होम/एजुकेशन/ओडिशा में 13 हजार जूनियर शिक्षकों का फूटा गुस्सा: संविदा व्यवस्था खत्म करने और नौकरी नियमित करने की मांग पर अड़े
एजुकेशनपढ़ने में समय: 6 मिनट

ओडिशा में 13 हजार जूनियर शिक्षकों का फूटा गुस्सा: संविदा व्यवस्था खत्म करने और नौकरी नियमित करने की मांग पर अड़े

ओडिशा में करीब 13,000 जूनियर शिक्षकों ने अपनी नौकरी को नियमित करने की मांग को लेकर भुवनेश्वर में बड़ा प्रदर्शन किया। ये शिक्षक लंबे समय से संविदा आधारित नियुक्ति को खत्म करने की मांग कर रहे हैं, हालांकि मामला कानूनी दांव-पेंच और हाईकोर्ट के आदेश के कारण अटका हुआ है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
19 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
ओडिशा में 13 हजार जूनियर शिक्षकों का फूटा गुस्सा: संविदा व्यवस्था खत्म करने और नौकरी नियमित करने की मांग पर अड़े
📷 ओडिशा में 13 हजार जूनियर शिक्षकों का फूटा गुस्सा: संविदा व्यवस्था खत्म करने और नौकरी नियमित करने की मांग पर अड़े — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • ओडिशा जूनियर टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले भुवनेश्वर के महात्मा गांधी मार्ग पर हजारों शिक्षक धरने पर बैठे।
  • मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने स्कीम आधारित जूनियर शिक्षकों के नियमितीकरण को मंजूरी दी थी, लेकिन मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
  • वरिष्ठता सूची और नियमों को लेकर उठे विवाद के कारण ओडिशा हाईकोर्ट ने अप्रैल में नियमितीकरण प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के भविष्य को लेकर एक बार फिर बड़ा घमासान मचा हुआ है। राज्य के विभिन्न सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे करीब 13,000 जूनियर शिक्षकों ने अपनी नौकरियों को नियमित करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया है। हाथों में तख्तियां लिए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इन शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन थामने वाला नहीं है।

भुवनेश्वर के महात्मा गांधी मार्ग पर उमड़ी शिक्षकों की भारी भीड़

गुरुवार को ओडिशा जूनियर टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर राज्यभर से आए हजारों जूनियर शिक्षक भुवनेश्वर के ऐतिहासिक महात्मा गांधी मार्ग पर धरने पर बैठ गए। सुबह से ही शुरू हुए इस प्रदर्शन में शिक्षकों का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिल रहा था। शिक्षकों का कहना है कि वे बीते कई सालों से स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की नौकरी का भविष्य अब भी अधर में लटका हुआ है। संविदा आधारित नियुक्ति व्यवस्था के कारण उन्हें न तो वे तमाम सुविधाएं मिलती हैं जो एक नियमित सरकारी शिक्षक को मिलती हैं, और न ही उनके करियर को लेकर कोई स्थिरता है।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन शिक्षकों के जोश और आक्रोश के आगे प्रशासन भी सतर्क नजर आया। एसोसिएशन के नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इस प्रदर्शन को ओडिशा के अन्य जिलों और ग्रामीण इलाकों तक भी विस्तार दिया जा सकता है, जिससे प्रशासनिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

📷 भुवनेश्वर में सड़कों पर उतरे ओडिशा के जूनियर शिक्षक
विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

फ्लिपकार्ट बिग बिलियन सेल से पहले अर्ली बर्ड डील्स लाइव: सस्ते में मिल रहे हैं धांसू स्मार्टफोन्स, जानिए ऑफर्स की पूरी डिटेल

फ्लिपकार्ट बिग बिलियन सेल से पहले अर्ली बर्ड डील्स लाइव: सस्ते में मिल रहे हैं धांसू स्मार्टफोन्स, जानिए ऑफर्स की पूरी डिटेल

सावधान! आंखों का सामान्य इंफेक्शन बन रहा है खतरनाक रेजिस्टेंस आई फ्लू, ऐसे बिगाड़ रहा है सेहत

सावधान! आंखों का सामान्य इंफेक्शन बन रहा है खतरनाक रेजिस्टेंस आई फ्लू, ऐसे बिगाड़ रहा है सेहत

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर देने की तैयारी, उठ रहे सवाल

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर देने की तैयारी, उठ रहे सवाल

बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रशांत किशोर की पार्टी ने उतारे सभी 8 उम्मीदवार, शिक्षा और रोजगार को बनाया बड़ा मुद्दा

बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रशांत किशोर की पार्टी ने उतारे सभी 8 उम्मीदवार, शिक्षा और रोजगार को बनाया बड़ा मुद्दा

बच्चों में बढ़ती डायबिटीज का नया खुलासा: आंतों के इस बड़े दोष से तीन गुना बढ़ रहा खतरा

बच्चों में बढ़ती डायबिटीज का नया खुलासा: आंतों के इस बड़े दोष से तीन गुना बढ़ रहा खतरा

महंगे स्मार्टफोन की सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा: चंद रुपयों वाला सस्ता स्क्रीन गार्ड बिगाड़ रहा फोन का टच और सेंसर

महंगे स्मार्टफोन की सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा: चंद रुपयों वाला सस्ता स्क्रीन गार्ड बिगाड़ रहा फोन का टच और सेंसर

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

ऑस्कर में मराठी फिल्म की एंट्री पर घमासान: अनुराग कश्यप के तंज पर भड़के डायरेक्टर, दिया करारा जवाब

ऑस्कर में मराठी फिल्म की एंट्री पर घमासान: अनुराग कश्यप के तंज पर भड़के डायरेक्टर, दिया करारा जवाब

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद भी क्यों अटका है नियमितीकरण?

इस पूरे विवाद की जड़ में सरकारी प्रक्रियाओं की सुस्ती और कानूनी पेंच फंसे हुए हैं। कुछ समय पहले राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने राज्य में स्कीम आधारित जूनियर शिक्षकों के नियमितीकरण की फाइल को हरी झंडी दिखाई थी। मुख्यमंत्री की इस मंजूरी के बाद शिक्षा जगत में एक उम्मीद की किरण जागी थी कि अब इन शिक्षकों के दिन बहुरेंगे। इसके तुरंत बाद, स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने 2 अप्रैल को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए थे।

योजना के मुताबिक, इन शिक्षकों की नियुक्ति 2023-24 के शिक्षक सत्र में हुई थी और सरकार की यह मंशा थी कि इन्हें इनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही नियमित कर दिया जाए। हालांकि, ज़मीनी हकीकत कागजी घोषणाओं से बिल्कुल उलट साबित हुई। विभाग की ओर से प्रक्रिया तो आगे बढ़ाई गई, लेकिन अभी तक धरातल पर एक भी स्कीम आधारित जूनियर टीचर को नियमित नहीं किया जा सका है। यही कारण है कि शिक्षकों का प्रशासनिक व्यवस्था से मोहभंग हो चुका है और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

ओडिशा हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और कानूनी विवाद

नियमितीकरण की यह राह इतनी आसान नहीं थी जितनी कि शिक्षकों को उम्मीद थी। प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही यह पूरा मामला कानूनी विवादों के दलदल में फंस गया। राज्य के कुछ संविदा शिक्षकों ने ही नियमितीकरण की इस प्रक्रिया के खिलाफ ओडिशा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकार्ताओं की मुख्य आपत्ति वरिष्ठता यानी सिनियरिटी के मुद्दे को लेकर थी। उनकी दलील थी कि यदि 2023-24 के नए शिक्षकों को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से ही नियमित कर दिया जाता है, तो वे वरिष्ठता सूची में उन शिक्षकों से ऊपर आ जाएंगे जिनकी भर्ती उनसे काफी पहले हुई थी।

इस कानूनी याचिका पर सुनवाई करते हुए गत 14 अप्रैल को ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नियमितीकरण के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने सरकार से इस पूरी प्रक्रिया के लिए तय किए गए नियमों और मानदंडों का पूरा ब्योरा मांगा था और इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के इस आदेश के बाद से ही नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया पर कानूनी ताला लग गया है, जो अब तक खुला नहीं है।

सरकार पर हलफनामा दाखिल न करने का गंभीर आरोप

आंदोलन कर रहे जूनियर शिक्षकों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के इतने महीने बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अभी तक अदालत में जवाब या हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार की इस उदासीनता और ढुलमुल रवैये के कारण ही मामला लगातार खिंच रहा है और कोर्ट की रोक हटने का नाम नहीं ले रही है। यदि सरकार ने समय रहते अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा होता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।

"हम लंबे समय से शिक्षा विभाग और सरकार के चक्कर काट रहे हैं। हमने अपनी जवानी और मेहनत इन स्कूलों को दी है, लेकिन आज भी हमें संविदा के दर्जे पर ही काम करना पड़ रहा है। सरकार जल्द से जल्द हाईकोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल करे और हमारी नौकरी को नियमित करने का रास्ता साफ करे।" — ओडिशा जूनियर टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि

शिक्षकों का कहना है कि वे केवल अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार अदालत में अटके इस मामले की पैरवी तेजी से करे और कानूनी अड़चनों को दूर करे ताकि हजारों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके। संविदा जैसी शोषणकारी व्यवस्था से मुक्ति पाना उनका मूल अधिकार बन चुका है।

भविष्य की रणनीति और शिक्षकों की दो टूक मांगें

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ओडिशा जूनियर टीचर्स एसोसिएशन ने अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट कर दी है। उनकी सबसे प्रमुख और पहली मांग यही है कि उनकी नौकरियों को संविदा या किसी भी अन्य अस्थाई व्यवस्था से पूरी तरह बाहर किया जाए और उन्हें एक नियमित और पूर्ण सरकारी शिक्षक का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा, वे चाहते हैं कि सरकार बिना किसी और देरी के अदालत में आवश्यक दस्तावेज पेश करे।

यदि आने वाले दिनों में सरकार इस पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो शिक्षकों का यह रोष एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है। आगामी दिनों में विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर सकते हैं। फिलहाल, सबकी निगाहें ओडिशा सरकार के अगले कदम और हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हुई हैं कि कब इन 13,000 शिक्षकों के जीवन में नियमितता का उजाला आ पाएगा।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

फ्लिपकार्ट बिग बिलियन सेल से पहले अर्ली बर्ड डील्स लाइव: सस्ते में मिल रहे हैं धांसू स्मार्टफोन्स, जानिए ऑफर्स की पूरी डिटेलNATIONAL

फ्लिपकार्ट बिग बिलियन सेल से पहले अर्ली बर्ड डील्स लाइव: सस्ते में मिल रहे हैं धांसू स्मार्टफोन्स, जानिए ऑफर्स की पूरी डिटेल

24 सित॰
सावधान! आंखों का सामान्य इंफेक्शन बन रहा है खतरनाक रेजिस्टेंस आई फ्लू, ऐसे बिगाड़ रहा है सेहतNATIONAL

सावधान! आंखों का सामान्य इंफेक्शन बन रहा है खतरनाक रेजिस्टेंस आई फ्लू, ऐसे बिगाड़ रहा है सेहत

24 सित॰
मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर देने की तैयारी, उठ रहे सवालNATIONAL

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर देने की तैयारी, उठ रहे सवाल

24 सित॰
बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रशांत किशोर की पार्टी ने उतारे सभी 8 उम्मीदवार, शिक्षा और रोजगार को बनाया बड़ा मुद्दाPOLITICS

बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रशांत किशोर की पार्टी ने उतारे सभी 8 उम्मीदवार, शिक्षा और रोजगार को बनाया बड़ा मुद्दा

24 सित॰
बच्चों में बढ़ती डायबिटीज का नया खुलासा: आंतों के इस बड़े दोष से तीन गुना बढ़ रहा खतराNATIONAL

बच्चों में बढ़ती डायबिटीज का नया खुलासा: आंतों के इस बड़े दोष से तीन गुना बढ़ रहा खतरा

24 सित॰
महंगे स्मार्टफोन की सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा: चंद रुपयों वाला सस्ता स्क्रीन गार्ड बिगाड़ रहा फोन का टच और सेंसरNATIONAL

महंगे स्मार्टफोन की सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा: चंद रुपयों वाला सस्ता स्क्रीन गार्ड बिगाड़ रहा फोन का टच और सेंसर

24 सित॰
बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशनNATIONAL

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

24 सित॰
ऑस्कर में मराठी फिल्म की एंट्री पर घमासान: अनुराग कश्यप के तंज पर भड़के डायरेक्टर, दिया करारा जवाबNATIONAL

ऑस्कर में मराठी फिल्म की एंट्री पर घमासान: अनुराग कश्यप के तंज पर भड़के डायरेक्टर, दिया करारा जवाब

24 सित॰