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आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL के स्वदेशी विमान और हेलिकॉप्टर्स वायुसेना को सौंपे

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा तैयार किए गए स्वदेशी विमान और हेलिकॉप्टर्स वायुसेना और पवन हंस लिमिटेड को सौंपे हैं।
The Freelance ब्यूरो
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18 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL के स्वदेशी विमान और हेलिकॉप्टर्स वायुसेना को सौंपे
📷 आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL के स्वदेशी विमान और हेलिकॉप्टर्स वायुसेना को सौंपे — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL द्वारा निर्मित स्वदेशी विमान और हेलिकॉप्टर्स वायुसेना और पवन हंस को सौंपे।
  • ध्रुव-नेक्स्ट जनरेशन सिविल हेलिकॉप्टर को डीजीसीए से टाइप सर्टिफिकेशन मिलने के बाद सौंपा गया है।
  • एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की सीरीज प्रोडक्शन का पहला विमान भी अब भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया है।
  • राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से भविष्य की तकनीकें खुद विकसित करने की अपील की है।

आत्मनिर्भरता की राह पर एक और मील का पत्थर

भारत अब रक्षा और एयरोनॉटिक्स के क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को एक भव्य कार्यक्रम के दौरान देश में ही बने विमान और हेलिकॉप्टर्स भारतीय वायुसेना (IAF) और पवन हंस लिमिटेड (PHL) को सौंपे। उन्होंने कहा कि आज का दिन देश के एयरोनॉटिक्स इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो हमारी तकनीकी आत्मनिर्भरता को साफ तौर पर दिखाता है।

यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि देश की बढ़ती स्वदेशी ताकत का जश्न था। इस दौरान एचएएल (HAL) द्वारा निर्मित कई आधुनिक एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर्स सेना के हवाले किए गए। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि अब भारत हथियारों और तकनीक के लिए दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता लगातार कम कर रहा है और खुद मैन्युफैक्चरिंग का गढ़ बन रहा है।

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एक साथ तीन बड़ी सौगातें

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने गिनाया कि देश ने आज रक्षा उत्पादन में एक साथ तीन बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। सबसे पहले, स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया ध्रुव-नेक्स्ट जनरेशन सिविल हेलिकॉप्टर डीजीसीए से टाइप मिलने के बाद पवन हंस को सौंपा गया। इसके अलावा, एलसीए (LCA) फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस यानी FOC ट्रेनर का आखिरी जत्था भारतीय वायुसेना को मिला।

तीसरी सबसे बड़ी उपलब्धि एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर सीरीज के पहले विमान का वायुसेना को सौंपा जाना रही। रक्षा मंत्री ने इन सभी शानदार उपलब्धियों के लिए देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और एचएएल की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे एक दशक पहले हम हर छोटी तकनीक के लिए विदेशों का मुंह ताकते थे, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए बड़ा चैलेंज

आज की बदलती युद्ध की रणनीतियों पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में सैन्य अभियान पूरी तरह से तकनीक और डेटा आधारित होंगे। इसलिए भारत को अपनी तकनीक खुद विकसित करनी होगी। उन्होंने देश के युवाओं, वैज्ञानिकों और डिजाइनरों को एक खुला चैलेंज देते हुए बड़ी बात कही।

"आज मैं हमारे युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों और तकनीशियनों को चुनौती देता हूं: 'ऐसी तकनीकें बनाओ जो आज मौजूद नहीं हैं।' आपको ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी जो आने वाले दशक में भारत को वैश्विक एयरोनॉटिक्स तकनीक के नक्शे पर सबसे आगे खड़ा कर सकें।" — राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर बढ़ाएंगे देश की ताकत

रक्षा मंत्री ने यह भी जोर देकर कहा कि अब हमें पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा करने के बजाय, उन्हें एक-दूसरे का पूरक मानना चाहिए। जब दोनों मिलकर काम करेंगे, तभी देश का रक्षा और एयरोनॉटिक्स इकोसिस्टम मजबूत होगा। एचटीटी-40 विमान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ हमारी वायुसेना की जरूरत पूरी करेगा, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों को निर्यात (Export) करने की भी पूरी क्षमता रखता है।

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