाने के मामले में भी वह चर्चा में आई थीं, जिस पर काफी राजनीतिक बवाव खड़ा हुआ था। ताजा घटनाक्रम ने उनके विरोधियों को एक बार फिर से हमलावर होने का पूरा मौका दे दिया है।
फिलहाल स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। पार्टी के बड़े नेता इस आंतरिक विवाद को बाहरी साजिश बताकर टालने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कार्यकर्ता और विधायक आमने-सामने आ चुके हैं। जनता के बीच पार्टी की छवि खराब हो रही है और विपक्षी दल इस मौके का पूरा फायदा उठाने की फिराक में हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद केरल की राजनीति में और बड़ा भूचाल ला सकता है।
पुलिस जांच और आगे की राजनीतिक रणनीतियां
पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है ताकि यह साफ हो सके कि झड़प की असली शुरुआत किसने की थी। जिन सात कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज किए गए हैं, वे भूमिगत हो गए हैं या कानूनी सलाह ले रहे हैं। दूसरी ओर, विधायक रम्या हरिदास ने पार्टी के उच्च नेतृत्व को पूरे घटनाक्रम की लिखित रिपोर्ट सौंप दी है। वह अपने समर्थकों के साथ इस मामले में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
द फ्रीलान्स की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण नजर आया। आम जनता का मानना है कि नेताओं की आपसी खींचतान की वजह से विकास के असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। जनता को सिर्फ अपने जनप्रतिनिधियों से काम चाहिए, लेकिन यहां आपसी लड़ाई ही खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस आंतरिक संकट से कैसे निपटता है और रम्या हरिदास मामले में क्या रुख अपनाता है।








