फॉर्मूला 1 के 24 रेसों वाले ऐतिहासिक कैलेंडर ने टीमों, इंजीनियरों और खेल विशेषज्ञों के बीच यात्रा की थकान और अंतरराष्ट्रीय समय-सारणी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दुनिया भर के दर्शक जहां विभिन्न समय-क्षेत्रों के अनुसार रेस देखने के लिए कार्यक्रम मिला रहे हैं, वहीं पैडॉक के भीतर अत्यधिक काम के दबाव की शिकायतें बढ़ रही हैं।
लिबर्टी मीडिया के तहत एफ1 ने सऊदी अरब, कतर, यूएई और अमेरिका जैसे देशों में बड़े अनुबंधों को प्राथमिकता दी है। इससे वित्तीय लाभ तो हुआ है, लेकिन यूरोप के पारंपरिक सर्किटों की अनदेखी और खेल कूटनीति के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।
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मुख्य बिंदु
- कर्मचारियों पर असर: लगातार विभिन्न महाद्वीपों में यात्रा करने से तकनीकी कर्मचारियों और मैकेनिकों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
- भू-राजनीतिक बदलाव: यूरोप के पारंपरिक मोटरस्पोर्ट ट्रैक अब खाड़ी देशों और अमेरिकी शहरों के भारी निवेश के सामने पिछड़ते दिख रहे हैं।
- पर्यावरणीय लक्ष्य: वर्ष 2030 तक शून्य-उत्सर्जन का लक्ष्य रखने वाले इस खेल के लिए वैश्विक हवाई माल ढुलाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगामी 2026 के नए नियमों के तहत एफ1 प्रबंधन को व्यावसायिक लाभ और मानवीय सीमाओं के बीच संतुलन साधना ही होगा।








