ब्रिटेन की चांसलर रेचल रीव्स लेबर पार्टी की सरकार के लिए सबसे बड़ी आर्थिक परीक्षा का सामना कर रही हैं, जहां उन्हें सार्वजनिक वित्त में 22 अरब पाउंड के घाटे को पाटने के लिए कड़े कदम उठाने हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार कैपिटल गेन्स टैक्स, विरासत कर और पेंशन राहत में फेरबदल की तैयारी कर रही है ताकि राजकोषीय अनुशासन बना रहे।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा आयकर और वैट की बुनियादी दरों में बढ़ोतरी न करने के वादे के बाद, खजाने को भरने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश की जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी ब्रिटेन को संतुलित वित्तीय ढांचा बनाए रखने की सलाह दी है।
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मुख्य बिंदु
- लक्षित कर सुधार: कैपिटल गेन्स टैक्स को इनकम टैक्स स्लैब के करीब लाने की योजना, जिससे 2 से 4 अरब पाउंड जुटाए जा सकते हैं।
- कारोबारी जगत की चिंता: लंदन के वित्तीय सेक्टर ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक करों से पूंजी स्विट्जरलैंड या दुबई की ओर पलायन कर सकती है।
- सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव: राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) और स्थानीय परिषदों को दिवालिया होने से बचाने के लिए तत्काल धन की आवश्यकता है।
वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन अपनी छवि एक स्थिर और निवेश-अनुकूल अर्थव्यवस्था के रूप में बनाए रखना चाहता है, ऐसे में यह बजट देश के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करेगा।








