दिल्ली में जब भी किसी को अपनी बात सरकार तक पहुंचानी होती थी, तो संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित जंतर-मंतर सबसे पहला ठिकाना बनता था। किसान हों, छात्र हों या किसी फैसले से नाराज आम लोग, सभी यहीं जुटकर अपनी आवाज बुलंद करते थे। लेकिन अब इस ऐतिहासिक जगह पर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला हमेशा के लिए थम सकता है। गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की सिफारिश की है। इसके बदले तीन नई जगहों—रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को विकल्प के तौर पर सुझाया गया है।
छात्र आंदोलन से जुड़ी है जंतर-मंतर की खास पहचान
जंतर-मंतर के इतिहास में छात्रों की भूमिका बेहद अहम रही है। साल 1993 में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के प्रदर्शन ने इस जगह को छात्र आंदोलनों से खास पहचान दिलाई थी। करीब 33 साल बाद अब यहां आखिरी बार हुए प्रदर्शन की चर्चा भी छात्र आंदोलन को लेकर ही है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले छात्रों ने यहां प्रदर्शन किया था। लेकिन जब हाल ही में CJP ने दोबारा धरना देने की तैयारी की, तो प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी गई।
संसद भवन से डेढ़ किलोमीटर से भी कम दूरी पर मौजूद होने के कारण जंतर-मंतर की सबसे बड़ी खूबी यही थी कि यहां से उठने वाली आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंचती थी। पिछले तीन दशकों में इस जगह ने अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन से लेकर निर्भया मामले के बाद न्याय की मांग तक कई ऐतिहासिक प्रदर्शन देखे हैं। बोट क्लब के बाद 1993 में जंतर-मंतर को विरोध की आवाज का नया केंद्र बनाया गया था।
कहाँ होंगे अब नए प्रदर्शन और क्या हैं चुनौतियाँ?
गृह मंत्रालय की कमेटी द्वारा सुझाए गए नए ठिकानों में रामलीला मैदान ऐतिहासिक रूप से जाना-पहचाना है, लेकिन बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड संसद भवन से काफी दूर स्थित हैं। बुराड़ी ग्राउंड संसद से लगभग 21 किलोमीटर और CBD ग्राउंड 13 से 14 किलोमीटर दूर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संसद से इतनी दूर इन नए ठिकानों पर जुटकर आंदोलनकारी अपनी आवाज उतनी प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुँचा सकेंगे?
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