जर्मनी में बढ़ रहा दक्षिणपंथ का प्रभाव: पूर्वी राज्यों में AFD को क्यों मिल रही जबरदस्त बढ़त?
जर्मनी में होने वाले आगामी राज्य चुनावों ने देश की राजनीतिक दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 20 सितंबर को शहरी-राज्य बर्लिन और मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे, और इन चुनावों से पहले आए चुनावी सर्वेक्षणों ने सबको चौंका दिया है। दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर डॉयचलैंड' (AFD) इन दोनों ही राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करती दिख रही है, जिससे केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन और मुख्यधारा की पार्टियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासकर पूर्वी जर्मनी के राज्यों में AFD का बढ़ता प्रभाव यह संकेत दे रहा है कि पारंपरिक राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, और आम जनता के बीच कुछ मुद्दों को लेकर गहरा असंतोष पनप रहा है। यह सिर्फ एक क्षेत्रीय चुनाव नहीं, बल्कि जर्मनी की भविष्य की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर दक्षिणपंथी विचारधारा के बढ़ते असर का एक महत्वपूर्ण पैमाना भी है।
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मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में दक्षिणपंथ का जलवा
पूर्वी जर्मनी का मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया राज्य इस बार के चुनावों में खास चर्चा का विषय बना हुआ है। 16 लाख की आबादी वाला यह राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट की राह पर चलता दिख रहा है, जहां पहले ही AFD ने अच्छा प्रदर्शन किया था। ताजा चुनावी सर्वेक्षणों के मुताबिक, मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में AFD सबसे आगे चल रही है, जबकि केंद्र में चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SPD) चार अंकों से पीछे है। SPD 1998 से इस राज्य की सत्ता में है, यानी करीब 27 सालों से। मानुएला श्वेसिग के नेतृत्व वाली SPD की स्थिति इस बार काफी डगमगाती दिख रही है। अगर ये सर्वेक्षण सही साबित होते हैं, तो SPD को सत्ता में बने रहने के लिए कम से कम दो अन्य दलों के साथ गठबंधन करना पड़ेगा, जो कि एक मुश्किल काम साबित हो सकता है। यह स्थिति दिखाती है कि दशकों पुराने राजनीतिक गढ़ भी अब दक्षिणपंथी लहर से अछूते नहीं रहे हैं, और मतदाताओं का रुझान तेजी से बदल रहा है।
यह चुनाव न सिर्फ SPD के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह जर्मनी के राजनीतिक भविष्य पर भी गहरा असर डालेगा। पारंपरिक रूप से वाम-मध्यमार्गी राजनीति का गढ़ रहे इस राज्य में AFD का उभार, क्षेत्रीय मुद्दों और राष्ट्रीय नीतियों के बीच बढ़ती खाई को दर्शाता है। AFD के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि मुख्यधारा की सेंट्रिस्ट पार्टियां हमेशा की तरह इस बार भी AFD के साथ किसी भी गठबंधन से साफ इनकार कर रही हैं। हालांकि, वामपंथी पार्टी बीएसडब्ल्यू (BSW) सैक्सनी-अनहाल्ट की तरह यहां भी अलग रुख अपना सकती है, लेकिन इसके लिए उसे कम से कम पांच प्रतिशत वोट हासिल करने होंगे। यह गठबंधन की जटिलताओं को और बढ़ाएगा, और राज्य में एक स्थिर सरकार बनाने की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना देगा।
AFD की प्रवासी नीति और उसका प्रभाव
रॉस्टॉक यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर वोल्फगांग मूनो, जो दुनियाभर में दक्षिणपंथ के बढ़ते प्रभाव पर शोध करते हैं, जर्मन चुनावों को भी करीब से देख रहे हैं। उनके विश्लेषण के मुताबिक, मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में AFD ने सैक्सनी-अनहाल्ट की तुलना में "रूढ़िवादी और उदारवादी" नीति अपनाई है। प्रोफेसर मूनो बताते हैं, "केंद्रीय स्तर और सैक्सनी-अनहाल्ट की AFD ब्रांच में कई लोग लाखों प्रवासियों को देश से बाहर भेजना चाहते हैं, लेकिन यहां मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में AFD सिर्फ 'गैरकानूनी एलियन्स' को डिपोर्ट करने की बात करती है।" हालांकि, इस अंतर के बावजूद, AFD इस मुद्दे को बेहद प्रभावी ढंग से उठा रही है।
प्रोफेसर मूनो ने जोर देकर कहा कि "वे (AFD) इसे बहुत बड़ा मुद्दा बना रहे हैं; वे अवैध प्रवासियों को अपराध और असुरक्षा से जोड़कर पेश करते हैं, इसलिए इस मामले में बहुत से लोग AFD का समर्थन करते हैं।" यह रणनीति मतदाताओं के मन में अप्रवासियों को लेकर चिंताएं पैदा करती है और उन्हें AFD के पाले में लाने में सफल होती है। जर्मन राजनीतिक विशेषज्ञ मिषाएला कोए्फनर, AFD की 'रीमाइग्रेशन' (पुनर्वासन) पॉलिसी पर गंभीर चिंता व्यक्त करती हैं।
"सिविल सोसाइटी ग्रुप्स को चिंता है कि इससे (रीमाइग्रेशन) ऐसा माहौल बनेगा जिसमें अलग दिखने वाले और विदेशी पृष्ठभूमि वाले लोगों को शक की नजर से देखा जाएगा। इसलिए, जब हम लोगों की चिंताओं की बात करते हैं, तो असल मुद्दा सिर्फ प्रोग्राम या अधिकारियों के बयानों का नहीं है, बल्कि माहौल बदलने का है। एएफडी ने उन लोगों का भी खुलकर स्वागत किया है जिनकी सोच कट्टर दक्षिणपंथी है। असल में, उनके एक क्षेत्रीय नेता, थुरिंजिया राज्य के नेता को कानूनी तौर पर 'नाजी' कहा जा सकता है।"— मिषाएला कोए्फनर, जर्मन राजनीतिक विशेषज्ञ
यह बयान AFD की नीतियों के गहरे सामाजिक प्रभावों को उजागर करता है और बताता है कि कैसे उनकी रणनीति सिर्फ चुनावी जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में विभाजन और संदेह का माहौल भी पैदा कर रही है।
पूर्वी जर्मनी की आर्थिक बदहाली और AFD का वादा
मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया सहित जर्मनी के ज्यादातर पूर्वी राज्यों की अपनी एक दर्दनाक आर्थिक कहानी रही है। ऐतिहासिक रूप से ये क्षेत्र कभी विकसित नहीं थे और यहां ज्यादातर खेती होती थी। दूसरे विश्व युद्ध के बाद, सोवियत संघ ने इन क्षेत्रों में कुछ फैक्टरियां स्थापित कीं, जिससे लोगों को रोजगार मिला। लेकिन 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ ही ये फैक्टरियां भी बिखर गईं और लाखों लोग बेरोजगार हो गए। तब से लेकर अब तक, इस राज्य में कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो पाया है। यहां के ज्यादातर लोग या तो पर्यटन क्षेत्र में काम करते हैं या खेती में लगे हुए हैं, और दुर्भाग्य से, इन दोनों ही क्षेत्रों में आय काफी कम है। इस आर्थिक पिछड़ेपन ने इन राज्यों में असंतोष की गहरी जड़ें जमा दी हैं।
प्रोफेसर मूनो बताते हैं कि हाल के वर्षों में चीजें थोड़ी बदल रही हैं। जर्मन नौसेना के लिए हथियारों का निर्माण यहां शुरू हुआ है, लेकिन यह अभी शुरुआती चरण में है। उन्होंने स्वीकार किया कि यहां की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले बेहतर हुई है, लेकिन अब भी यह काफी पिछड़ी हुई है। यह आर्थिक असमानता और विकास की कमी ही AFD के लिए उर्वर जमीन तैयार करती है। AFD इन राज्यों के लोगों से उनकी स्थिति को बदलने और विकास लाने का वादा कर रही है, जो आर्थिक रूप से उपेक्षित महसूस कर रहे मतदाताओं को लुभाता है। AFD का यह दावा कि वह मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया की आर्थिक बदहाली को दूर करेगी, उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बन जाता है जो दशकों से विकास की राह देख रहे हैं।
AFD का बदलता जनाधार और मौजूदा सरकार से असंतोष
AFD की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण है, उसका बदलता और व्यापक होता जनाधार। प्रोफेसर मूनो के विश्लेषण के अनुसार, आमतौर पर AFD के मुख्य समर्थक अधेड़ उम्र के पुरुष होते हैं, जिनकी शिक्षा कम या मध्यम होती है, जो किसी धर्म से जुड़े नहीं होते और ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। यह पारंपरिक रूप से AFD का कोर वोटर रहा है। हालांकि, समय के साथ AFD ने अपनी पहुंच महिलाओं और बुजुर्गों तक भी बढ़ाई है, जिससे उसका चुनावी आधार और मजबूत हुआ है।
मूनो बताते हैं, "पहले उन्होंने (AFD) चरमपंथी लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया, फिर उन्होंने उन लोगों तक अपनी पहुंच बनाई जो आप्रवासन के खिलाफ हैं या जो नस्लवादी या ऐसे लोग हैं जो अप्रवासियों से डरते हैं।" इसके बाद AFD ने अपनी रणनीति को और धार दी है। वे अब "उन लोगों को भी इकट्ठा कर रही हैं जो ग्रामीण इलाकों में रहते हैं और उपेक्षित महसूस करते हैं।" यह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की कमी और हाशिए पर महसूस करने वाले लोगों के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ा रहा है। इसके अलावा, एक बड़ा तबका है जो चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार से नाखुश है और उस पर भरोसा नहीं करता। महंगाई, ऊर्जा संकट, और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के प्रदर्शन से असंतुष्ट ये मतदाता भी AFD को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। यह व्यापक असंतोष AFD को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे जर्मनी की राजनीतिक तस्वीर लगातार बदल रही है।
निष्कर्ष: भविष्य की राजनीति के संकेत
कुल मिलाकर, मेकलेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया और बर्लिन में 20 सितंबर को होने वाले चुनाव AFD की बढ़ती लोकप्रियता और केंद्र में चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर घटते भरोसे का एक स्पष्ट रिपोर्टकार्ड होंगे। ये चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि जर्मनी की राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देंगे। यदि AFD इन चुनावों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो यह 2029 के आगामी संघीय चुनावों से पहले राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलावों का संकेत होगा। यह मौजूदा गठबंधन सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करेगा और चांसलर शोल्ज़ के कार्यकाल को भी प्रभावित कर सकता है। AFD का यह उभार इस बात पर जोर देता है कि जर्मनी के सामाजिक और आर्थिक मुद्दे, विशेषकर पूर्वी राज्यों में, गहन ध्यान और नए समाधानों की मांग कर रहे हैं, जिन्हें मुख्यधारा की पार्टियां शायद पूरी तरह से संबोधित नहीं कर पा रही हैं। इन चुनावों के नतीजे जर्मनी के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।




