नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ को मिला मिला-जुला रुझान
देश के सबसे बड़े और प्रमुख शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) अपनी तय समय सीमा के अंतिम दिन कुल 1.75 गुना भरकर बंद हुआ। निवेशकों के बीच इस बड़े वित्तीय इवेंट को लेकर शुरू से ही खासा उत्साह देखने को मिल रहा था। हालांकि, अंतिम आंकड़ों के मुताबिक यह सब्सक्रिप्शन उम्मीद से थोड़ा कम, लेकिन बाजार के मौजूदा हालातों के हिसाब से स्थिर माना जा रहा है।
इस मेगा आईपीओ का कुल आकार 22,569 करोड़ रुपये का है। आखिरी दिन तक निवेशकों की तरफ से कुल 8,86,42,911 शेयरों के मुकाबले 12,89,85,128 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े आकार वाले इश्यू के लिए यह सब्सक्रिप्शन आंकड़ा ठीकठाक कहा जा सकता है, हालांकि ग्रे मार्केट में इसके तेवर थोड़े ठंडे पड़े हैं।
निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों की बात करें तो इस बार गैर-संस्थागत निवेशकों यानी एनआईआई (NII) की तरफ से सबसे अधिक दिलचस्पी दिखाई गई। एनआईआई वर्ग में यह इश्यू 2.89 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो यह बताता है कि बड़े व्यक्तिगत और कॉरपोरेट निवेशकों ने इसमें ज्यादा जोखिम लेने की इच्छा दिखाई है।
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अलग-अलग श्रेणियों में निवेशकों की कैसी रही भागीदारी
एनएसई के इस आईपीओ में संस्थागत से लेकर खुदरा निवेशकों तक ने हिस्सा लिया। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा 2.29 गुना भरकर सामने आया। बड़े म्यूचुअल फंड्स और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस वर्ग में मजबूत भागीदारी दर्ज कराई, जिससे इश्यू को एक मजबूत आधार मिला।
दूसरी ओर, आम रिटेल निवेशकों का हिस्सा 95 प्रतिशत ही सब्सक्राइब हो पाया। इसका मतलब यह है कि खुदरा निवेशकों की तरफ से जितनी उम्मीद की जा रही थी, उससे थोड़ा कम रुझान देखने को मिला। बाजार जानकारों का कहना है कि ऊंचे प्राइस बैंड और बड़े इश्यू साइज के कारण छोटे निवेशकों ने थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है।
इसके अलावा, एक्सचेंज ने अपने कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए थे। कंपनी ने अपने कर्मचारियों के वास्ते 70 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित किए थे। इन कर्मचारियों को तय फाइनल इश्यू प्राइस पर 170 रुपये प्रति शेयर की विशेष छूट दी जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भी उत्साह देखा गया।
ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट और संभावित लिस्टिंग गेन का गणित
निवेशकों के बीच किसी भी आईपीओ को लेकर सबसे बड़ा आकर्षण उसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) होता है। उपलब्ध वित्तीय डेटा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में एनएसई के जीएमपी में नरमी दर्ज की गई है। मौजूदा प्रीमियम के आधार पर यह संकेत मिल रहा है कि निवेशकों को लिस्टिंग के समय लगभग 3 प्रतिशत का ही फायदा मिल सकता है।
₹1,785 के ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एनएसई के शेयरों की अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग ₹1,844 के आस-पास आंकी जा रही है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन निवेशकों को शेयर आवंटित होंगे, उन्हें शुरुआती दौर में बहुत बड़ा मुनाफा मिलने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
"ग्रे मार्केट का प्रीमियम किसी भी कंपनी के वास्तविक वित्तीय स्वास्थ्य या भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता है। निवेशकों को हमेशा कंपनी के मूल फंडामेंटल्स को देखकर ही कोई दीर्घकालिक निर्णय लेना चाहिए।" — बाजार विशेषज्ञ
हालांकि वित्तीय जानकारों का यह भी कहना है कि जीएमपी कोई आधिकारिक पैमाना नहीं है और यह रोजाना बदलता रहता है। असली तस्वीर शेयर बाजार में लिस्टिंग के दिन ही साफ हो पाएगी, जब वास्तविक ट्रेडिंग शुरू होगी।
एंकर निवेशकों से जुटाई गई भारी-भरकम पूंजी और वैल्यूएशन
पब्लिक इश्यू खुलने से पहले ही एनएसई ने बड़े निवेशकों से बड़ी रकम जुटा ली थी। कंपनी ने 16 सितंबर को कई प्रतिष्ठित घरेलू और ग्लोबल निवेशकों से ₹6,746.2 करोड़ की भारी राशि जुटाई। इस प्रक्रिया में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) सबसे बड़े निवेशक के रूप में सामने आई।
एनएसई इस आईपीओ के जरिए ₹4.42 लाख करोड़ का मार्केट वैल्यूएशन हासिल करना चाहता है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो यह देश की चुनिंदा शीर्ष 15 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में मजबूती से शामिल हो जाएगा। कंपनी ने प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर करीब 189 एंकर निवेशकों को 3.77 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए थे।
चूंकि यह पूरा इश्यू 'ऑफर-फॉर-सेल' (OFS) के रूप में आया है, इसलिए इसमें कंपनी यानी एनएसई को सीधे तौर पर कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी। शेयर बेचने वाले पुराने शेयरधारकों को ही इससे होने वाली पूरी कमाई (इश्यू खर्च काटने के बाद) मिलेगी।
बाजार में एनएसई का दबदबा और आगे की प्रक्रिया
भारतीय वित्तीय बाजार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का वर्चस्व सर्वविदित है। मुख्य एसेट क्लास में टर्नओवर के मामले में यह देश का सबसे बड़ा और प्रभावी स्टॉक एक्सचेंज है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93 प्रतिशत से अधिक है, जबकि इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में इसकी मोनोपॉली जैसी स्थिति बनी हुई है।
अब जबकि सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, निवेशकों की निगाहें शेयर आवंटन (IPO Allotment) पर टिकी हैं। नियमों के मुताबिक, शेयरों का फाइनल अलॉटमेंट जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिल पाएंगे, उनके पैसे वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू होगी।
तय कार्यक्रम के अनुसार, एनएसई के शेयर आगामी 24 सितंबर से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और संभवतः अन्य प्लेटफॉर्म्स पर विधिवत ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद यह दिग्गज एक्सचेंज किस तरह का प्रदर्शन करता है।






