सहरसा में भाजयुमो नेता की सनसनीखेज हत्या से सनसनी
बिहार के सहरसा जिले में अपराधियों ने कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। सदर थाना क्षेत्र के पॉश इलाके गौतम नगर बंफर चौक के समीप भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला महामंत्री अभिजीत सिंह राजपूत की उनके ही घर में घुसकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने उनके सिर में गोली मारकर इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई और आनन-फानन में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर मामले की तह तक जाने के प्रयास शुरू किए गए।
वारदात के शुरुआती दिनों में पुलिस के सामने कई पहेलियां थीं, जिनका जवाब तलाशना बेहद जरूरी था। घर के अंदर इस तरह से किसी की हत्या होना और किसी को कानों-कान खबर न होना इस बात की ओर इशारा करता है कि हमलावर मृतक के बेहद परिचित थे या फिर उन्हें घर के अंदर आने की पूरी छूट थी। शुरुआती दौर में पुलिस के हाथ बहुत ज्यादा ठोस सुराग नहीं लगे थे, लेकिन तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन और स्थानीय लोगों से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच की दिशा तय की और एक-एक करके कड़ियों को जोड़ना शुरू किया।
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करीबी दोस्त आर्यन पर टिकी पुलिस की सुई और पटना में दबिश
इस मर्डर मिस्ट्री के खुलासे में जुटी विशेष जांच टीम (एसआईटी) की सुई सबसे पहले मृतक के बेहद करीबी दोस्त आर्यन पर आकर टिकी। पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई कि आर्यन और अभिजीत के बीच गहरी दोस्ती थी और वह अक्सर उनके साथ उठता-बैठता था। घटना के बाद से ही आर्यन की संदिग्ध गतिविधियों ने पुलिस का शक उसकी तरफ और ज्यादा गहरा कर दिया। पुख्ता तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर एसआईटी ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए आर्यन को पटना से हिरासत में ले लिया।
हालांकि, मामले की संवेदनशीलता और अनुसंधान में किसी तरह की बाधा न पहुंचे, इसके मद्देनजर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी आधिकारिक रूप से अभी बहुत कुछ बोलने से बच रहे हैं। लेकिन सूत्रों का दावा है कि आर्यन से लगातार पूछताछ की जा रही है और उसके बuro से कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आर्यन इस पूरी साजिश का मुख्य साजिशकर्ता है या फिर इस खौफनाक वारदात के पीछे कोई और बड़ा चेहरा भी छिपा हुआ है, जिसके इशारे पर इस घटना को अंजाम दिया गया है।
बुलेट बाइक और फेसबुक पोस्ट ने उलझाई मर्डर मिस्ट्री
इस पूरे हत्याकांड को और अधिक रहस्यमयी बनाने में कुछ ऐसी बातें सामने आईं जिसने पुलिस और परिजनों दोनों को चौंका दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिचितों के अनुसार, हत्या के अगले ही दिन आर्यन को मृतक अभिजीत की ही बुलेट बाइक से शहर में घूमते हुए देखा गया था। उस दौरान वह अपने अन्य परिचितों से कह रहा था कि वह इस बुलेट को कहीं सुरक्षित जगह पर खड़ा करने जा रहा है और अभिजीत भैया खुद आकर इसे ले जाएंगे। यह अपने आप में एक अजीब और संदिग्ग बयान था, क्योंकि तब तक अभिजीत की मौत का राज बाहर आ चुका था।
मामला तब और अधिक उलझ गया जब शुक्रवार की सुबह आर्यन ने अपने साथियों को फोन कर यह बताया कि वह इस समय दरभंगा में है। इसके कुछ ही पलों बाद उसका मोबाइल फोन पूरी तरह से स्विच ऑफ हो गया। इसके बाद उसी शाम आर्यन के निजी फेसबुक अकाउंट से अभिजीत सिंह राजपूत की एक तस्वीर साझा करते हुए 'मिस यू भैया' का भावुक संदेश पोस्ट किया गया। हत्या के फौरन बाद मृतक की गाड़ी लेकर घूमना, अपनी लोकेशन बार-बार बदलना और फिर सोशल मीडिया पर ऐसा ड्रामा करना पुलिस के शक को सौ फीसदी पुख्ता कर गया कि दाल में कुछ तो काला जरूर है।
गाड़ी खरीदने के रुपयों की लूट या गहरी निजी रंजिश का एंगल?
पुलिस इस बात की भी बेहद बारीकी से पड़ताल कर रही है कि आखिर इस हत्याकांड के पीछे असली मकसद क्या था। शुरुआती जांच में दो मुख्य एंगल सामने आ रहे हैं। पहला एंगल वाहन खरीदने के लिए घर में रखे गए भारी-भरकम कैश की लूट का है। चर्चा है कि अभिजीत ने कोई नई गाड़ी खरीदने के लिए पर्याप्त मात्रा में नकदी अपने पास जुटाई हुई थी। हो सकता है कि उसी पैसे को हड़पने के लालच में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया हो।
दूसरा एंगल किसी पुरानी निजी रंजिश या वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। जांच में एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि मृतक अभिजीत सिंह पिछले पंद्रह से बीस दिनों से अपने दोस्तों और परिचितों से लगातार यह बात कह रहा था कि उसे रास्ते से हटाने के लिए सुपारी दी जा चुकी है। वह अपनी महफिलों में अक्सर इस बात का जिक्र करता था कि उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा है। अगर यह बात सच है, तो इसका मतलब साफ है कि अभिजीत को अपनी हत्या की आशंका पहले से ही थी और इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश रची गई थी।
फोरेंसिक जांच और पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक बयान
घटनास्थल से वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को ही पुलिस ने मृतक के आवास को पूरी तरह से सील कर दिया था ताकि कोई भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न कर सके। इसके बाद शनिवार को सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की विशेषज्ञ टीम ने मौके पर पहुंचकर सघन जांच की कोशिश की। हालांकि, उस दौरान परिवार के लोग पैतृक गांव गढ़ बरूआड़ी में दाह संस्कार के कार्यक्रम में गए हुए थे, जिसके कारण घर का मुख्य द्वार बंद था और फॉरेंसिक टीम को अंदर जाने के लिए कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पूरे मामले को लेकर सदर एसडीपीओ पंकज कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस हर तकनीकी और संभावित बिंदु पर बहुत गहराई से काम कर रही है। उन्होंने कहा:
"भाजयुमो नेता हत्याकांड में पुलिस हर संभावित और तकनीकी बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल कर रही है। विशेष टीम लगातार छापेमारी और वैज्ञानिक अनुसंधान में जुटी हुई है। अगले 48 घंटे के भीतर पुलिस किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंच जाएगी और पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।" — पंकज कुमार सिंह, सदर एसडीपीओ, सहरसा
अब देखना यह होगा कि पुलिस की यह विशेष टीम आगामी 48 घंटों में इस उलझी हुई गुत्थी को किस तरह से सुलझाती है और इस सनसनीखेज हत्याकांड के असली गुनहगारों को कब तक बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजती है।






