नई दिल्ली और देहरादून ग्राउंड ब्यूरो — देश के कई राज्यों में इस समय किसानों की कर्जमाफी और प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों का मुआवजा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में मौसम की मार से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इस गंभीर संकट को लेकर स्थानीय कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक दफ्तरों के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि प्रभावित हर किसान परिवार को तुरंत पचास हजार रुपये का नकद मुआवजा दिया जाए और उनके बैंक के सारे पुराने कर्ज पूरी तरह माफ किए जाएं। इस मामले में राज्य के एक जिम्मेदार मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि सरकार बहुत जल्द राहत राशि उनके खातों में पहुंचाएगी और नियमों के मुताबिक मदद की जाएगी।
दूसरी तरफ पश्चिमी भारत के बड़े राज्य महाराष्ट्र से किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार ने किसान कर्जमाफी योजना की तीसरी सूची आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। इस योजना के तहत राज्य के तीन लाख इक्यावन हजार किसानों के नामों को अंतिम रूप दिया गया है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद सरकार ने सीधे किसानों के बैंक खातों में तीन हजार एक सौ इकसठ करोड़ रुपये की बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी है। इस कदम से ग्रामीण इलाकों में उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले कई सीजन से लगातार सूखे और कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे।
महाराष्ट्र में कर्जमाफी की शर्तों में ढील से किसानों को मिला बड़ा फायदा
महाराष्ट्र सरकार ने इस बार कर्जमाफी योजना के नियमों और शर्तों को काफी सरल बना दिया है। पहले कई ऐसे नियम थे जिनकी वजह से छोटे और जरूरतमंद किसानों के नाम इस सूची से बाहर हो जाते थे। लेकिन अब सरकार ने शर्तों में ढील देते हुए ज्यादा से ज्यादा परिवारों को इसके दायरे में लाने का फैसला किया है। सरकार के इस नरम रुख का असर यह हुआ है कि अब उन किसानों का कर्ज भी माफ हो रहा है जो पहले तकनीकी दिक्कतों की वजह से इस योजना से वंचित रह गए थे। राज्य के दिग्गज नेता शरद पवार ने भी सरकार के इस फैसले पर अपनी खुशी जताई है और इसे किसानों के हित में उठाया गया एक सही कदम बताया है।
हालांकि कागजी कार्रवाई और बैंक के नियमों को लेकर आम किसानों के मन में अब भी कई तरह की उलझनें बनी हुई हैं। कई जगहों पर किसानों का कहना है कि सूची में नाम आने के बावजूद बैंक वाले अभी भी चक्कर कटवा रहे हैं। स्थानीय कोऑपरेटिव बैंकों और सरकारी बैंकों के बाहर इन दिनों किसानों की लंबी लाइनें लग रही हैं ताकि वे अपने खातों की स्थिति की जांच करा सकें। बैंक अधिकारियों का यह कहना है कि सरकार के पोर्टल से सीधे पैसे भेजे जा रहे हैं और जैसे ही तकनीकी प्रक्रिया पूरी होगी, हर पात्र व्यक्ति के फोन पर पैसे आने का संदेश पहुंच जाएगा।
उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में मुआवजे के लिए बढ़ता जा रहा है सियासी दबाव
उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में ओलावृष्टि की वजह से किसानों की धान की फसल खेतों में ही बिछ गई थी। कटाई के ठीक पहले हुई इस तबाही ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। स्थानीय कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार ने सर्वे के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की है जबकि जमीनी स्तर पर किसी को एक भी रुपया नहीं मिला है। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि एक हफ्ते के भीतर किसानों के खातों में पचास हजार रुपये का मुआवजा और कर्जमाफी का लिखित आदेश नहीं आया, तो वे हाईवे जाम करेंगे और बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो साफ है कि चुनाव नजदीक आते ही कर्जमाफी का मुद्दा फिर से सियासी दलों के एजेंडे में सबसे ऊपर आ गया है। एक तरफ जहां महाराष्ट्र में सरकार पैसे बांटकर किसानों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है, वहीं उत्तराखंड जैसे राज्यों में विपक्ष इस मुद्दे को हथियार बनाकर सरकार को घेर रहा है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम लगातार इन इलाकों पर नजर बनाए हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आम किसानों तक सरकारी मदद का एक-एक रुपया बिना किसी रुकावट के पहुंचे।
बैंकों के चक्कर काट रहे किसान और आगे की प्रशासनिक तैयारियां
जमीनी हकीकत यह है कि कर्जमाफी के बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों के बीच आम किसान आज भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। बैंक के कर्मचारी और स्थानीय लेखपाल कागजों की जांच में जुटे हैं ताकि किसी भी अपात्र व्यक्ति को इसका फायदा न मिल सके। प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी किसानों के नाम नई सूचियों में जोड़े जाएंगे। द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि जब तक बिचौलियों और जटिल कागजी नियमों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की राहत योजनाओं का पूरा लाभ आखिरी छोर पर बैठे गरीब किसान तक पहुंचना बहुत मुश्किल रहेगा।






