लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर देश की राजनीतिक सुर्खियों के केंद्र में आ गई है। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रमुख प्रतिनिधि संगठनों के बीच चल रही वार्ताओं में अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण अब स्थानीय स्तर पर असंतोष उभरने लगा है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने एक बार फिर मोर्चा संभाल लिया है।
वार्ता बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन की तैयारी
बीते 9 सितंबर को गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ लद्दाख के प्रतिनिधियों की एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में क्षेत्र के विकास, पूर्ण राज्य और अन्य संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा की गई थी। हालांकि, बैठक के बाद लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों ने खुले तौर पर निराशा जताई और कहा कि सरकार की तरफ से उनकी मुख्य मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इसके बाद से ही क्षेत्र में नए सिरे से आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसमें स्थानीय लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है।
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सोनम वांगचुक निकालेंगे पदयात्रा, बदला गया शेड्यूल
परिस्थितियों को देखते हुए पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने 23 और 24 सितंबर को एक विशेष पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। पहले इस यात्रा को छह दिनों का लंबा कार्यक्रम रखा गया था, लेकिन लद्दाख के पहाड़ी इलाकों में बढ़ती ठंड और खराब मौसम के मिजाज को देखते हुए इसके दिनों में बदलाव किया गया है। अब यह एक प्रतीकात्मक 20 किलोमीटर की पदयात्रा होगी, जिसके बाद 24 सितंबर को शहीदों को याद करते हुए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है।
"लद्दाख के लोगों की पहचान, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा के लिए हमें संवैधानिक सुरक्षा की सख्त जरूरत है। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं और हमें उम्मीद है कि हमारी मांगें पूरी होंगी।" — सोनम वांगचुक, पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता
क्या होता है पूर्ण राज्य का दर्जा और इसके फायदे?
आम जनता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर 'पूर्ण राज्य का दर्जा' मिलने से किसी क्षेत्र या केंद्र शासित प्रदेश में क्या बदलाव आता है? सरल शब्दों में कहें तो पूर्ण राज्य का मतलब एक ऐसा स्वतंत्र क्षेत्र है जो अपने आंतरिक और प्रशासनिक फैसले खुद ले सके। पूर्ण राज्य बनने पर वहां एक चुनी हुई विधानसभा होती है, जनता अपना मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद चुनती है। इसके अलावा, राज्य सरकार के पास कानून बनाने और स्थानीय स्तर पर टैक्स वसूलने के पूर्ण अधिकार होते हैं, जो फिलहाल लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में सीधे तौर पर उपराज्यपाल के अधीन आते हैं।
छठी अनुसूची और अन्य प्रमुख मांगें
पूर्ण राज्य के अलावा लद्दाख के संगठन संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा की भी पुरजोर मांग कर रहे हैं। छठी अनुसूची मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और जमीन की रक्षा करती है। लद्दाख के नेताओं का मानना है कि इस तरह के सुरक्षा कवच से वहां की जमीनों, नौकरियों और अनोखी संस्कृति को बाहरी हस्तक्षेप से बचाया जा सकेगा। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है।



