यूरोप की सड़कों पर उबाल, महंगाई के खिलाफ महा-आंदोलन
यूरोप महाद्वीप के कई बड़े देशों में इन दिनों भयंकर असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का दौर चल रहा है। आसमान छूती महंगाई, रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दाम, ऊर्जा संकट और आवास की भारी किल्लत के खिलाफ आम नागरिक सड़क पर उतर आए हैं। स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब कई जगहों पर शांतिपूर्ण मार्च अचानक हिंसक झड़पों में बदल गए। फ्रांस से लेकर इटली और पुर्तगाल तक लोगों का गुस्सा सरकार और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ फूट पड़ा है।
विशेष तौर पर फ्रांस और इटली में प्रदर्शनों के दौरान भारी उपद्रव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं देखने को मिलीं। इन प्रदर्शनों ने यूरोपीय सरकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि नागरिक प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए उग्र भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आम जनता का कहना है कि उनकी कमाई और वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार महंगाई के मुकाबले बेहद धीमी है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
इटली के मिलान शहर में लग्जरी आर्केड बना जंग का मैदान
इटली की आर्थिक राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाले मिलान शहर में शनिवार का दिन भारी अफरा-तफरी भरा रहा। यहां का मशहूर पियाजा डेल डुओमो चौक और लग्जरी शॉपिंग आर्केड उस वक्त युद्ध का मैदान बन गया, जब बढ़ती महंगाई और युद्धों के विरोध में निकाली गई रैली में अचानक हिंसा भड़क उठी। शुरुआत में यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए।
स्थानीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक, चेहरे पर नकाब पहने उपद्रवियों के एक संगठित समूह ने कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में ले लिया। इन लोगों ने सड़कों के पेविंग ब्लॉक्स उखाड़कर और आसपास के रेस्टोरेंट व कैफे की मेज-कुर्सियों से बैरिकेड बनाकर उनमें आग लगा दी। आमतौर पर वीकेंड के दिनों में पर्यटकों और खरीदारों से गुलजार रहने वाला यह इलाका कुछ ही पलों में सुलग उठा।
दुकानों में लूटपाट और पुलिस गाड़ियों को बनाया गया निशाना
मिलान में उग्र भीड़ ने दंगा-रोधी पुलिस बल पर भारी मात्रा में पत्थर और धारदार वस्तुएं फेंकनी शुरू कर दीं। इस हिंसक झड़प में सुरक्षा बलों के कई जवानों को चोटें आईं। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में मिलान की सड़कों पर खड़ी सैन्य पुलिस की एक पेट्रोलिंग गाड़ी पूरी तरह से जली और क्षतिग्रस्त हालत में नजर आई।
उपद्रवियों ने केवल सड़कों पर ही तांडव नहीं मचाया, बल्कि लग्जरी शॉपिंग आर्केड में स्थित कई ब्रांडेड शोरूम और दुकानों के शीशे तोड़कर खुलेआम लूटपाट की। सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों यानी वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का भारी इस्तेमाल किया। इस दौरान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई नाबालिगों समेत लगभग 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का कड़ा रुख और नेताओं के बयान
इटली में हुई इस हिंसा और तोड़फोड़ की देश की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंचों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर शहरों को आग के हवाले करना या सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
"विरोध प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अपने ही शहरों और गलियों में आग लगाना कोई अधिकार नहीं है। यह उन उपद्रवियों का काम है जो अराजकता फैलाने और पूरे शहर को बंधक बनाने के लिए प्रदर्शनों का बहाना ढूंढते हैं।"— जॉर्जिया मेलोनी, प्रधानमंत्री, इटली
मिलान के मेयर ग्यूसेप्पे सेला ने भी इस हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि कानून का पालन कराने वाले सुरक्षाकर्मियों पर हमले करना और शहर को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता है। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि कानून हाथ में लेने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
फ्रांस में भी व्यापक रोष, पेरिस से लेकर ल्योन तक सुलगती आग
केवल इटली ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश फ्रांस में भी हालात कमोबेश ऐसे ही बने हुए हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई अन्य हिस्सों में महंगाई और बदहाल सरकारी सेवाओं के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस की सड़कों पर जगह-जगह कारों में आग लगाई गई, बैंकों को निशाना बनाया गया और मोबाइल तथा कपड़ों की दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, देश भर में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा के चलते लगभग 272 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ल्योन शहर में एक टूरिज्म दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि मार्सिले में प्रदर्शनकारी नगरपालिका पुलिस स्टेशन और सिटी हॉल की इमारतों के अंदर तक घुस गए। फ्रांस में इस असंतोष की बड़ी वजह लगातार बढ़ती ऊर्जा, ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें हैं, जिससे आम जनता का बजट बुरी तरह गड़बड़ा गया है।










