आईआईटी बॉम्बे खुदकुशी मामला: मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच
देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या का मामला अब और गहराता जा रहा है। मुंबई पुलिस ने इस बहुचर्चित मामले की जांच अब अपनी क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। छात्र की मौत के बाद से लगातार उठ रहे सवालों और परिजनों की शिकायतों को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया गया है। क्राइम ब्रांच अब इस पूरे मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच करेगी ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जांच ट्रांसफर होने के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि इस दुखद घटना के पीछे के असली कारणों से पर्दा उठेगा। परिवार वालों और छात्र संगठनों द्वारा लगातार निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी साक्ष्यों, बयानों और संस्थान के अंदर की परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल की जाएगी ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे।
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पिता के गंभीर आरोप: टीचर पर प्रताड़ना और जातिसूचक टिप्पणियों का दावा
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतक छात्र साहिल वाकोडे के पिता ने संस्थान के एक शिक्षक पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। पिता का दावा है कि आरोपी टीचर सूर्यनारायण दुल्ला पिछले तीन महीनों से लगातार साहिल को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। उनका यह भी आरोप है कि टीचर साहिल के खिलाफ जानबूझकर जातिसूचक टिप्पणियां करते थे और उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी देते थे।
परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी टीचर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा, मृतक के परिवार ने फैकल्टी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और आईआईटी प्रशासन से जुड़े कुछ अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कानूनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस इन सभी शिकायतों की सत्यता की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संस्थान के भीतर क्या वाकई किसी प्रकार का भेदभाव या मानसिक दबाव बनाया जा रहा था।
क्या था पूरा घटनाक्रम? परीक्षा के दौरान ChatGPT के इस्तेमाल का विवाद
याद दिला दें कि यह पूरी घटना 18 सितंबर की शाम को सामने आई थी। IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे ने संस्थान के कैंपस स्थित H4 हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना से ठीक पहले दिन में एक परीक्षा चल रही थी, जिसके दौरान साहिल को परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, साहिल ने परीक्षा के सवालों के जवाब पाने के लिए पेपर को ChatGPT पर अपलोड कर दिया था। इस कदाचार के पकड़े जाने के बाद संस्थान और छात्र के बीच एक तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। हालांकि, उस समय संस्थान की तरफ से यह बयान जारी किया गया था कि घटना के तुरंत बाद छात्र के खिलाफ कोई भी आधिकारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी।
संस्थान का दावा और छात्रों का विरोध प्रदर्शन
घटना के तुरंत बाद संस्थान के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा था कि डिपार्टमेंट के हेड और इंस्ट्रक्टर ने साहिल से इस पूरे मामले पर लंबी बातचीत की थी। उन्होंने छात्र को समझाया था और यह पूरा भरोसा दिलाया था कि इस एक गलती का उसके एकेडमिक करियर पर कोई बुरा या स्थाई प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रशासन के अनुसार, छात्र को सामान्य रूप से समझाने की कोशिश की गई थी ताकि वह मानसिक दबाव में न आए।
लेकिन दूसरी तरफ, साहिल के साथी छात्रों का दावा इससे बिल्कुल अलग था। साहिल की मौत के तुरंत बाद आईआईटी बॉम्बे के सैकड़ों छात्र गुस्से में आ गए और उन्होंने कैंपस के अंदर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ तौर पर आरोप था कि संस्थान इस मामले में पूरी सच्चाई नहीं बता रहा है और पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है।
एक साल के सस्पेंशन का डर और भविष्य की चिंता
छात्रों का कहना था कि परीक्षा में चीटिंग के आरोप के बाद साहिल को संस्थान की तरफ से एक साल के सस्पेंशन की गंभीर धमकी दी गई थी। छात्रों के अनुसार, यदि किसी छात्र को एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया जाता है, तो उसे तुरंत हॉस्टल खाली करना पड़ता है और कैंपस से बाहर रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उस छात्र की चार साल की इंजीनियरिंग की डिग्री पांच साल या उससे भी अधिक समय में पूरी होती।
साथियों का मानना है कि इसी एक साल के सस्पेंशन और भविष्य बर्बाद होने के डर ने साहिल को अंदर से तोड़ दिया था। छात्र लगातार यह मांग कर रहे हैं कि केवल टीचर ही नहीं, बल्कि इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की भी गहन जांच होनी चाहिए जिसकी वजह से एक होनहार छात्र को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
बढ़ता दबाव और न्याय की उम्मीद
"मेरे बेटे को पिछले कई महीनों से लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। उसे जातिगत रूप से टारगेट किया जाता था और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी। हम केवल न्याय चाहते हैं ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।" — साहिल के पिता, पीड़ित परिवार
इस हाई-प्रोफाइल मामले के क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें मुंबई पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, प्रशासनिक संवेदनशीलता और परिसरों में आपसी भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों पर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ गया है। क्राइम ब्रांच की जांच से यह देखना अहम होगा कि क्या वाकई किसी सिस्टमगत लापरवाही या व्यक्तिगत प्रताड़ना की वजह से साहिल की जान गई।







