कार बाजार में सस्ता होना ही सफलता की गारंटी नहीं
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अक्सर यह माना जाता है कि कम कीमत वाली गाड़ियां ग्राहकों को तुरंत आकर्षित कर लेती हैं। खासकर जब बात देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की हो, तो उम्मीदें और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। लेकिन हर बार यह समीकरण सही बैठे, यह जरूरी नहीं है। कार बाजार में इन दिनों एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां जबरदस्त फीचर्स और कम कीमत के बावजूद एक गाड़ी के खरीदार लगातार घटते जा रहे हैं।
ऑटो सेक्टर के जानकार मानते हैं कि भारतीय ग्राहकों की पसंद अब तेजी से बदल रही है। लोग सिर्फ कम कीमत पर गाड़ी खरीदने के बजाय उसके डिजाइन, लुक और आधुनिक जरूरतों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। मारुति की एक बेहद लोकप्रिय कही जाने वाली छोटी कार के साथ भी कुछ ऐसा ही दौर चल रहा है, जिसकी कीमतें घटने के बावजूद शोरूम के बाहर खरीदार नजर नहीं आ रहे हैं। इस स्थिति ने ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों को भी हैरान कर दिया है कि आखिर इतनी किफायती गाड़ी बाजार में क्यों पिछड़ रही है।
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ऑल्टो से भी कम है इस कार की शुरुआती कीमत
हम बात कर रहे हैं मारुति सुजुकी की छोटी कार एस-प्रेसो (Maruti S-Presso) की, जिसे कंपनी ने बाजार में एक अलग सोच के साथ उतारा था। बीते साल सितंबर में हुए जीएसटी रिफॉर्म के बाद इस कार की कीमतों में खासी गिरावट आई थी। जीएसटी 2.0 के लागू होने के बाद इस गाड़ी की शुरुआती कीमत घटकर करीब 3.50 लाख रुपये रह गई। वहीं, इसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और मारुति की ही लोकप्रिय कार ऑल्टो के10 (Alto K10) की शुरुआती कीमत करीब 3.70 लाख रुपये है।
यानी साफ है कि एस-प्रेसो अपनी ही कंपनी की ऑल्टो से लगभग 20,000 रुपये तक सस्ती हो गई। इसके बावजूद आम ग्राहकों का रुझान इस कार की तरफ नहीं बढ़ पा रहा है। कार बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो कीमत कम होने का जो फायदा बिक्री में दिखना चाहिए था, वह पूरी तरह नदारद नजर आ रहा है। कम बजट वाले ग्राहकों के लिए यह गाड़ी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती थी, लेकिन शोरूम्स में इसकी पूछपरख लगातार कम होती जा रही है।
अगस्त के बिक्री आंकड़े दे रहे हैं चिंताजनक संकेत
मारुति एस-प्रेसो के हालिया बिक्री आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। बीते महीने अगस्त में इस छोटी कार के बमुश्किल 107 यूनिट ही बिक सके। अगर इसकी तुलना पिछले साल यानी ठीक एक साल पहले के अगस्त महीने से करें, तो स्थिति और भी साफ हो जाती है। पिछले साल अगस्त में इस कार की 1,333 यूनिट बिकी थीं। इस हिसाब से देखें तो इस साल अगस्त में बिक्री में सीधे तौर पर 92 प्रतिशत की भारी-भरकम गिरावट आई है, जो किसी भी कार कंपनी के लिए बड़ा झटका है।
इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि मारुति एस-प्रेसो अब भारतीय बाजार से लगभग विदाई की कगार पर पहुंच चुकी है। जब किसी कार की मासिक बिक्री दहाई अंकों में सिमट जाती है, तो ऑटो कंपनियां उसके भविष्य को लेकर गंभीर पुनर्विचार करने लगती हैं। जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में इसकी मांग में कोई चमत्कारिक सुधार नहीं होता है, तो कंपनी इस मॉडल को बंद करने का कड़ा फैसला भी ले सकती है।
सात साल का सफर और बाजार में पकड़ बनाने की जद्दोजहद
भारतीय बाजार में मारुति एस-प्रेसो को पहली बार 30 सितंबर 2019 को लॉन्च किया गया था। कंपनी को उम्मीद थी कि यह गाड़ी देश के एंट्री-लेवल ग्राहकों के बीच अपनी एक खास जगह बनाएगी। लेकिन लॉन्चिंग के करीब सात साल बाद भी यह कार बाजार में अपनी मजबूत पकड़ नहीं बना पाई है। शुरुआती दिनों में कंपनी ने इस कार को 'माइक्रो एसयूवी' कहकर बड़े जोर-शोर से प्रचारित किया था, ताकि इसका बॉक्सी लुक और ऊंची राइडिंग पोजीशन युवाओं और छोटे परिवारों को लुभा सके।
लेकिन समय के साथ ग्राहकों का स्वाद बदलता गया। इस कार का अनोखा और अजीबोगरीब डिजाइन हर किसी को रास नहीं आया। पारंपरिक हैचबैक पसंद करने वाले ग्राहकों ने इसे अपनाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके अलावा, एसयूवी सेगमेंट में अब कॉम्पैक्ट और बड़ी गाड़ियों का क्रेज इतना बढ़ चुका है कि लोग माइक्रो एसयूवी के कॉन्सेप्ट से थोड़ा दूर होते जा रहे हैं। नतीजतन, सात साल पुराना यह मॉडल आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
शानदार माइलेज और दमदार इंजन भी नहीं खींच पा रहे ग्राहक
अगर स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो मारुति एस-प्रेसो में किसी तरह की बड़ी कमी नहीं दिखती है। कंपनी ने इसमें 1.0 लीटर का दमदार पेट्रोल इंजन दिया है। यह गाड़ी अपने बेहतरीन माइलेज के लिए जानी जाती है। इसका पेट्रोल वेरिएंट आसानी से 24 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज दे देता है, वहीं इसका सीएनजी (CNG) वेरिएंट तो और भी किफायती है जो 32 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक का शानदार माइलेज प्रदान करता है।
गाड़ी के भीतर मिलने वाले फीचर्स की बात करें तो इसमें ऑरेंज एक्सेंट के साथ सेंटर माउंटेड स्पीडोमीटर, थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, 7 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेंमेंट सिस्टम, 12V चार्जिंग सॉकेट और 270 लीटर का ठीकठाक बूट स्पेस मिल जाता है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी कंपनी ने इसमें 6 एयरबैग, ईबीडी के साथ एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), रियर पार्किंग कैमरा और हिल होल्ड असिस्ट जैसे आधुनिक फीचर्स दिए हैं, जो इस कीमत में काफी अच्छे माने जाते हैं।
"भारतीय ऑटो बाजार में सिर्फ कीमत कम होना ही गाड़ी की सफलता की गारंटी नहीं है। ग्राहकों की पसंद अब स्टाइल, आधुनिक फीचर्स और रोड प्रेजेंस पर ज्यादा टिक गई है। जब तक कोई गाड़ी इन कसौटियों पर खरी नहीं उतरेगी, केवल सस्ती होने से उसकी बिक्री नहीं बढ़ सकती।" — ऑटो विश्लेषक
निष्कर्ष और आगे की राह
मारुति सुजुकी हमेशा से भारतीय मध्यम वर्ग की नब्ज को समझने वाली कंपनी रही है। ऑल्टो, वैगनआर और स्विफ्ट जैसी गाड़ियां इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। लेकिन हर मॉडल हिट साबित हो, यह जरूरी नहीं है। एस-प्रेसो का यह हाल इस बात का प्रमाण है कि गाड़ी का डिजाइन और उसका विजुअल अपील ग्राहकों के दिलो-दिमाग पर गहरा असर छोड़ता है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि मारुति इस मॉडल को अपडेट करती है या फिर इसे बाजार से पूरी तरह अलविदा कह देती है।





