तिराना की सड़कों पर उमड़ा युवाओं का सैलाब
यूरोपीय देश अल्बानिया की राजधानी तिराना इस समय सुलग रही है। यहां पढ़ाई के बढ़ते खर्च, लचर प्रशासनिक व्यवस्था और रोजगार के घटते अवसरों के खिलाफ छात्रों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा है। हजारों की संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर देश के प्रधानमंत्री एदी रामा के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शन का यह दौर इतना उग्र हो गया है कि स्थिति को संभालना स्थानीय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
छात्रों का यह आक्रोश केवल अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे महीनों से सुलगती नाराजगी है। युवाओं का कहना है कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए पढ़ना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, डिग्री हासिल करने के बाद भी बाजार में नौकरी के नाम पर कुछ नहीं मिलता। युवाओं का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है और सरकार इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदकर बैठी है।
सरकारी इमारतों और बैंकों पर प्रदर्शनकारियों का हमला
आंदोलन के दौरान स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारियों के एक उग्र समूह ने प्रधानमंत्री कार्यालय और कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया। इतना ही नहीं, देश के कई प्रमुख बैंकों की शाखाओं में भी तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने की इन घटनाओं के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
भीड़ को तितर-बितर करने और उग्र प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए सुरक्षा बलों को भारी बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान हुई झड़प में दर्जनों पुलिसकर्मियों और छात्रों के घायल होने की खबर है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।
प्रधानमंत्री एदी रामा के खिलाफ सबसे बड़ा जन आक्रोश
अल्बानिया की राजनीति में साल 2013 से सत्ता संभाल रहे प्रधानमंत्री एदी रामा के लिए यह प्रदर्शन अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है। पिछले साल मई में ही वे चौथी बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए थे। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद उनकी सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद से आम जनता और युवाओं में उनके प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही थी।
प्रदर्शनकारी छात्र अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं और वे सीधे तौर पर प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाही, तो सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना कर दिया और उनकी छवि खराब करने की कुत्सित कोशिश की। अब युवाओं का यह सब्र टूट चुका है और वे आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
"सरकार ने हमारी आवाज दबाने की हरसंभव कोशिश की है। शिक्षा हमारा अधिकार है, कोई कारोबार नहीं। जब तक प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देते, हमारा यह संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।" — प्रदर्शनकारी छात्र नेता, तिराना
दुनियाभर के 11 देशों में सुलग रही छात्र असंतोष की आग
अल्बानिया में चल रहा यह छात्र आंदोलन केवल एक देश तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर युवाओं में व्यवस्था के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा समय में भारत, फ्रांस, जर्मनी समेत दुनिया के कुल 11 देशों में छात्र किसी न किसी मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। शिक्षा के बाजारीकरण और भविष्य की अनिश्चितता ने ग्लोबल यूथ को एक मंच पर ला खड़ा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सरकारों ने शिक्षा और रोजगार की नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह असंतोष और भी विकराल रूप ले सकता है। फिलहाल अल्बानिया प्रशासन हालात पर काबू पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तिराना के मौजूदा हालात ने यूरोपीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।












