[Main Update] उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे में क्रांति लाने वाला 'गंगा एक्सप्रेसवे' अब अपने निर्माण के अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न केवल राज्य का, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा, जिससे मेरठ और प्रयागराज के बीच की दूरी और समय में भारी कमी आएगी।
[Details] छह लेन (जिसे 8 लेन तक विस्तार दिया जा सकता है) वाले इस एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता शाहजहांपुर के पास बनाई जा रही 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी (Airstrip) है। यह हवाई पट्टी आपातकालीन स्थिति में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए उपयोग की जा सकेगी। एक्सप्रेसवे पर सफर को थकान मुक्त बनाने के लिए आधुनिक विश्राम स्थलों और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों का प्रबंध किया गया है।
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[Background] गंगा एक्सप्रेसवे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'एक्सप्रेस प्रदेश' विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में इसकी आधारशिला रखी थी। यह मार्ग मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 प्रमुख जिलों को कवर करता है।
[Impact] इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से दिल्ली से प्रयागराज की यात्रा का समय 10-12 घंटे से घटकर मात्र 6-7 घंटे रह जाएगा। इसके किनारों पर औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे। साथ ही, कृषि उत्पादों को बड़ी मंडियों तक तेजी से पहुँचाया जा सकेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और यूपी की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।



