ग्राउंड ब्यूरो — उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाके में रामलीला के आयोजन का विवाद खूनी जंग में बदल गया। रामलीला कमेटी के चंदे और खर्च के हिसाब-किताब को लेकर दो पक्षों में बैठक चल रही थी। इसी दौरान दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि गाली-गलौज के बाद अचानक हथियार निकल आए। देखते ही देखते अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा। इस सनसनीखेज वारदात में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों की गोली लगने से जान चली गई। वहीं कुछ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वारदात के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है।
गांव के लोग बताते हैं कि त्योहारों के मौके पर हर साल की तरह इस बार भी रामलीला का मंचन कराया गया था। मंचन पूरा होने के बाद कमेटी के सदस्य बैठक कर रहे थे। इस बैठक का मकसद लोगों से मिले चंदे और कुल खर्च का ब्योरा साफ करना था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हिसाब के बहीखाते को लेकर पहले से ही मनमुटाव चल रहा था। एक पक्ष का आरोप था कि चंदे के पैसों में हेरफेर किया गया है। वहीं दूसरा पक्ष सभी खर्चों को सही बता रहा था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और विवाद बढ़ता चला गया।
चंदे के बहीखाते पर पंचायत में कैसे बिगड़ी बात?
बैठक में गांव के कई गणमान्य लोग मौजूद थे। वे दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन बातचीत के दौरान पुरानी रंजिश भी सामने आ गई। पहले दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। इसी बीच एक पक्ष के लोगों ने अपने घरों से अवैध असलहे निकाल लिए। बिना किसी चेतावनी के सीधे गोलियां चलानी शुरू कर दी गईं। अचानक हुई इस फायरिंग से वहां भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
गोलियों के निशाने पर आए दो सगे भाई मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़े। उनके एक अन्य करीबी साथी को भी सीने में गोली लगी। तीनों को फौरन पास के अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक खून बहने की वजह से अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की खबर मिलते ही मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
गांव में पुलिस का कड़ा पहरा और ताबड़तोड़ दबिश
तिहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही जिले के आला पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। घटना की गंभीरता को देखते हुए कई थानों की फोर्स को तुरंत तैनात कर दिया गया। पीएसी की टुकड़ियों ने भी गांव में मार्च किया ताकि तनाव और न भड़के। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल से खोखे और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में अवैध असलहों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस की टीमें आसपास के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अफसरों ने साफ किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। गांव में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर मुख्य मोड़ पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है लेकिन तनाव बना हुआ है।
धार्मिक आयोजनों में पैसों का विवाद बना खूनी संघर्ष
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रामलीला मंचन गांव में दशकों से शांति से होता आ रहा था। लेकिन हाल के वर्षों में कमेटी के पदों और चंदे के पैसों को लेकर खींचतान बढ़ गई थी। गांव के युवाओं के दो गुट अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहे थे। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह मनमुटाव इतनी बड़ी हिंसक घटना में बदल जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। इस घटना ने पूरे क्षेत्र के लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसे सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए लिखित नियम होने चाहिए। चंदे के लेन-देन को पारदर्शी बनाना बेहद जरूरी है ताकि आपसी शक पैदा न हो। वहीं जिला प्रशासन ने भी साफ किया है कि अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हमलावरों के पास इतनी बड़ी संख्या में हथियार कहां से आए। पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न घटे।







